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Gurugram News: बीमा कंपनी को गर्भावस्था क्लेम के 91,830 रुपये चुकाने होंगे
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गुरुग्राम। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीमा कंपनी को गर्भावस्था से जुड़े क्लेम का भुगतान करने का आदेश दिया है। कंपनी ने पैर में सूजन के उपचार का क्लेम रोक दिया था। अब उसे बीमा धारक को ब्याज सहित 91,830 रुपये देने होंगे।
सोहना निवासी राजेंद्र कुमार ने अपनी पत्नी सीमा रानी के लिए स्टार हेल्थ इंश्योरेंस से स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली थी। 12 दिसंबर 2022 को पत्नी के बाएं पैर में सूजन की शिकायत हुई। उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जांच में डीप वेन थ्रंबोसिस की समस्या सामने आई। उपचार पर 84,997 रुपये खर्च हुए, जिसका भुगतान राजेंद्र कुमार ने स्वयं किया। उन्होंने 91,830 रुपये का क्लेम बीमा कंपनी को भेजा था। बीमा कंपनी ने 3 फरवरी 2023 को यह क्लेम खारिज कर दिया। कंपनी का तर्क था कि यह समस्या गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताओं के कारण हुई थी।
आयोग ने दोनों पक्षों को सुना। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि डीप वेन थ्रंबोसिस कई कारणों से हो सकता है। यह मानना उचित नहीं है कि बीमारी केवल गर्भावस्था से जुड़ी जटिलता के कारण हुई। आयोग ने यह भी कहा कि यदि कंपनी को पुरानी बीमारी का संदेह था, तो पॉलिसी जारी करने से पहले चिकित्सीय जांच करानी चाहिए थी। आयोग ने मानसिक परेशानी के लिए 30 हजार रुपये और कानूनी खर्च के लिए 22 हजार रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। संवाद
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सोहना निवासी राजेंद्र कुमार ने अपनी पत्नी सीमा रानी के लिए स्टार हेल्थ इंश्योरेंस से स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली थी। 12 दिसंबर 2022 को पत्नी के बाएं पैर में सूजन की शिकायत हुई। उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जांच में डीप वेन थ्रंबोसिस की समस्या सामने आई। उपचार पर 84,997 रुपये खर्च हुए, जिसका भुगतान राजेंद्र कुमार ने स्वयं किया। उन्होंने 91,830 रुपये का क्लेम बीमा कंपनी को भेजा था। बीमा कंपनी ने 3 फरवरी 2023 को यह क्लेम खारिज कर दिया। कंपनी का तर्क था कि यह समस्या गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताओं के कारण हुई थी।
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आयोग ने दोनों पक्षों को सुना। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि डीप वेन थ्रंबोसिस कई कारणों से हो सकता है। यह मानना उचित नहीं है कि बीमारी केवल गर्भावस्था से जुड़ी जटिलता के कारण हुई। आयोग ने यह भी कहा कि यदि कंपनी को पुरानी बीमारी का संदेह था, तो पॉलिसी जारी करने से पहले चिकित्सीय जांच करानी चाहिए थी। आयोग ने मानसिक परेशानी के लिए 30 हजार रुपये और कानूनी खर्च के लिए 22 हजार रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। संवाद
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