स्तनपान: अस्पताल में आधे शिशुओं को पहले घंटे में नहीं मिलता मां का दूध, मासूमों के लिए वैक्सीन का करता है काम
देश के अस्पतालों में जन्म ले रहे आधे नवजातों को पहले घंटे में मां का दूध नहीं मिल पाता। यह दूध बच्चे के लिए वैक्सीन का काम करता है। जो बच्चे को कई तरह के रोग से सुरक्षित रखता है।
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देश के अस्पतालों में जन्म ले रहे आधे नवजातों को पहले घंटे में मां का दूध नहीं मिल पाता। यह दूध बच्चे के लिए वैक्सीन का काम करता है। जो बच्चे को कई तरह के रोग से सुरक्षित रखता है। साथ ही उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।
डिलीवरी के बाद स्तनपान करवाने से महिला में बच्चेदानी का मुंह बंद होता है। वहीं खून के रिसाव में भी कमी आती है। समस्या की रोकथाम के लिए बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान शुरू करने की तैयारी की जा रही है। शनिवार से लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में शुरू हुए नेशनल एसोसिएशन फॉर रिप्रोडक्टिव एंड चाइल्ड हेल्थ ऑफ इंडिया (नारची) के 29वें वार्षिक सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (बाल पोषण) की उपायुक्त डॉ. जोया अली रिजवी ने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के आंकड़े का जिक्र किया। इसमें बताया कि देश में करीब 80 फीसदी नवजात का जन्म अस्पतालों में होता है और करीब 40 फीसदी बच्चों को पहले एक घंटे में मां का दूध नहीं मिल पाता।
वहीं, नारचीकॉन 2023 की चेयरपर्सन व लेडी हार्डिंग अस्पताल में प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की डॉ. मंजू पुरी ने कहा कि अभी अस्पताल में ऐसी व्यवस्था ही नहीं है कि बच्चा पैदा होते ही उसकी मां के पास लाया जाए। देखा गया है कि बच्चे के जन्म के बाद दूसरे काम किए जाते हैं। पिछले कुछ सालों में सर्जरी से बच्चा पैदा करने की स्थिति बढ़ गई है। इसमें भी बच्चा पैदा होने के एक-दो घंटे बाद बच्चे को मां के पेट पर रखा जाता है। जबकि बच्चा पैदा होते ही काफी सक्रिय होता है और उसे तुरंत मां के पेट पर रखना चाहिए। इससे मां की बच्चेदानी का मुंह सिकुड़ता है और खून का रिसाव भी कम होता है।
एनीमिया की समस्या को नियमित देखभाल से दूर किया जा सकता है। लेडी हार्डिंग अस्पताल ने इसे लेकर एक अध्ययन किया। इसमें 18 माह तक अस्पताल में आने वाली महिलाओं की जांच की गई और एनीमिया की शिकायत पाए जाने पर नियमित दवा व उपचार किया गया।
मां का दूध होगा स्टोर
जन्म के बाद बच्चे को तुरंत मां दूध उपलब्ध करवाने के लिए मां का दूध स्टोर भी किया जाएगा। केंद्र सरकार इसके लिए विशेष अभियान चल रही है। डॉ. पुरी का कहना है कि कई बार डिलीवरी के बाद बच्चे को मां का दूध दे पाना संभव नहीं होता। ऐसी स्थिति में मां का दूध लेकर सुरक्षित स्टोर किया जा सकता है। लेडी हार्डिंग में इसका केंद्र है और सुविधाएं बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
आशा वर्कर चलाएंगी अभियान
दिल्ली को एनीमिया मुक्त बनाने के लिए आशा वर्कर के सहयोग से अभियान चलाया जाएगा। आशा वर्कर हिमोग्लोबिन की जांच करने में प्रशिक्षित होंगी और दिल्ली के सभी 11 जिलों में इस दिशा में काम करेगी। इस दौरान पहले आशा वर्कर की जांच की गई। उनमें कमी पाए जाने के बाद उनमें सुधार किया गया और उसका फायदा बताया गया। दिल्ली की परिवार कल्याण विभाग निदेशक डॉ. वंदना बग्गा ने कहा कि दिल्ली को एनिमिया मुक्त बनाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। बता दें कि पुरुष व महिला के हर वर्ग में 40 से 60 फीसदी तक एनिमिया की शिकायत है।