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Gurugram News: आज से पितृ पक्ष शुरू, पूर्वजों को तर्पण और श्राद्ध से देंगे श्रद्धांजलि

Sat, 06 Sep 2025 07:44 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 06 Sep 2025 07:44 PM IST
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Pitru Paksha starts from today, we will pay tribute to our ancestors with Tarpan and Shradh
21 सितंबर तक चलेंगे, श्राद्ध में पिंडदान का विशेष महत्व होता है
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व है। यह काल श्राद्ध और तर्पण के लिए समर्पित होता है, जिससे पितरों की आत्मा की शांति के लिए उन्हें अन्न-जल अर्पित किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, मृत्यु के बाद यदि विधिपूर्वक श्राद्ध न किया जाए तो आत्मा को मुक्ति नहीं मिलती और वह पृथ्वी लोक में भटकती रहती है। इस वर्ष पितृ पक्ष आज से आरंभ होकर 21 सितंबर तक चलेंगे। ब्रह्म पुराण के अनुसार, उचित काल, स्थान और विधि से ब्राह्मणों को अर्पित वस्तुएं पितरों तक पहुंचती हैं। श्राद्ध में पिंडदान का विशेष महत्व होता है।

पंडितों के अनुसार, जिस पूर्वज की मृत्यु तिथि ज्ञात हो, उसी तिथि को श्राद्ध करें। यदि तिथि ज्ञात न हो, तो सर्वपितृ अमावस्या (21 सितंबर) को सभी पितरों का श्राद्ध किया जा सकता है। धारणा है कि इस दौरान यमराज पितरों को मुक्त कर श्राद्ध ग्रहण करने की अनुमति देते हैं। कौओं को पितरों का प्रतीक माना जाता है और श्राद्ध का प्रथम अंश उन्हें दिया जाता है, ताकि पितृ तृप्त हो सकें।
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प्रथम श्राद्ध के साथ आज रात 9:57 बजे से लगेगा चन्द्रग्रहण
गुरुग्राम। आचार्य पुरोहित संघ के अध्यक्ष और शीतला देवी श्राइन बोर्ड के पूर्व सदस्य कथावाचक पंडित अमर चन्द भारद्वाज ने पितृपक्ष और आगामी चन्द्रग्रहण को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पितरों का तर्पण करने से सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है। पौराणिक कथा का उल्लेख करते हुए बताया कि कर्ण को भी पूर्वजों का श्राद्ध न करने के कारण स्वर्ग में भोजन के स्थान पर सोना मिला था, जिसके बाद उन्हें पृथ्वी पर आकर श्राद्ध करना पड़ा। उन्होंने बताया कि सात सितंबर रविवार को प्रथम श्राद्ध के साथ ही रात 9:57 बजे से चन्द्रग्रहण लगेगा, जो कि 1:26 बजे तक रहेगा। इसका सूतक दोपहर 12:57 बजे से प्रारंभ होगा। इस दौरान कोई भी शुभ कार्य, पूजा-पाठ वर्जित है। गर्भवती महिलाओं को धारदार वस्तुओं का प्रयोग और घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए। ग्रहण काल में स्नान, दान और मंत्रजाप विशेष फलदायी बताए गए। ग्रहण उपरांत स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने और राशिनुसार दान करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। संवाद
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