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केएमपी के आसपास पांच नए शहर होंगे विकसित
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गुरुग्राम। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने रियल स्टेट सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए शनिवार को कई घोषणाएं कीं। इनमें विभागों के नियमों में बदलाव और नए प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।
शनिवार को होटल लीला एंबियंस में आयोजित अर्बन डेवलपमेंट कॉन्क्लेव के समापन समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि कुंडली-मानेसर-पलवल हाईवे के आसपास 50-50 हजार हेक्टेयर के पांच नए शहर विकसित होंगे। हरियाणा सरकार ग्लोबल सिटी जैसे प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। इसके साथ ही प्रदेश में विकास के प्लान अब सजरा के साथ अक्षांश व देशांतर पर आधारित होंगे।
अब बिल्डरों को सीधे लाइसेंस देने से पहले अनुमति पत्र दिया जाएगा। उसी के बाद प्रोजेक्ट शुरू हो सकेगा। 6 महीने में संबधित विभागों को वहां पर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी। उसी के बाद बिल्डर को लाइसेंस मिलेगा। अगर मूलभूत सुविधाओं का विकास नहीं होता है तो संबंधित विभाग पर जुर्माना लगेगा। आवंटी के हितों की सुरक्षा के लिए बिल्डर का अब तक भूसंपदा नियामक प्राधिकरण के खाते (एस्क्रो एकाउंट) में 70 फीसदी पैसा जमा होता था इसमें 10 फीसदी ईडीसी का है। अब ईडीसी का 10 फीसदी पैसा खाते से सीधे सरकार के पास चला जाएगा। प्लॉट वाली कॉलोनी के लिए भी बहुमंजिला इमारतों की आवश्यकता को देखते हुए 1975 के एक्ट में भी बदलाव होगा। दीनदयाल जन आवास योजना के तहत अब बिल्डर की 50 फीसदी जमीन की जगह 20 फीसदी जमीन ही फ्रीज होगी।
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बिजली के लोड मानक और इन्फ्रास्ट्रक्चर की जरूरतों को अंतिम रूप देेने के लिए क्रेडई व नरेडको के प्रतिनिधियों को साथ लेकर कमेटी बनेगी, जो कि तीन महीने में रिपोर्ट दे देगी। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्युनल (एनसीएलटी) विवादों को दूर करने के लिए भी कमेटी बनेगी।
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शनिवार को होटल लीला एंबियंस में आयोजित अर्बन डेवलपमेंट कॉन्क्लेव के समापन समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि कुंडली-मानेसर-पलवल हाईवे के आसपास 50-50 हजार हेक्टेयर के पांच नए शहर विकसित होंगे। हरियाणा सरकार ग्लोबल सिटी जैसे प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। इसके साथ ही प्रदेश में विकास के प्लान अब सजरा के साथ अक्षांश व देशांतर पर आधारित होंगे।
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अब बिल्डरों को सीधे लाइसेंस देने से पहले अनुमति पत्र दिया जाएगा। उसी के बाद प्रोजेक्ट शुरू हो सकेगा। 6 महीने में संबधित विभागों को वहां पर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी। उसी के बाद बिल्डर को लाइसेंस मिलेगा। अगर मूलभूत सुविधाओं का विकास नहीं होता है तो संबंधित विभाग पर जुर्माना लगेगा। आवंटी के हितों की सुरक्षा के लिए बिल्डर का अब तक भूसंपदा नियामक प्राधिकरण के खाते (एस्क्रो एकाउंट) में 70 फीसदी पैसा जमा होता था इसमें 10 फीसदी ईडीसी का है। अब ईडीसी का 10 फीसदी पैसा खाते से सीधे सरकार के पास चला जाएगा। प्लॉट वाली कॉलोनी के लिए भी बहुमंजिला इमारतों की आवश्यकता को देखते हुए 1975 के एक्ट में भी बदलाव होगा। दीनदयाल जन आवास योजना के तहत अब बिल्डर की 50 फीसदी जमीन की जगह 20 फीसदी जमीन ही फ्रीज होगी।
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बिजली के लोड मानक और इन्फ्रास्ट्रक्चर की जरूरतों को अंतिम रूप देेने के लिए क्रेडई व नरेडको के प्रतिनिधियों को साथ लेकर कमेटी बनेगी, जो कि तीन महीने में रिपोर्ट दे देगी। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्युनल (एनसीएलटी) विवादों को दूर करने के लिए भी कमेटी बनेगी।