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कैसे मिले आशियाना-2: प्रोजेक्ट तैयार होने में बाधा बन रहीं औपचारिकताएं

Wed, 20 Apr 2016 02:13 PM IST
यशलोक सिंह/अमर उजाला, गुड़गांव
यशलोक सिंह/अमर उजाला, गुड़गांव Updated Wed, 20 Apr 2016 02:13 PM IST
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formalities are becoming hurdles for housing projects
इमारतें - फोटो : अमर उजाला

साइबर सिटी रियल एस्टेट विवाद का बड़ हब बन गई है। यहां दर्जनों ऐसे रिहायशी और कॅमर्शियल प्रोजेक्ट हैं जो निर्धारित समय में पूरा नहीं हो सके हैं। बिल्डर अपने दावों के अनुसार, खरीददार को कब्जा नहीं दे पा रहे हैं। ऐसे में निवेशक आंदोलन करने और सरकार से गुहार लगाने को मजबूर हैं।

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क्या परियोजना में देरी के लिए सिर्फ बिल्डर ही जिम्मेदार हैं। इस बात की तह में जाने के बाद पता चलता है कि इसके लिए एक और फैक्टर काम करता है। वह है सरकारी औपचारिकताएं।
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बिल्डर को अपना प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले विभिन्न सरकारी विभागों से करीब 50 प्रकार की एनओसी लेनी होती है, जिसमें दो साल से अधिक तक का समय लग जाता है। बिल्डरों का कहना है कि सरकारी विभागों द्वारा एनओसी देने के काम में काफी देरी की जाती है।
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इस कारण प्रोजेक्ट फंस जाता है, जिसका खामियाजा बिल्डर और फ्लैट बुक करवाने वाले दोनों को झेलना पड़ता है। आज गुड़गांव सहित अन्य हिस्सों में बिल्डरों की अधिकतर परियोजनाएं लटकी हुईं हैं। बिल्डरों का कहना है कि गुड़गांव में जमीन को लेकर काफी विवाद है। इस कारण मामला कोर्ट में भी पहुंच जाता है, जिस कारण काम को बीच में ठप करना पड़ता है। आजकल नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सख्ती बढ़ने से भी बिल्डर परेशान हैं।

रहेजा डेवलपर्स की प्रवक्ता डिंपल भारद्वाज का कहना है कि प्रोजेक्ट लेट होने का सबसे बड़ा कारण है सिंगल विंडो की सुविधा का नहीं होना। इस कारण विभिन्न विभागों से अलग-अलग क्लियरेंस लेना होता है। क्लियरेंस एक या दो नहीं बल्कि 40 से 50 प्रकार की हैं। इसमें दो साल से अधिक का वक्त लग जाता है। जो बिल्डर और खरीददार दोनों पर भारी पड़ता है। यह एनओसी खनन, नक्शा पास कराने, एयरपोर्ट प्राधिकरण, पर्यावरण क्लियरेंस, लिफ्ट परमीशन, फ्लैट बेचने के लिए बैंकों की अनुमति, फायर, बिजली, पानी, सीवर कनेक्शन और कंप्लीशन सर्टिफिकेट तक लेना होता है।

क्या करें बिल्डर...

रियल एस्टेट सेक्टर का देश की अर्थव्यवस्था में दूसरा स्थान है। हमारी लंबे समय से मांग रही है कि सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम विकसित किया जाए। जिससे उचित समय पर प्रोजेक्ट की डिलेवरी की जा सके। प्रोजेक्ट में देरी की समस्या का निदान हो सके यह जिम्मेदारी इस सेक्टर से जुडे सारे स्टेक होल्डर्स की है। वो एक दूसरे की मदद करे और घर बनाने से लेकर घर का पजेशन देने तक की प्रक्रिया आसान और कारगर बनाएं। सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम बिल्डर को समय अनुसार अपने प्रोजेक्ट को खत्म करने में विशेष साबित होगा।-राजेश के. गौरी (वाइस प्रेसिडेंट, होमस्टेड)

रियल एस्टेट परियोजना में देरी का सबसे बड़ा कारण सरकारी औपचारिकताएं हैं। विभिन्न विभागों से एनओसी लेने में बिल्डर को काफी समय लग जाता है। अगर सिंगल विंडो सिस्टम सरकार लागू कर दे तो डेवलपर को अपनी परियोजना कम समय में पूरी करने में कोई दिक्कत नहीं होगी। रियल एस्टेट को इंडस्ट्री का दर्जा भी सरकार को दे देना चाहिए। इससे कई परेशानियों का हल हो जाएगा। सस्ते घरों की मांग भी इसे पूरी करने में मदद मिलेगी।-प्रदीप अग्रवाल (को-फाउंडर एंड चेयरमैन, सिग्नेचर ग्लोबल)

बिल्डर कतई नहीं चाहता कि उसकी परियोजना लेट हो। इसके कई कारण होते हैं। तमाम सरकारी औपचारिकताओं के कारण परियोजना की अवधि पर असर पड़ता है। अगर सरकार सिंगल विंडो सिस्टम लागू कर दे तो कंपनियों को एक विभाग से दूसरे विभाग में भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे बिल्डर और खरीददारों दोनों को लाभ होगा। पिछले एक दशक से रियल एस्टेट प्रोजेक्ट की डिलवेरी में देरी से बायर्स का आत्मविश्वास डममगाया है। उम्मीद है रियल एस्टेट बिल आने के बाद खरीददारों का बाजार में एक बार फिर से विश्वास लौटेगा।-विनीत रेलिया (मैनेजिंग डायरेक्टर, सारे होम्स)

