केजरीवाल अगर दिल्ली में दिल लगा कर काम करते तो कांग्रेस से गठबंधन के इच्छुक न होते : हरदीप पुरी
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केन्द्रीय आवास एवं शहरी विकास राज्यमंत्री हरदीप सिंह पुरी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर जाति और आरोप प्रत्यारोप की राजनीति करने का आरोप लगाते हुये कहा कि जनता के काम नहीं करने के कारण ही उन्हें कांग्रेस के साथ गठबंधन करने के लिये गुहार लगानी पड़ रही है।
पुरी ने पीटीआई भाषा को बताया कि दिल्ली में स्वच्छता, स्वास्थ्य और परिवहन सहित किसी भी मामले में केजरीवाल सरकार ने कोई काम नहीं किया, सिर्फ केन्द्र सरकार या नगर निगम पर काम नहीं करने देने के आरोप लगाये हैं। उन्होंने कहा, ‘‘केजरीवाल ने अगर दिल्ली में दिल लगा कर काम किया होता तो मैं समझता हूं कि वह कांग्रेस से गठबंधन करने के लिये इतने इच्छुक नहीं होते।‘‘
उन्होंने कहा कि दिल्ली की तमाम परियोजनायें सालों से सिर्फ इसलिये लंबित हैं क्योंकि दिल्ली सरकार अपने हिस्से की दस प्रतिशत राशि नहीं दे रही है। पुरी ने कहा, ‘‘इनके (केजरीवाल सरकार) बारे में अपने अनुभव के आधार पर मैं कह सकता हूं कि विकासकार्यों में इनकी कतई रुचि नहीं है। इनका मूल मकसद वोटबैंक की राजनीति करना मात्र है।’’
पुरी ने दावा किया कि आईटीओ स्काईवॉक और महिपालपुर फ्लाईओवर जैसी तमाम परियोजनायें उनके मंत्रालय ने डीडीए सहित अन्य एजेंसियों से दिल्ली सरकार के हिस्से की राशि का भुगतान करवाकर रिकॉर्ड समय में पूरी की हैं।
आप कांग्रेस गठबंधन के बारे में केन्द्रीय मंत्री पुरी ने कहा कि दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने काम किया नहीं, पंजाब में आप बिल्कुल खत्म हो गयी है, वहां इनके सांसद विधायक आप को छोड़ गये हैं, इसलिये केजरीवाल, कांग्रेस से गठबंधन के पीछे पड़े हुये हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘आप की पैदाइश कांग्रेस के खिलाफ अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से हुयी थी। ऐसे में सवाल ये उठता है कि पांच साल में या तो कांग्रेस ईमानदार हो गयी या आप भ्रष्ट हो गयी। इस मूल प्रश्न के साथ ही जनता में यह स्पष्ट धारणा बनी है कि आप पूरी तरह से भ्रष्ट है।’’
पुरी ने दावा किया कि आप सरकार की तमाम परियोजनाओं के लंबित होने की एक प्रमुख वजह भ्रष्टाचार भी है। दिल्ली मेट्रो और दिल्ली परिवहन निगम की बस सेवा की तुलना से भी यह बात साबित होती है।
उन्होंने कहा कि डीटीसी में 11 हजार बसों की जरूरत में 7000 बसों की कमी है। इसकी एकमात्र वजह है कि केजरीवाल सरकार सत्ता में आने के बाद अब तक एक भी बस नहीं खरीद सकी।
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