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Gurugram News: सात वर्षों से स्कूल भवन का इंतजार, खुले आसमान तले पढ़ने को मजबूर मासूम

Thu, 23 Apr 2026 12:29 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 23 Apr 2026 12:29 AM IST
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Waiting for school building for seven years, innocent children forced to study under the open sky
2 खुले आसमान के नीचे पढ़ाई करते मासूम।
-ग्राम पंचायत ऐंचवाड़ी के खेड़ाबांस गांव में वर्ष 2019 में शुरू हुआ था स्कूल
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-गांव के प्राथमिक विद्यालय का भवन पहले से ही जर्जर घोषित
-गांव की पहले से ही जर्जर चौपाल में खोला गया था विद्यालय
-ग्रामीणों ने की भवन का निर्माण कराने की मांग
सद्दाम हुसैन



पिनगवां । मासूम बच्चों के सुनहरे भविष्य की नींव जहां मजबूत स्कूल भवनों में रखी जानी चाहिए, वहीं ग्राम पंचायत ऐंचवाड़ी के खेड़ाबास गांव के नौनिहाल पिछले सात वर्षों से खुले आसमान के नीचे शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं। बच्चों के बेहतर मुस्तकबिल और उज्जवल भविष्य के लिए वर्ष 2019 में जिस उम्मीद के साथ गांव खेड़ाबास में अस्थायी रूप से स्कूल शुरू किया गया था, वह उम्मीद आज सात वर्षों बाद भी अधूरी पड़ी है।
नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन गांव के मासूम बच्चे आज भी पक्के स्कूल भवन के इंतजार में खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं। शिक्षा पाने की चाह रखने वाले नौनिहाल गर्मी, सर्दी और बारिश की मार झेलते हुए अपना भविष्य संवारने की कोशिश कर रहे हैं। गांव के प्राथमिक विद्यालय की पुरानी बिल्डिंग को काफी समय पहले जर्जर और क्षतिग्रस्त घोषित कर दिया गया था। स्कूल में फिलहाल करीब 80 बच्चों का नाम दर्ज है । बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए भवन के अंदर कक्षाएं लगाने पर रोक लगा दी गई थी। वर्ष 2019 में बच्चों की पढ़ाई गांव में ही हो सके और उनका बेहतर मुस्तकबिल बन सके, इसके लिए गांव की चौपाल में स्कूल की कक्षाएं शुरू कराई गई थी।
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मगर विडंबना यह रही कि जिस चौपाल में स्कूल चलाया गया, वह स्वयं पहले से खंडहर हालत में थी। शिक्षक राजेश कुमार ने बताया कि तब से लेकर अब तक न तो पुराने भवन की मरम्मत कराई गई और न ही नया स्कूल भवन बन पाया है। मजबूरी में बच्चों को कभी नीम के पेड़ के नीचे तो कभी खुले स्थान पर बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। इससे पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है।
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शिक्षा का स्तर सुधारने के दावे खोखले :
जाहुल खान, साजिद खान, आरिफ खान, तौफ़ीक खान आदि ग्रामीणों का कहना है कि सरकार शिक्षा व्यवस्था सुधारने के दावे करती है, लेकिन खेड़ाबास गांव की स्थिति उन दावों पर सवाल खड़े करती है। सात वर्षों से बच्चे मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं और अभिभावकों में भी नाराजगी बढ़ रही है।
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जमीन से संबंधित कार्रवाई पूरी कर शिक्षा विभाग को सौंपी :
जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत द्वारा स्कूल जमीन से संबंधित सभी कागजी कार्रवाई पूरी कर शिक्षा विभाग को सौंप दी गई है। इसके बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका।स्कूल भवन नहीं होने और बच्चों को खुले आसमान के नीचे पढ़ाई कराने की मजबूरी के चलते अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला यहां कराने से कतरा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि भवन बनने तक स्कूल में नामांकन बढ़ना मुश्किल है और बच्चों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।



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स्कूल को वर्ष 2019 में सुरु किया गया था तब से लेकर अब तक न तो पुराने भवन की मरम्मत कराई गई और न ही नया स्कूल भवन बन पाया है। मजबूरी में बच्चों को कभी नीम के पेड़ के नीचे तो कभी खुले स्थान पर बैठाकर पढ़ाया जा रहा है।
-राजेश कुमार, स्कूल इंचार्ज



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ग्राम पंचायत द्वारा स्कूल की जमीन से संबंधित सभी कागजी कार्रवाई पूरी कर शिक्षा विभाग को सौंप दी गई है। आगे स्कूल भवन निर्माण को लेकर पंचायत से जो भी सहयोग मांगा जाएगा, उसे पूरी जिम्मेदारी के साथ किया जाएगा।

- हसन मोहम्मद, सरपंच प्रतिनिधि

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मामला हमारे संज्ञान में है और यह बच्चों से जुड़ी बड़ी समस्या है। इस संबंध में जिला परिषद चेयरमैन से हमारी बातचीत हो चुकी है। जिला परिषद की ओर से जल्द ही स्कूल में दो कमरे और शौचालय बनवाए जाएंगे, ताकि बच्चों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
-फजरूद्दीन, भाजपा पार्षद
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