बिल्डर और खरीददार दोनों में किसी प्रकार का कम्युनिकेशन गैप नहीं होना चाहिए। जब दोनों पक्ष एक दूसरे से अपनी-अपनी परेशानी और सुझाव को साझा करते हैं तो बेहतर तालमेल बनता है। आपसी विश्वास से कई दिक्कतों का खुद ही समाधान हो जाता है।-अमन अग्रवाल (निदेशक, केवी डेवलपर्स)



अपना मंच

छह साल पहले गुड़गांव के सेक्टर-69 में यूनिटेक के सनब्रिज हाउसिंग परियोजना में निवेश किया था। जिसका पजेशन अक्तूबर, 2012 में मिलना था। इस परियोजना के तहत बिल्डर को 700 फ्लैट बनाने थे। अभी एक भी तैयार नहीं है। ढाई साल से यहां पर काम बंद है। महीने का 28 हजार रुपया मकान के किराये और करीब 38 हजार ईएमआई के तौर पर बैंक को देना पड़ रहा है। ऐसे में काफी परेशानी हो रही है। बिल्डर की ओर से खरीददारों को कोई जवाब नहीं दिया जा रहा है।-हिमांशु दूबे

सेक्टर-103 (द्वारका एक्सप्रेस-वे) पर रियल एस्टेट कंपनी एएन बिल्डवेल के स्पायर वुड्स प्रोजेक्ट में निवेश करना काफी महंगा पड़ रहा है। 2015 में यह प्रोजेक्ट पूरा होना था जो अभी तक नहीं हो सका। बिल्डर के धोखे से काफी परेशानी हो रही है। बिल्डर निवेशकों से बातचीत करने को भी तैयार नहीं है। ऐसे में लोगों की गाढ़ी कमाई डूबती दिख रही है।-सरीन डोगरा

सेक्टर-103 में इस रिहायशी परियोजना का काम वर्ष 2011 में शुरू हुआ था, जिसे अक्तूबर 2015 में पूरा हो जाना चाहिए था। कंस्ट्रक्शन में देरी के बावजूद बिल्डर ने साइट पर काम को पूरी तरह से बंद कर रखा है। साइट पर सिर्फ टावरों का ढांचा खड़ा किया गया है। परियोजना के अंतर्गत 12 टावरों का निर्माण होना है। करीब डेढ वर्ष से यहां काम बिल्कुल ठप है।-विशाल (प्रेसीडेंट, स्पायर वुड्स रेजीडेंट एसोसिएशन)

एनएन बिल्डवेल की परियोजना में निवेश करके काफी दिक्कत हो रही है। मेहनत की कमाई को डूबते हुए देखने के अलावा और कोई विकल्प दिखाई नहीं दे रहा है। अपने घर की उम्मीद संजोए किराये के मकान में रहना पड़ रहा है। किराये के साथ-साथ ईएमआई का बोझ ढोना अब भारी पड़ रहा है।-प्रीति

गुड़ग़ांव स्थित यूनिटेक के रिहायशी प्रोजेक्ट में निवेश करके काफी दुविधा में फंस गया हूं। समझ में नहीं आ रहा है कि क्या किया जाए। अभी तक फ्लैट का पजेशन नहीं मिल सका है। एक नौकरीपेशा के लिए ईएमआई का बोझ उठाना काफी मुश्किल है। जबकि यह पता नहीं है कि अपना घर मिलेगा या नहीं।-जयंत कोहली

ईरा के कॉसमोस सिटी सेक्टर-103 प्रोजेक्ट में मेरे अलावा सैकड़ों अन्य लोगों ने निवेश कर खुद को संकट में डाल लिया है। बिल्डर अभी तक कंस्ट्रक्शन का काम पूरा नहीं कर पाया है। निवेशकों का पैसा फंस गया है। लोग 85 फीसदी तक रकम बिल्डर को दे चुके हैं। प्रोजेक्ट पूरा होने में देरी क्यों हो रही है इसका भी जवाब उनके द्वारा नहीं दिया जाता है। खरीददारों को बिल्डर से काफी लड़ाई लड़नी पड़ रही है।-विंग कमांडर देवेंद्र कुमार

ईरा बिल्डर के सेक्टर-103 रिहायशी परियोजना में अपने घर की चाहत में निवेश किया। मगर क्या पता था कि इससे उनकी पैसा ही नहीं सुख चैन भी छिन जाएगा। अभी तक प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो सका है। ऐसे में हमेशा मानसिक तनाव में रहना पड़ता है।-नरसिंह कुमार

यूनिटेक के विस्टाज रिहायशी परियोजना में निवेश करके काफी दिक्कत उठानी पड़ रही है। बिल्डर की ओर से परिायोजना को पूरा करने और पजेशन देने में आनाकानी की जा रही है।-राजीव शर्मा

सेक्टर-103 स्थित स्पायर वुड्स परियोजना में निवेश करके काफी दुख हो रहा है। बिल्डर ने तो परियोजना का काम भी पूरा नहीं किया है। पिछले काफी समय से काम बंद कर रखा है। बिल्डर के रुख से बड़ी काफी परेशानी हो रही है। अब तो सड़क पर भी अपने घर के लिए उतरना पड़ रहा है।-दीप्ति अग्रवाल



न तो अपना घर मिलता दिखाई दे रहा है और न ही बिल्डर की ओर से कोई जवाब। एएन बिल्डवेल ने परियोजना देते समय काफी लंबे चौड़े वायदे किए थे कि वह तय समय में घर बनाकर दे देगा। पर अब बात करने को भी तैयार नहीं है। ऐसे में पसीने की कमाई डूबती दिखाई दे रही है।-पंकज

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