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Gurugram News: मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने किया अवैध अस्पताल का भंडाफोड़
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हेल्परी करके बने डॉक्टर कर रहे मरीजों के जीवन से खिलवाड़, केस दर्ज
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। मुख्यमंत्री उड़नदस्ते की टीम ने बजघेड़ा में रेड कर अवैध रूप से चल रहे अस्पताल का भंडाफोड़ किया है। अस्पताल में बिना डिग्री के डॉक्टरों द्वारा मरीजों का इलाज किया जा रहा था। अस्पताल के बोर्ड पर कई नामी डॉक्टरों के नाम तो लिखे गए हैं, लेकिन एक भी डॉक्टर न तो अस्पताल में मौजूद था और न ही किसी डॉक्टर का अस्पताल से साइन किया गया एमओयू मिला है।
टीम ने अस्पताल के संचालक रामबीर सहित विकास भारद्वाज व मंतू सिंह को काबू कर बजघेड़ा थाना पुलिस के हवाले करते हुए शिकायत देकर केस दर्ज कराया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। डीएसपी मुख्यमंत्री उड़नदस्ता इन्द्रजीत यादव ने बताया कि टीम को सूचना मिली थी कि बजघेड़ा में नजफगढ़ रोड पर आनंद अस्पताल चलाया जा रहा है। यहां संचालक की ओर से मरीजों का इलाज किया जा रहा है। संचालक के पास डॉक्टर की कोई डिग्री नहीं है। इस पर स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ सीएम फ्लाइंग की टीम मौके पर पहुंच गई। जहां से अस्पताल के संचालक रामबीर सहित विकास भारद्वाज व मंतू सिंह को काबू कर अस्पताल व डॉक्टर के दस्तावेज मांगे, लेकिन यह कोई दस्तावेज नहीं दिखा पाए।
अस्पताल के बोर्ड पर लिखे डॉक्टरों के नाम से डॉक्टरों को बुलाने के लिए कहा गया तो वह न तो उन डॉक्टरों को बुला पाए और न ही उनके साथ हुए समझौते के कोई दस्तावेज दिखाए गए। सीएम फ्लाइंग और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जब जांच को आगे बढ़ाया तो उनके होश उड़ गए। जांच के दौरान सामने आया कि ओपीडी में मरीजों की जांच डॉ एन के शर्मा, डॉ रामबीर, डॉ दीपक राय, डॉ कविता, डॉ मंटू, डॉ योगेश द्वारा जांच किया जाना दिखाया गया, जबकि कोई भी डॉक्टर अस्पताल में मौजूद नहीं था।
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अस्पताल में 12 मरीजों को भर्ती होना दिखाया गया है। इनमें इलाज करने वाले डॉक्टर का नाम डॉ रवि कुमार व डॉ हिमांशू पूनिया दिखाया गया, लेकिन जांच में पाया गया कि इन दोनों के नाम पर रामबीर ने फर्जी साइन किए थे। जांच में यह भी सामने आया कि ज्यादातर मरीज मेडिक्लेम में भर्ती दिखाकर उनके नाम पर बिल पास कराए जा रहे थे। अस्पताल में बनाई गई लैब, ऑपरेशन थियेटर आदि के लिए विभागीय अनुमति नहीं थी, जबकि यहां से दवाएं भी टीम ने बरामद की हैं।
टीम ने जांच में यह भी पाया कि अस्पताल को किराए की बिल्डिंग में चलाया जा रहा था। बिल्डिंग मालिक अजीत सिंह राणा स्वयं इस अस्पताल की पहली मंजिल पर परिवार सहित रहता है और उसके द्वारा चोरी की बिजली से अस्पताल चलवाया जा रहा है। इस पर कनेक्शन काटते हुए कार्रवाई की गई है। आरोपियों को बजघेड़ा थाना पुलिस के हवाले करते हुए शिकायत देकर केस दर्ज कराया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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हेल्परी करके बने डॉक्टर कर रहे मरीजों के जीवन से खिलवाड़, केस दर्ज
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। मुख्यमंत्री उड़नदस्ते की टीम ने बजघेड़ा में रेड कर अवैध रूप से चल रहे अस्पताल का भंडाफोड़ किया है। अस्पताल में बिना डिग्री के डॉक्टरों द्वारा मरीजों का इलाज किया जा रहा था। अस्पताल के बोर्ड पर कई नामी डॉक्टरों के नाम तो लिखे गए हैं, लेकिन एक भी डॉक्टर न तो अस्पताल में मौजूद था और न ही किसी डॉक्टर का अस्पताल से साइन किया गया एमओयू मिला है।
टीम ने अस्पताल के संचालक रामबीर सहित विकास भारद्वाज व मंतू सिंह को काबू कर बजघेड़ा थाना पुलिस के हवाले करते हुए शिकायत देकर केस दर्ज कराया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। डीएसपी मुख्यमंत्री उड़नदस्ता इन्द्रजीत यादव ने बताया कि टीम को सूचना मिली थी कि बजघेड़ा में नजफगढ़ रोड पर आनंद अस्पताल चलाया जा रहा है। यहां संचालक की ओर से मरीजों का इलाज किया जा रहा है। संचालक के पास डॉक्टर की कोई डिग्री नहीं है। इस पर स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ सीएम फ्लाइंग की टीम मौके पर पहुंच गई। जहां से अस्पताल के संचालक रामबीर सहित विकास भारद्वाज व मंतू सिंह को काबू कर अस्पताल व डॉक्टर के दस्तावेज मांगे, लेकिन यह कोई दस्तावेज नहीं दिखा पाए।
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अस्पताल के बोर्ड पर लिखे डॉक्टरों के नाम से डॉक्टरों को बुलाने के लिए कहा गया तो वह न तो उन डॉक्टरों को बुला पाए और न ही उनके साथ हुए समझौते के कोई दस्तावेज दिखाए गए। सीएम फ्लाइंग और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जब जांच को आगे बढ़ाया तो उनके होश उड़ गए। जांच के दौरान सामने आया कि ओपीडी में मरीजों की जांच डॉ एन के शर्मा, डॉ रामबीर, डॉ दीपक राय, डॉ कविता, डॉ मंटू, डॉ योगेश द्वारा जांच किया जाना दिखाया गया, जबकि कोई भी डॉक्टर अस्पताल में मौजूद नहीं था।
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अस्पताल में 12 मरीजों को भर्ती होना दिखाया गया है। इनमें इलाज करने वाले डॉक्टर का नाम डॉ रवि कुमार व डॉ हिमांशू पूनिया दिखाया गया, लेकिन जांच में पाया गया कि इन दोनों के नाम पर रामबीर ने फर्जी साइन किए थे। जांच में यह भी सामने आया कि ज्यादातर मरीज मेडिक्लेम में भर्ती दिखाकर उनके नाम पर बिल पास कराए जा रहे थे। अस्पताल में बनाई गई लैब, ऑपरेशन थियेटर आदि के लिए विभागीय अनुमति नहीं थी, जबकि यहां से दवाएं भी टीम ने बरामद की हैं।
टीम ने जांच में यह भी पाया कि अस्पताल को किराए की बिल्डिंग में चलाया जा रहा था। बिल्डिंग मालिक अजीत सिंह राणा स्वयं इस अस्पताल की पहली मंजिल पर परिवार सहित रहता है और उसके द्वारा चोरी की बिजली से अस्पताल चलवाया जा रहा है। इस पर कनेक्शन काटते हुए कार्रवाई की गई है। आरोपियों को बजघेड़ा थाना पुलिस के हवाले करते हुए शिकायत देकर केस दर्ज कराया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।