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जीएमडीए रैपिड मेट्रो लेने तो तैयार, 3 हजार करोड़ का घाटा नहीं, सोमवार को हाईकोर्ट में सुनवाई
Sat, 07 Sep 2019 08:39 PM IST
शाहरुख खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुरुग्राम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुरुग्राम
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 07 Sep 2019 08:39 PM IST
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फाइल फोटो
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रैपिड मेट्रो की बागडोर संभालने के लिए गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) ने कमर कस ली, मगर इसके आड़े रैपिड मेट्रो का वर्तमान करीब तीन हजार करोड़ रुपये का घाटा आ रहा है।
जीएमडीए अधिकारियों की मानें तो आईएल एंड एफएस कंपनी रैपिड मेट्रो की आड़ में अपना करीब 3 हजार करोड़ का घाटा भी सरकार को सौंपना चाहता है जिसके लिए वह तैयार नहीं है। जीएमडीए की निगाहें पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय पर है। न्यायालय के फैसले के अनुसार ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
आईएल एंड एफएस इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण से इसका करार कर नवंबर 2013 से रैपिड मेट्रो का संचालन शुरू किया गया था। पहले चरण में सिकंदरपुर से शंकर चौक तक 5.1 किमी के ट्रैक पर रैपिड मेट्रो का संचालन शुरू किया गया था। दूसरे चरण में इसका विस्तार करते हुए सिकंदरपुर से सेक्टर-56 तक किया गया था।
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रैपिड रेल प्रवक्ता की मानें तो वर्तमान में इस पर रोजाना करीब 60 हजार यात्री सफर करते हैं। कंपनी की तरफ से हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के साथ हुए करार के तहत 90 दिन पहले नोटिस भेजकर रैपिड मेट्रो के संचालन को नियमित न करने की इच्छा जताई। इसके तहत 9 सितंबर को कंपनी द्वारा रैपिड मेट्रो का संचालन बंद कर हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण को सौंपना था।
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जीएमडीए अधिकारियों की मानें तो आईएल एंड एफएस कंपनी रैपिड मेट्रो की आड़ में अपना करीब 3 हजार करोड़ का घाटा भी सरकार को सौंपना चाहता है जिसके लिए वह तैयार नहीं है। जीएमडीए की निगाहें पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय पर है। न्यायालय के फैसले के अनुसार ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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आईएल एंड एफएस इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण से इसका करार कर नवंबर 2013 से रैपिड मेट्रो का संचालन शुरू किया गया था। पहले चरण में सिकंदरपुर से शंकर चौक तक 5.1 किमी के ट्रैक पर रैपिड मेट्रो का संचालन शुरू किया गया था। दूसरे चरण में इसका विस्तार करते हुए सिकंदरपुर से सेक्टर-56 तक किया गया था।
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रैपिड रेल प्रवक्ता की मानें तो वर्तमान में इस पर रोजाना करीब 60 हजार यात्री सफर करते हैं। कंपनी की तरफ से हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के साथ हुए करार के तहत 90 दिन पहले नोटिस भेजकर रैपिड मेट्रो के संचालन को नियमित न करने की इच्छा जताई। इसके तहत 9 सितंबर को कंपनी द्वारा रैपिड मेट्रो का संचालन बंद कर हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण को सौंपना था।
नोटिस मिलते ही अधिकारियों ने इसकी सूचना हरियाणा सरकार को दी और इसे टेकओवर करने की तैयारी शुरू कर दी गई। इसके लिए जीएमडीए ने तैयारी शुरू करते हुए दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन से सहयोग मांगा। अधिकारियों के मुताबिक, इसे टेक ओवर करने पर विचार चल रहा है, लेकिन इसके संचालन में बड़ी बाधा 3 हजार करोड़ रुपये की आ रही है।
अधिकारियों ने बताया कि कंपनी रैपिड मेट्रो के संचालन के साथ अपना 3 हजार करोड़ रुपये का घाटा भी सरकार को सौंपना चाहती है जो हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के साथ हुए करार के खिलाफ है। इस पर एचएसवीपी ने जब घाटे के साथ मेट्रो लेने से मना कर दिया तो आईएल एंड एफएस कंपनी ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर दी। इस पर सोमवार को सुनवाई होनी है।
डीएमआरसी से मांगी मदद
अधिकारियों के मुताबिक, जीएमडीए रैपिड मेट्रो का संचालन करने में सक्षम है। इसके लिए जीएमडीए ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन से मदद मांगी है। जीएमडीए ने डीएमआरसी से कहा है कि उनके पास अनुभव नहीं है। यदि डीएमआरसी मदद करे तो वह हरियाणा मास रेपिड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को इसमें प्रशिक्षण देकर रैपिड मेट्रो को सफल बना सकती है।
रैपिड मेट्रो संचालन करने वाली कंपनी अपना करीब 3 हजार करोड़ का घाटा भी सरकार को देना चाहती है। घाटे को लेकर विवाद है। मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। अदालत के आदेशों की पालना की जाएगी। जीएमडीए रैपिड मेट्रो संचालन के लिए तैयार है।
- वी उमाशंकर, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जीएमडीए
अधिकारियों ने बताया कि कंपनी रैपिड मेट्रो के संचालन के साथ अपना 3 हजार करोड़ रुपये का घाटा भी सरकार को सौंपना चाहती है जो हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के साथ हुए करार के खिलाफ है। इस पर एचएसवीपी ने जब घाटे के साथ मेट्रो लेने से मना कर दिया तो आईएल एंड एफएस कंपनी ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर दी। इस पर सोमवार को सुनवाई होनी है।
डीएमआरसी से मांगी मदद
अधिकारियों के मुताबिक, जीएमडीए रैपिड मेट्रो का संचालन करने में सक्षम है। इसके लिए जीएमडीए ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन से मदद मांगी है। जीएमडीए ने डीएमआरसी से कहा है कि उनके पास अनुभव नहीं है। यदि डीएमआरसी मदद करे तो वह हरियाणा मास रेपिड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को इसमें प्रशिक्षण देकर रैपिड मेट्रो को सफल बना सकती है।
रैपिड मेट्रो संचालन करने वाली कंपनी अपना करीब 3 हजार करोड़ का घाटा भी सरकार को देना चाहती है। घाटे को लेकर विवाद है। मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। अदालत के आदेशों की पालना की जाएगी। जीएमडीए रैपिड मेट्रो संचालन के लिए तैयार है।
- वी उमाशंकर, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जीएमडीए