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मजिस्ट्रेटी जांच में खुलासा: कोविड में रजिस्टर्ड नहीं था कृति अस्पताल
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गुरुग्राम (कमल शर्मा)। मजिस्ट्रेटी जांच में खुलासा हुआ है कि 28 अप्रैल से दो मई के बीच में शहर के कृति और कथूरिया अस्पतालों में कोविड संक्रमित करीब एक दर्जन मरीजों की मौत ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई। इतना ही नहीं कृति अस्पताल कोविड मरीजों के उपचार के लिए अधिकृत भी नहीं था लेकिन उपचार किया जा रहा था जो कि गंभीर मामला है। इन सभी बिंदुओं पर उप जिला मजिस्ट्रेट गुरुग्राम एवं बादशाहपुर ने आगे की कार्रवाई स्वास्थ्य विभाग से कराने की सिफारिश जिला उपायुक्त से की है।
28-29 अप्रैल को सेक्टर-56 के केंद्रीय विहार स्थित कृति अस्पताल में कोविड संक्रमित मरीजों की मौत हो गई थी जिसको लेकर तीमारदारों ने इस अस्पताल में जमकर हंगामा किया था। इस वजह से डॉक्टर तथा मेडिकल स्टाफ अस्पताल छोड़कर भाग गया था। पुलिस के पहुंचने के बाद मामला शांत हुआ और डॉक्टर पहुंचे। मरीजों का आरोप था कि डॉक्टरों ने कहा कि उनके यहां ऑक्सीजन की कमी है, आप ऑक्सीजन की व्यवस्था कराएं।
करीब एक घंटे तक अस्पताल में हंगामा होने और पूरे घटनाक्रम का वीडियो वायरल होने के कारण जिला उपायुक्त डॉ. यश गर्ग ने इस मामले की बादशाहपुर के एसडीएम सतीश यादव को मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश किए थे। इस मामले में तीमारदार और डॉक्टरों के बयान तथा रिकार्ड के आधार पर रिपोर्ट पेश कर दी है। जिसमें चौंकाने वाली बात तो यह है कि जिस समय मरीजों की मौत हुई थी, उस समय स्टाक में पर्याप्त मात्रा में करीब 30 ऑक्सीजन सिलिंडर थे। इसके अलावा यह भी खुलासा किया है कि इस अस्पताल को कोविड संक्रमित मरीज का इलाज करने का अधिकार नहीं था। ऐसे में कोविड मरीज क्यों भर्ती किए गए। उन्होंने इस मामले की जांच स्वास्थ्य विभाग से कराने का उल्लेख किया है।
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खाड़सा रोड स्थित कथूरिया अस्पताल में कोविड मरीजों के मामले में भी एसडीएम जितेंद्र कुमार ने रिपोर्ट में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन सिलिंडर होने का उल्लेख किया है। यह रिपोर्ट अस्पताल में उपलब्ध खाली और भरे सिलिंडर के आधार पर तैयार की गई है। यह अस्पताल कोविड मरीजों के लिए अधिकृत है लेकिन जांच में मौत का कारण ऑक्सीजन की कमी के स्थान पर कोई और होने का उल्लेख किया है। यहां पर 30 सिलिंडर स्टाक में थे। इस मामले में भी एसडीएम ने स्वास्थ्य विभाग मौत के वास्तविक कारण की जांच कराने की बात कही है।
कृति अस्पताल को हादसे के बाद मिली कोविड की मान्यता
गुरुग्राम। सेक्टर-56 स्थित कृति अस्पताल को मरीजों की मौत वाले दिन तक कोविड संक्रमित मरीजों के उपचार के लिए प्रशासन तथा स्वास्थ्य विभाग ने अधिकृत नहीं किया था। बाद में इस अस्पताल ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से कोविड मरीजों का उपचार करने की अनुमति ले ली। इसकी पुष्टि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने की है।
यह गंभीर मामला है कि जिस अस्पताल को कोविड मरीजों के उपचार की अनुमति नहीं थी तो इस श्रेणी के मरीजों को कैसे भर्ती कर लिया और उनका उपचार किया जाता रहा। साथ में यह भी सवाल है कि ऑक्सीजन की कमी के कारण मरीजों की मौत हुई। उसके बाद प्रशासन, सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने इस अस्पताल का कोविड अस्पताल के रूप में पंजीकरण कर लिया। जबकि इस मामले में प्रशासन को अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। जिसको लेकर जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सवाल खड़े किए हैं। इसके पीछे बड़े लोगों का हाथ होने तक के आरोप लगाए जा रहे हैं। इस मामले में अस्पताल प्रबंधन से बात करने के लिए फोन किया लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
