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अनेक सभ्यता आईं और विलुप्त हो गईं, जो जड़ से जुड़ीं थीं वही टिक पाईं : धर्मेंद्र प्रधान

Sat, 16 Nov 2024 11:06 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 16 Nov 2024 11:06 PM IST
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Many civilizations came and vanished, only those that were connected to their roots survived: Dharmendra Pradhan
विजन फॉर विकसित भारत विविभा- 2024 कार्यक्रम का दूसरा दिन, शिक्षा मंत्री ने की शिरकत
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संवाद न्यूज एजेंसी



गुरुग्राम। भारतीय शिक्षण मंडल की ओर से विजन फॉर विकसित भारत (विविभा-2024) कार्यक्रम में शनिवार को केंद्रीय
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शिरकत की। शिक्षा मंत्री ने शोधार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वेदों में लिखा गया है, युवा हमारी सृजनशक्ति हैं। आजादी के अमृतकाल में ये आयोजन बहुत महत्वपूर्ण और प्रासंगिक है। इसे एक सार्थक प्रयास मानता हूं। मंत्री ने कहा कि अनेक सभ्यता आईं और विलुप्त हो गईं, जो जड़ से जुड़ीं थीं वही टिक पाईं।
एसजीटी यूनिवर्सिटी में चल रहे कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि शोध गतिशील समाज के लिए आवश्यक है, क्योंकि यह सृजनात्मक चिंतन का आधार है। सदियों से वेद उपनिषद काल से भारतीय जीवन मूल्य, भारत में रहने वाले लोगों की कुछ मान्यताएं हैं, कुछ समझ है, कुछ शोध है। आज हमारे देश को न केवल भौतिक ऊंचाई तक ले जाने की चुनौती है, बल्कि विश्व गुरू भी बनना है। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा है कि हमें विश्वबंधु की भूमिका निभानी चाहिए। विविभा- 2024 कार्यक्रम का शनिवार को दूसरा दिन रहा। आयोजित कार्यक्रम के दूसरे दिन अलग-अलग विषयों पर विचार विमर्श करने के लिए विशिष्ट अतिथियों को आमंत्रित किया गया। कार्यक्रम के दो सत्रों और 11 समानांतर सत्रों में भारत को विजन 2047 के लिए तैयार करने पर मंथन किया गया। सत्र में रक्षामंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार एवं डीआरडीओ के पूर्व अध्यक्ष सतीश रेड्डी ने प्राचीन ज्ञान के क्षेत्र में शोध करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की समृद्धि के लिए तकनीकी उन्ननयन की महती आवश्यकता है। एआईसीटीई के चेयरमैन टीजी सीताराम ने भारत को विकसित बनाने के मार्ग में उच्च शिक्षा में ज्यादा से ज्यादा पंजीकरण के लिए शोध की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
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भारतीय संस्कृति और संस्कार होना चाहिए : रविशंकर प्रसाद



सांसद रविशंकर प्रसाद ने भाषण के दौरान संविधान की मूल प्रति दिखाई। उन्होंने कहा कि यह भारत की सही शुरुआत है, जो संविधान में है उसमें भारतीय संस्कृति और संस्कार होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा कि पहले की सरकारों ने संविधान पर धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद थोपा। 25 साल बाद संविधान में 2 शब्द जोड़ दिए गए और इन्हें स्पष्ट नहीं किया गया जो बहुत बड़ा विरोधाभास है।
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आरक्षण अधिकार है, कोई सौगात नहीं: ऋतु खंडूरी



उत्तराखंड विधानसभा की पूर्व स्पीकर ऋतु खंडूरी ने कहा कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम ने स्कूलों में बच्चियों की संख्या बढ़ाने में महती भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि जब तक आप अंदर से शक्तिशाली महसूस नहीं करते, आप बाहर से सशक्त नहीं हो सकते। नारी शक्ति वंदन अधिनियम विधेयक को सराहते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए आरक्षण एक अधिकार है, कोई सौगात नहीं।
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