{"_id":"65760109fd1f8cccbf0c94dc","slug":"viral-and-allergy-patients-increase-in-childrens-opd-gurgaon-news-c-24-1-gur1002-20621-2023-12-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gurugram News: बच्चों की ओपीडी में बढ़े वायरल और एलर्जी के मरीज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gurugram News: बच्चों की ओपीडी में बढ़े वायरल और एलर्जी के मरीज
विज्ञापन
पीड़ितों को खांसने और सांस लेने में हो रही दिक्कत, विशेषज्ञ दे रहे मास्क लगाने की सलाह
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। इन दिनों बच्चों की ओपीडी में वायरल और एलर्जी के मामले बढ़ने लगे हैं। ज्यादातर को निमोनिया के अलावा एलर्जी की समस्या देखने को मिल रही है। एलर्जी से पीड़ित बच्चों को खांसने और सांस लेने में दिक्कत महसूस हो रही है। ऐसे में विशेषज्ञ बच्चों को मौसम के अनुसार कपड़े पहनने और मास्क लगाने की सलाह दे रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने भी ऐसे बच्चों की सैंपलिंग और ट्रेवल हिस्ट्री रिकॉर्ड खंगालने शुरू कर दिए हैं।
चीन में तेजी से फैल रहे एवियन इन्फ्लूएंजा एच9एन2 का अलर्ट जिले में भी जारी किया गया है। इसके लिए निदेशालय से सीधे जिला स्तर पर ऐसे मामलों की रिपोर्ट मांगी जा चुकी है। राहत की बात यह है कि अभी तक जिले में ऐसे लक्षण के साथ किसी मरीज की पुष्टि नहीं हुई है। बावजूद इसके जिले में अगले दो माह तक चलने वाली श्वास मुहिम के साथ एच9एन2 के लिए भी विभाग को अलर्ट पर रखा गया है। इन दिनों बच्चों में निमोनिया के मामले ट्रेस करने के लिए श्वास अभियान चलाया जा रहा है। इस बीच किसी भी एवियन फ्लू से संबंधित या मिलते जुलते लक्षण के साथ किसी मरीज के मिलने पर सिस्टम अलर्ट रहेगा। जनवरी तक बच्चों में निमोनिया की जागरूकता व टेस्टिंग के लिए विभाग की टीमें प्राथमिक स्तर पर काम करने में जुटी हैं।
विभाग के नोडल व उप चिकित्सा अधिकारी डॉ. जय प्रकाश ने बताया कि सर्दी में बच्चों के लिए निमोनिया का अलर्ट जारी किया जाता है। इस बार चीन में फैले मामलों के कारण निमोनिया जैसे लक्षण से ग्रस्त बच्चों की ट्रेवल हिस्ट्री भी ली जा रही है। निजी अस्पतालों को भी यह निर्देश जारी किए गए हैं।
विज्ञापन
--
पांच साल तक के बच्चों को हो रही परेशानी
मेदांता अस्पताल के बाल रोग विभाग अध्यक्ष डॉ. राजीव उत्तम ने बताया कि निमोनिया और एलर्जी जैसे मामले पांच साल तक के बच्चों में अधिक है। यह उम्र वायरल और बैक्टीरिया संक्रमण के लिहाज से सबसे संवेदनशील है। इन दिनों हर दस में चार से पांच बच्चे इस परेशानी के साथ अस्पताल की ओपीडी में पहुंच रहे हैं। जरूरी है कि बच्चों को माता पिता अपने आप एंटीबायोटिक न खिलाएं। इससे बच्चों में ऐसी दवाओं का प्रभाव कम हो जाता है। विशेषज्ञ भी फिर जरूरत पड़ने पर वह सही दवा देने में सक्षम नहीं होते। लक्षण के आधार पर दवा, बचाव और सुरक्षा उपाय विशेषज्ञ की सलाह पर ही लें।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। इन दिनों बच्चों की ओपीडी में वायरल और एलर्जी के मामले बढ़ने लगे हैं। ज्यादातर को निमोनिया के अलावा एलर्जी की समस्या देखने को मिल रही है। एलर्जी से पीड़ित बच्चों को खांसने और सांस लेने में दिक्कत महसूस हो रही है। ऐसे में विशेषज्ञ बच्चों को मौसम के अनुसार कपड़े पहनने और मास्क लगाने की सलाह दे रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने भी ऐसे बच्चों की सैंपलिंग और ट्रेवल हिस्ट्री रिकॉर्ड खंगालने शुरू कर दिए हैं।
चीन में तेजी से फैल रहे एवियन इन्फ्लूएंजा एच9एन2 का अलर्ट जिले में भी जारी किया गया है। इसके लिए निदेशालय से सीधे जिला स्तर पर ऐसे मामलों की रिपोर्ट मांगी जा चुकी है। राहत की बात यह है कि अभी तक जिले में ऐसे लक्षण के साथ किसी मरीज की पुष्टि नहीं हुई है। बावजूद इसके जिले में अगले दो माह तक चलने वाली श्वास मुहिम के साथ एच9एन2 के लिए भी विभाग को अलर्ट पर रखा गया है। इन दिनों बच्चों में निमोनिया के मामले ट्रेस करने के लिए श्वास अभियान चलाया जा रहा है। इस बीच किसी भी एवियन फ्लू से संबंधित या मिलते जुलते लक्षण के साथ किसी मरीज के मिलने पर सिस्टम अलर्ट रहेगा। जनवरी तक बच्चों में निमोनिया की जागरूकता व टेस्टिंग के लिए विभाग की टीमें प्राथमिक स्तर पर काम करने में जुटी हैं।
विज्ञापन
विभाग के नोडल व उप चिकित्सा अधिकारी डॉ. जय प्रकाश ने बताया कि सर्दी में बच्चों के लिए निमोनिया का अलर्ट जारी किया जाता है। इस बार चीन में फैले मामलों के कारण निमोनिया जैसे लक्षण से ग्रस्त बच्चों की ट्रेवल हिस्ट्री भी ली जा रही है। निजी अस्पतालों को भी यह निर्देश जारी किए गए हैं।
विज्ञापन
पांच साल तक के बच्चों को हो रही परेशानी
मेदांता अस्पताल के बाल रोग विभाग अध्यक्ष डॉ. राजीव उत्तम ने बताया कि निमोनिया और एलर्जी जैसे मामले पांच साल तक के बच्चों में अधिक है। यह उम्र वायरल और बैक्टीरिया संक्रमण के लिहाज से सबसे संवेदनशील है। इन दिनों हर दस में चार से पांच बच्चे इस परेशानी के साथ अस्पताल की ओपीडी में पहुंच रहे हैं। जरूरी है कि बच्चों को माता पिता अपने आप एंटीबायोटिक न खिलाएं। इससे बच्चों में ऐसी दवाओं का प्रभाव कम हो जाता है। विशेषज्ञ भी फिर जरूरत पड़ने पर वह सही दवा देने में सक्षम नहीं होते। लक्षण के आधार पर दवा, बचाव और सुरक्षा उपाय विशेषज्ञ की सलाह पर ही लें।