{"_id":"6776e76a1a23671aa7060a6f","slug":"gray-water-system-will-improve-water-supply-in-seven-villages-of-the-district-farmers-will-benefit-gurgaon-news-c-25-1-as11003-100228-2025-01-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gurugram News: जिले के सात गावों में ग्रे वाटर प्रणाली से सुधरेगी पानी की व्यवस्था, किसानों को होगा लाभ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gurugram News: जिले के सात गावों में ग्रे वाटर प्रणाली से सुधरेगी पानी की व्यवस्था, किसानों को होगा लाभ
विज्ञापन
योजना पर खर्च होंगे तीन करोड रूपये, पंचायत विभाग की ओर से अलग-अलग गावों के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है
गुरूदत्त भारद्वाज
पुन्हाना। नूंह जिले के सात गावों में ग्रे वाटर प्रणाली के तहत तकरीबन तीन करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी। इन गांवों में घरों से निकलने वाले अपशिष्ट जल को साफ कर सिंचाई में काम लिया जाएगा। इससे न केवल लगातार गिरते भूजलस्तर में सुधार होगा बल्कि सिंचाई के लिए पानी भी उलब्ध होगा। सरकार की ओर से इन सात गावों में इस प्रणाली को लगाने की अनुमति मिल चुकी है। पंचायत विभाग की ओर से अलग-अलग गावों के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही इन गावों में पानी की व्यवस्था सुधरेगी।
बता दें कि गिरते भूजल स्तर व सिंचाई के लिए पानी की कमी से जिले के काफी गांव परेशान हैं। गिरता भूजल स्तर किसानों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। नहरों में पानी की कमी के कारण किसान महंगे दामों पर खेतों की सिंचाई करते हैं। ऐसे में इन गावों के किसानों के लिए ग्रे वाटर मैनेजमेंट प्रणाली के तहत सिंचाई के लिए पानी की आपूर्ति काफी हद तक लाभदायक सिद्ध होगी। प्रणाली के तहत बरसात व वेस्ट वाटर को किसी जोहड में एकत्रित कर उसे रिसाइकिल कर सिंचाई के उपयोग में लाया जाएगा। इसके लिए जोहड़ खोदने से लेकर गावों की नालियों को जोहड़ तक लाने व पानी को लाने के साथ साथ रिसाइकिल किया जाएगा।
क्या है ग्रे वाटर मैनेजमेंट प्रणाली
घरों से निकलने वाले गंदे पानी, वर्षा जल को रिसाइकल करने की प्रणाली को ग्रे वाटर मेनेजमेंट प्रणाली कहते हैं। ग्रे वाटर रिसाइकल के बाद पानी का इस्तेमाल टॉयलेट फ्लशिंग, सिंचाई आदि में होता है। ग्रे वाटर मेनेजमेंट से रिसाइकल हुए पानी से मीठे पानी की मांग कम होती है और इससे पानी की बचत होती है। ग्रे वाटर में मौजूद पोषक तत्व पौधों को पोषण देते हैं। इसका इस्तेमाल शौचालयों को फ्लश करने के लिए भी किया जा सकता है। पारंपरिक जल आपूर्ति की मांग पर दबाव कम होता है। साथ ही घरेलू जल खपत की लागत कम होती है।
विज्ञापन
किन किन गांवों में बनेंगे ग्रे वाटर मैनेजमेंट सिस्टम:-
नूंह के मालब, हसनपुर, रेहना, खेडला, दिहाना सहित नगीना खंड के शादीपुर व सांठावाडी गांव में इस योजना के तहत कार्य होगें। काम पूरा होने के बाद इन गांवों में सिंचाई के लिए पानी की व्यवस्था कुछ हद तक सुधरेगी।
ग्रे वाटर मैनेजमेंट प्रणाली के तहत कुछ गांवों में काम होने हैं ताकि पानी की स्थिति को सुधारा जा सके। इसके लिए कुछ गावों के लिए सरकार की ओर से मंजूरी मिली है। टेंडरिंग प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही कार्य शुरू कराया जाएगा।
योगेश, कार्यकारी अभियंता पंचायत विभाग, नूंह
विज्ञापन
गुरूदत्त भारद्वाज
पुन्हाना। नूंह जिले के सात गावों में ग्रे वाटर प्रणाली के तहत तकरीबन तीन करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी। इन गांवों में घरों से निकलने वाले अपशिष्ट जल को साफ कर सिंचाई में काम लिया जाएगा। इससे न केवल लगातार गिरते भूजलस्तर में सुधार होगा बल्कि सिंचाई के लिए पानी भी उलब्ध होगा। सरकार की ओर से इन सात गावों में इस प्रणाली को लगाने की अनुमति मिल चुकी है। पंचायत विभाग की ओर से अलग-अलग गावों के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही इन गावों में पानी की व्यवस्था सुधरेगी।
बता दें कि गिरते भूजल स्तर व सिंचाई के लिए पानी की कमी से जिले के काफी गांव परेशान हैं। गिरता भूजल स्तर किसानों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। नहरों में पानी की कमी के कारण किसान महंगे दामों पर खेतों की सिंचाई करते हैं। ऐसे में इन गावों के किसानों के लिए ग्रे वाटर मैनेजमेंट प्रणाली के तहत सिंचाई के लिए पानी की आपूर्ति काफी हद तक लाभदायक सिद्ध होगी। प्रणाली के तहत बरसात व वेस्ट वाटर को किसी जोहड में एकत्रित कर उसे रिसाइकिल कर सिंचाई के उपयोग में लाया जाएगा। इसके लिए जोहड़ खोदने से लेकर गावों की नालियों को जोहड़ तक लाने व पानी को लाने के साथ साथ रिसाइकिल किया जाएगा।
विज्ञापन
क्या है ग्रे वाटर मैनेजमेंट प्रणाली
घरों से निकलने वाले गंदे पानी, वर्षा जल को रिसाइकल करने की प्रणाली को ग्रे वाटर मेनेजमेंट प्रणाली कहते हैं। ग्रे वाटर रिसाइकल के बाद पानी का इस्तेमाल टॉयलेट फ्लशिंग, सिंचाई आदि में होता है। ग्रे वाटर मेनेजमेंट से रिसाइकल हुए पानी से मीठे पानी की मांग कम होती है और इससे पानी की बचत होती है। ग्रे वाटर में मौजूद पोषक तत्व पौधों को पोषण देते हैं। इसका इस्तेमाल शौचालयों को फ्लश करने के लिए भी किया जा सकता है। पारंपरिक जल आपूर्ति की मांग पर दबाव कम होता है। साथ ही घरेलू जल खपत की लागत कम होती है।
विज्ञापन
किन किन गांवों में बनेंगे ग्रे वाटर मैनेजमेंट सिस्टम:-
नूंह के मालब, हसनपुर, रेहना, खेडला, दिहाना सहित नगीना खंड के शादीपुर व सांठावाडी गांव में इस योजना के तहत कार्य होगें। काम पूरा होने के बाद इन गांवों में सिंचाई के लिए पानी की व्यवस्था कुछ हद तक सुधरेगी।
ग्रे वाटर मैनेजमेंट प्रणाली के तहत कुछ गांवों में काम होने हैं ताकि पानी की स्थिति को सुधारा जा सके। इसके लिए कुछ गावों के लिए सरकार की ओर से मंजूरी मिली है। टेंडरिंग प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही कार्य शुरू कराया जाएगा।
योगेश, कार्यकारी अभियंता पंचायत विभाग, नूंह