कृति और कथूरिया अस्पतालों में कोविड संक्रमितों की मौत के मामले में एसडीएम गुरुग्राम और बादशाहपुर से रिपोर्ट मिल गईं हैं। अभी इन रिपोर्ट का पूरी तरह से अध्ययन नहीं किया गया है। मजिस्ट्रेटी जांच रिपोर्ट में जो भी तथ्य दिए गए हैं, उनके आधार पर कार्रवाई की जाएगी। जहां पर स्वास्थ्य तथा अन्य विभाग को देखना है, वह मामला उचित कार्रवाई के लिए सिविल सर्जन (सीएमओ) तथा अन्य अधिकारियों को भेजा जाएगा।
- डॉ. यश गर्ग, जिला उपायुक्त
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28-29 अप्रैल को सेक्टर-56 के केंद्रीय विहार स्थित कृति अस्पताल में कोविड संक्रमित मरीजों की मौत हो गई थी जिसको लेकर तीमारदारों ने इस अस्पताल में जमकर हंगामा किया था। इस वजह से डॉक्टर तथा मेडिकल स्टाफ अस्पताल छोड़कर भाग गया था। पुलिस के पहुंचने के बाद मामला शांत हुआ और डॉक्टर पहुंचे। मरीजों का आरोप था कि डॉक्टरों ने कहा कि उनके यहां ऑक्सीजन की कमी है, आप ऑक्सीजन की व्यवस्था कराएं।
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करीब एक घंटे तक अस्पताल में हंगामा होने और पूरे घटनाक्रम का वीडियो वायरल होने के कारण जिला उपायुक्त डॉ. यश गर्ग ने इस मामले की बादशाहपुर के एसडीएम सतीश यादव को मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश किए थे। इस मामले में तीमारदार और डॉक्टरों के बयान तथा रिकार्ड के आधार पर रिपोर्ट पेश कर दी है। जिसमें चौंकाने वाली बात तो यह है कि जिस समय मरीजों की मौत हुई थी, उस समय स्टाक में पर्याप्त मात्रा में करीब 30 ऑक्सीजन सिलिंडर थे। इसके अलावा यह भी खुलासा किया है कि इस अस्पताल को कोविड संक्रमित मरीज का इलाज करने का अधिकार नहीं था। ऐसे में कोविड मरीज क्यों भर्ती किए गए। उन्होंने इस मामले की जांच स्वास्थ्य विभाग से कराने का उल्लेख किया है।
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खाड़सा रोड स्थित कथूरिया अस्पताल में कोविड मरीजों के मामले में भी एसडीएम जितेंद्र कुमार ने रिपोर्ट में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन सिलिंडर होने का उल्लेख किया है। यह रिपोर्ट अस्पताल में उपलब्ध खाली और भरे सिलिंडर के आधार पर तैयार की गई है। यह अस्पताल कोविड मरीजों के लिए अधिकृत है लेकिन जांच में मौत का कारण ऑक्सीजन की कमी के स्थान पर कोई और होने का उल्लेख किया है। यहां पर 30 सिलिंडर स्टाक में थे। इस मामले में भी एसडीएम ने स्वास्थ्य विभाग मौत के वास्तविक कारण की जांच कराने की बात कही है।
कृति अस्पताल को हादसे के बाद मिली कोविड की मान्यता
गुरुग्राम। सेक्टर-56 स्थित कृति अस्पताल को मरीजों की मौत वाले दिन तक कोविड संक्रमित मरीजों के उपचार के लिए प्रशासन तथा स्वास्थ्य विभाग ने अधिकृत नहीं किया था। बाद में इस अस्पताल ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से कोविड मरीजों का उपचार करने की अनुमति ले ली। इसकी पुष्टि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने की है।
यह गंभीर मामला है कि जिस अस्पताल को कोविड मरीजों के उपचार की अनुमति नहीं थी तो इस श्रेणी के मरीजों को कैसे भर्ती कर लिया और उनका उपचार किया जाता रहा। साथ में यह भी सवाल है कि ऑक्सीजन की कमी के कारण मरीजों की मौत हुई। उसके बाद प्रशासन, सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने इस अस्पताल का कोविड अस्पताल के रूप में पंजीकरण कर लिया। जबकि इस मामले में प्रशासन को अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। जिसको लेकर जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सवाल खड़े किए हैं। इसके पीछे बड़े लोगों का हाथ होने तक के आरोप लगाए जा रहे हैं। इस मामले में अस्पताल प्रबंधन से बात करने के लिए फोन किया लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
कृति और कथूरिया अस्पतालों में कोविड संक्रमितों की मौत के मामले में एसडीएम गुरुग्राम और बादशाहपुर से रिपोर्ट मिल गईं हैं। अभी इन रिपोर्ट का पूरी तरह से अध्ययन नहीं किया गया है। मजिस्ट्रेटी जांच रिपोर्ट में जो भी तथ्य दिए गए हैं, उनके आधार पर कार्रवाई की जाएगी। जहां पर स्वास्थ्य तथा अन्य विभाग को देखना है, वह मामला उचित कार्रवाई के लिए सिविल सर्जन (सीएमओ) तथा अन्य अधिकारियों को भेजा जाएगा।
- डॉ. यश गर्ग, जिला उपायुक्त