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80 फीसदी तक बढ़ी आयुष काढ़े की मांग
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गुरुग्राम। इस साल में कोरोना संक्रमण से निजात की संभावना कम ही नजर आ रही है। ऐसे में लोग खुद को कोरोना संक्रमण से बचे रहने के लिए मजबूत कर रहे हैं, जिसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता को गंभीरता से लेते हुए आयुर्वेदिक उत्पादों का सेवन किया जा रहा है। आयुष विभाग द्वारा दिए जाने वाले आयुष काढ़े की मांग 80 फीसदी तक बढ़ गई है। इसके साथ ही गिलोय टेबलेट की मांग ज्यादा है। आयुर्वेद के प्रति लोगों का रुझान तेजी से बढ़ा है।
आयुष विभाग की आर्युवैदिक मेडिकल ऑफिसर अनुप्रिया ने बताया कि पहले लोगों को आयुष काढ़ा और गिलोय टेबलेट लेने के लिए जागरूक किया जा रहा था। वहीं अब लोगों द्वारा खुद इसकी मांग की जा रही है। केयर सेंटर और होम आइसोलेशन में घर पर ही काढ़ा और गिलोय टेबलेट भेजी जा रही हैं। स्वास्थ्य देखभाल केंद्र में भर्ती मरीजों को आयुष काढ़ा दिया जा रहा है।
वहीं बाजारों में काढ़े के अधिकतर उत्पाद मौजूद हैं। शहर के पंसारी की दुकानों पर तुलसी, दालचीनी, काली मिर्च, सौंठ की मांग बढ़ी है। अब लोगों के घरों में काफी औषधि मुहैया है। लोग रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाए रखने के लिए घरों में हर रोज इनका सेवन कर रहे हैं।
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5 फीसदी मरीज ले रहे आवश्यकता से अधिक काढ़ा
अनुप्रिया ने कहा कि इन दिनों पांच फीसदी ऐसे मरीज भी हैं जो काढ़ा या अन्य दवाओं का आवश्यकता से अधिक सेवन कर रहे हैं। इससे उन्हें गैस बनना या ओवर हीटिंग की समस्या का सामना करना पड़ता है। दरअसल लोगों को इस संक्रमण से बाहर निकलने की जल्दी है, जिसके चक्कर में लोग अधिक मात्रा में काढ़े का सेवन कर रहे हैं। हालांकि काढ़े को दिन में सिर्फ दो बार खाना खाने के बाद पीने की हिदायत दी जा रही है।
लोगों में आयुर्वेद के प्रति विश्वास बढ़ा है। रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए आयुष काढ़े की सबसे ज्यादा मांग की जा रही है। फोन के माध्यम से रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के उपाय पूछे जा रहे हैं। अब घर-घर में आयुर्वेद पद्धति को अपनाया जा रहा है।
- डॉ. मंजू बागंड़, जिला आयुर्वेद अधिकारी
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आयुष विभाग की आर्युवैदिक मेडिकल ऑफिसर अनुप्रिया ने बताया कि पहले लोगों को आयुष काढ़ा और गिलोय टेबलेट लेने के लिए जागरूक किया जा रहा था। वहीं अब लोगों द्वारा खुद इसकी मांग की जा रही है। केयर सेंटर और होम आइसोलेशन में घर पर ही काढ़ा और गिलोय टेबलेट भेजी जा रही हैं। स्वास्थ्य देखभाल केंद्र में भर्ती मरीजों को आयुष काढ़ा दिया जा रहा है।
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वहीं बाजारों में काढ़े के अधिकतर उत्पाद मौजूद हैं। शहर के पंसारी की दुकानों पर तुलसी, दालचीनी, काली मिर्च, सौंठ की मांग बढ़ी है। अब लोगों के घरों में काफी औषधि मुहैया है। लोग रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाए रखने के लिए घरों में हर रोज इनका सेवन कर रहे हैं।
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5 फीसदी मरीज ले रहे आवश्यकता से अधिक काढ़ा
अनुप्रिया ने कहा कि इन दिनों पांच फीसदी ऐसे मरीज भी हैं जो काढ़ा या अन्य दवाओं का आवश्यकता से अधिक सेवन कर रहे हैं। इससे उन्हें गैस बनना या ओवर हीटिंग की समस्या का सामना करना पड़ता है। दरअसल लोगों को इस संक्रमण से बाहर निकलने की जल्दी है, जिसके चक्कर में लोग अधिक मात्रा में काढ़े का सेवन कर रहे हैं। हालांकि काढ़े को दिन में सिर्फ दो बार खाना खाने के बाद पीने की हिदायत दी जा रही है।
लोगों में आयुर्वेद के प्रति विश्वास बढ़ा है। रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए आयुष काढ़े की सबसे ज्यादा मांग की जा रही है। फोन के माध्यम से रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के उपाय पूछे जा रहे हैं। अब घर-घर में आयुर्वेद पद्धति को अपनाया जा रहा है।
- डॉ. मंजू बागंड़, जिला आयुर्वेद अधिकारी