फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Gurugram News ›   Supreme Court on demolition and sealing actions

Gurugram News: बिल्डर कॉलोनियों में तोड़फोड़, सीलिंग कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

Tue, 13 Oct 2026 07:21 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 13 Oct 2026 07:21 PM IST
विज्ञापन
Supreme Court on demolition and sealing actions
दो सप्ताह तक नहीं होगी कार्रवाई, मामले में अगली सुनवाई तीन को
विज्ञापन


अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम की बिल्डर कॉलोनियों में अवैध निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ चल रही तोड़फोड़ और सीलिंग की कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने गौरव कोहली बनाम हरियाणा सरकार मामले में दो सप्ताह तक कार्रवाई रोकने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में अगली सुनवाई तीन नवंबर को होगी।
नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के डीटीपीई अमित मधोलिया ने डीएलएफ, सुशांत लोक और साउथ सिटी में अब तक करीब 160 मकानों के खिलाफ कार्रवाई की है। विभाग ने डीएलएफ फेज-3, डीएलएफ फेज-4, सुशांत लोक-1 और साउथ सिटी-1 समेत कई क्षेत्रों में तोड़फोड़ की। यह कार्रवाई आवासीय मकानों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने और निर्माण नियमों के उल्लंघन पर हुई।
विज्ञापन

सुप्रीम कोर्ट में गौरव कोहली बनाम हरियाणा सरकार मामले की सुनवाई के दौरान बिल्डर कॉलोनियों में कार्रवाई से जुड़े मुद्दे पर विचार हुआ। याचिका में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जो नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के अधिकार क्षेत्र से संबंधित है। डीएलएफ के मकानों में सीलिंग और तोड़फोड़ शुरू होने के बाद कुछ मकान मालिकों ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि डीटीपीई को कार्रवाई का अधिकार नहीं है। उनका तर्क था कि यह क्षेत्र नगर निगम के दायरे में है और नगर निगम ही कार्रवाई कर सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

हाईकोर्ट में हुई थी सुनवाई
पंजाब एंव हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायाधीश रोहित कपूर की पीठ ने 7 सितंबर के आदेश में स्पष्ट किया था। इसमें नगर निगम की सीमा में आने वाली जमीन भी शामिल है। इसलिए किसी लाइसेंस कॉलोनी के नगर निगम गुरुग्राम की सीमा में शामिल होने से इस अधिनियम के तहत मिली शक्तियां खत्म नहीं होतीं। यह भी स्पष्ट किया गया था कि नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के निदेशक और उनके द्वारा अधिकृत अधिकारी का अधिकार वर्ष 1975 के अधिनियम के तहत जारी लाइसेंस व संबंधित प्रावधानों से आता है। यह अधिकार इस बात पर निर्भर नहीं करता कि जमीन नगर निगम की सीमा के अंदर है या बाहर। इसलिए नगर निगम की सीमा में शामिल किए जाने से विभाग का यह अधिकार प्रभावित नहीं होता। मामले में नगर निगम कानून के तहत नियंत्रित क्षेत्रों से संबंधित कुछ शक्तियां नगर निकायों को दिए जाने का भी उल्लेख किया गया। हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि इन प्रावधानों से वर्ष 1975 के अधिनियम के तहत लाइसेंस कॉलोनियों के संबंध में नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग को मिली शक्तियां नगर निगम को हस्तांतरित नहीं होतीं।

नियमों का उल्लंघन और कार्रवाई
डीएलएफ, सुशांत लोक-1, 2 व 3, साउथ सिटी-1 व 2, मालिबू टाउन, उप्पल साउथ एंड, विपुल वर्ल्ड, वाटिका सिटी, मेफील्ड गार्डन, रोजवुड सिटी और निर्वाणा कंट्री जैसी कॉलोनियों में करीब पांच हजार मकानों में नियमों का उल्लंघन पाया गया है। इन मकानों में बिल्डिंग और कब्जा प्रमाण पत्र का उल्लंघन किया गया है। करीब 30 फीसदी मकानों में पीजी, गेस्ट हाउस व शोरूम जैसी व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं। नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग ने इन उल्लंघनों के खिलाफ कार्रवाई की थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed