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गुरुग्राम नगर निगम की चुनावी प्रक्रिया पर 28 तक रोक: हाईकोर्ट

Thu, 09 Feb 2017 12:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम Updated Thu, 09 Feb 2017 12:17 AM IST
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gurugram loal election cancelled by high court
कोर्ट - फोटो : डेमो फोटो

गुरुग्राम नगर निगम चुनाव के लिए हुई वार्डबंदी के खिलाफ दायर याचिका पर सुनाई करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया पर 28 फरवरी तक रोक लगा दी है। इससे पूर्व हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर इस मामले में जवाब मांगा था।

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बुधवार को जवाब नहीं आने पर जस्टिस महेश ग्रोवर और जस्टिस शेखर धवन की पीठ ने चुनावी प्रक्रिया पर रोक के आदेश जारी कर दिए। डीएलएफ कुतुब इनक्लेव आरडब्ल्यूए के प्रधान आरएस राठी, भूप सिंह तिगरा, जिले सिंह नंबरदार व जगमोहन सरपंच सिकंदरपुर ने हाईकोर्ट में वार्ड की परिसीमन के खिलाफ याचिका दायर की थी।
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इन्होंने गुरुग्राम नगर निगम चुनाव के लिए की गई वार्डबंदी से संबंधित दो सितंबर 2016 और 13 जनवरी 2017 की अधिसूचना को रद करने की मांग की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि वार्डबंदी राजनैतिक प्रभाव के चलते इस तरह से की गई है कि सत्ताधारी दल को चुनाव में फायदा हो।
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याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि वार्डबंदी करने में एडहॉक कमेटी के सदस्यों ने मनमानी की है। गलत ढंग से वार्डों का बंटवारा किया गया। इसके अलावा नगर निगम अधिनियम 1994 के वार्ड नियमों का भी उल्लंघन किया गया। सबसे बड़ा उल्लंघन जनसंख्या के आंकड़ों में किया गया है।

याचिकाकर्ता पक्ष के अधिवक्ता सुवनीत शर्मा का कहना है कि कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि वार्डबंदी से संबंधित फाइनल नोटिफिकेशन की समीक्षा किए बिना चुनाव घोषित नहीं किए जाएं। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 28 फरवरी तय की है। इसके लिए सरकार ने एडहॉक कमेटी का गठन किया था।

कमेटी के सदस्यों में विधायक उमेश अग्रवाल, जीएल शर्मा, पूर्व पार्षद दलीप साहनी, पूर्व पार्षद गार्गी कक्कड़ को रखा गया जो सत्ताधारी दल से जुड़े हैं। नियमों को ताक पर रखकर चुनाव के लिए वार्डबंदी की गई है। याचिका में हाईकोर्ट से आग्रह किया गया कि वो वार्डबंदी को जारी करने वाली अधिसूचना पर रोक लगाई जाए।


क्या कहा गया है याचिका में
वार्डबंदी के लिए गठित कमेटी ने तय किया था कि कोई भी वार्ड एक से अधिक विधानसभा क्षेत्र में वितरित नहीं होगा। दूसरा यह तय किया था कोई भी वार्ड रेलवे लाइन और हाईवे क्रॉस नहीं करेगा लेकिन प्राथमिक रूप से तय किए गए इन सिद्धांतों की कमेटी के सदस्यों ने जमकर अवहेलना की। वार्डबंदी से संबंधित एडहॉक कमेटी के लोग सत्ताधारी दल से जुड़े हैं और राजनीतिक लाभ के लिए नियमों को ताक पर रखकर काम किया गया।

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