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Gurugram News: अदालत ने बिजली चोरी का मामला पाया गलत
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अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। बिजली चोरी के मामले की सुनवाई करते हुए सिविल जज अभिषेक चौधरी की अदालत ने मामले को गलत करार देते हुए बिजली निगम को आदेश दिए हैं कि उपभोक्ता द्वारा जमा कराई गई जुर्माना राशि वापस की जाए। हालांकि अदालत ने जमा कराई गई जुर्माना राशि पर उपभोक्ता को कोई ब्याज नहीं दिया है। इस पर अब उपभोक्ता जिला एवं सत्र न्यायालय में याचिका दायर कर ब्याज देने की गुहार लगाएगी।
देवीलाल कालोनी की उपभोक्ता पूनम ने बताया कि 27 दिसम्बर 2017 को बिजली निगम के कर्मचारियों ने उसका बिजली का मीटर बदल दिया था, लेकिन इसकी जानकारी उन्हें नहीं दी गई थी। 7 मार्च 2018 को बिजली निगम ने उपभोक्ता के पति प्रताप सिंह को बिजली निगम की लैबोरेट्री में बुलाकर आरोप लगाए थे कि बिजली के मीटर की सील से छेड़छाड़ कर बिजली की चोरी की गई है। इसके साथ ही निगम ने उपभोक्ता पर 4 लाख 76 हजार 370 रुपये का जुर्माना भी लगा दिया था।
पीड़िता के अधिवक्ता क्षितिज मेहता ने बताया कि उपभोक्ता ने 24 अप्रैल 2018 को अदालत में बिजली निगम के खिलाफ केस दायर किया। अदालत ने उपभोक्ता को राहत देते हुए बिजली निगम को आदेश दिया था कि उपभोक्ता से 50 प्रतिशत जुर्माना राशि जमा करा ली जाए, ताकि उसका बिजली का कनेक्शन न कट सके। उपभोक्ता ने 50 प्रतिशत जुर्माना राशि जमा करा दी थी।
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सिविल जज अभिषेक चौधरी की अदालत ने अब चोरी के मामले को गलत करार देते हुए बिजली निगम को आदेश दिए हैं कि जमा कराई गई जुर्माना राशि उपभोक्ता को वापिस दी जाए। जुर्माना राशि पर ब्याज न दिए जाने को लेकर अब उपभोक्ता उच्च अदालत में अपील दायर करने की तैयारी में जुट गया है। अधिवक्ता का कहना है कि यदि कोई उपभोक्ता बिजली निगम में बिजली निगम द्वारा मांगी गई धनराशि जमा नहीं कराता है तो बिजली निगम उस पर ब्याज वसूल करता है।
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गुरुग्राम। बिजली चोरी के मामले की सुनवाई करते हुए सिविल जज अभिषेक चौधरी की अदालत ने मामले को गलत करार देते हुए बिजली निगम को आदेश दिए हैं कि उपभोक्ता द्वारा जमा कराई गई जुर्माना राशि वापस की जाए। हालांकि अदालत ने जमा कराई गई जुर्माना राशि पर उपभोक्ता को कोई ब्याज नहीं दिया है। इस पर अब उपभोक्ता जिला एवं सत्र न्यायालय में याचिका दायर कर ब्याज देने की गुहार लगाएगी।
देवीलाल कालोनी की उपभोक्ता पूनम ने बताया कि 27 दिसम्बर 2017 को बिजली निगम के कर्मचारियों ने उसका बिजली का मीटर बदल दिया था, लेकिन इसकी जानकारी उन्हें नहीं दी गई थी। 7 मार्च 2018 को बिजली निगम ने उपभोक्ता के पति प्रताप सिंह को बिजली निगम की लैबोरेट्री में बुलाकर आरोप लगाए थे कि बिजली के मीटर की सील से छेड़छाड़ कर बिजली की चोरी की गई है। इसके साथ ही निगम ने उपभोक्ता पर 4 लाख 76 हजार 370 रुपये का जुर्माना भी लगा दिया था।
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पीड़िता के अधिवक्ता क्षितिज मेहता ने बताया कि उपभोक्ता ने 24 अप्रैल 2018 को अदालत में बिजली निगम के खिलाफ केस दायर किया। अदालत ने उपभोक्ता को राहत देते हुए बिजली निगम को आदेश दिया था कि उपभोक्ता से 50 प्रतिशत जुर्माना राशि जमा करा ली जाए, ताकि उसका बिजली का कनेक्शन न कट सके। उपभोक्ता ने 50 प्रतिशत जुर्माना राशि जमा करा दी थी।
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सिविल जज अभिषेक चौधरी की अदालत ने अब चोरी के मामले को गलत करार देते हुए बिजली निगम को आदेश दिए हैं कि जमा कराई गई जुर्माना राशि उपभोक्ता को वापिस दी जाए। जुर्माना राशि पर ब्याज न दिए जाने को लेकर अब उपभोक्ता उच्च अदालत में अपील दायर करने की तैयारी में जुट गया है। अधिवक्ता का कहना है कि यदि कोई उपभोक्ता बिजली निगम में बिजली निगम द्वारा मांगी गई धनराशि जमा नहीं कराता है तो बिजली निगम उस पर ब्याज वसूल करता है।