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Gurugram News: कूड़े के साए में पक्षियों का आशियाना, संकट में वेटलैंड
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द्वारका एक्सप्रेसवे के वेटलैंड पर गंदगी और सीवेज ने बढ़ाई लोगों की परेशानी
पूनम
गुरुग्राम। अंतरराष्ट्रीय स्तर के द्वारका एक्सप्रेसवे की सोसाइटियों के पास गंदगी और सीवेज वहां के निवासियों की मुश्किलें तो बढ़ा ही रहे हैं। साथ ही सोसाइटियों के विकसित होने के बाद से हुई अव्यवस्था उस इलाके के वेटलैंट को भी खत्म कर रही है। इसके खाली प्लॉटों में कूड़ा डंप किया जा रहा है। पहले जो हिस्सा प्राकृतिक रूप से जल संरक्षण का था, वहां सीवेज की गंदगी और कूड़ा कचरा डंप किए जाने से नारकीय स्थिति बन गई है। लोगों का कहना है कि जब यहां बसे थे तब सर्दियों में काफी संख्या में प्रवासी जलीय पक्षियों का सौंदर्य देखने को मिलता था। सीवेज की गंदगी और कूड़े की वजह से इन पक्षियों का प्राकृतिक आशियाना नष्ट हो गया है। यहां साइबेरिया और दूर-दूर से खूबसूरत जलीय पक्षी आकर ठहरते रहे हैं।
द्वारका एक्सप्रेसवे पर सीवेज लाइन नहीं बिछाए जाने और शोधित सीवेज की निकासी की लाइन होने के कारण सोसाइटियों से टैंकर के माध्यम से सीवेज की गंदगी फेंकी जाती है। निवासियों का कहना है कि टैंकर मजबूरी है। टैंकर वाले गंदगी कहीं भी फेंक देते हैं। रही-सही कसर कूड़ा डंपिंग ने पूरी कर दी है। पूरे एक्सप्रेसवे के किनारे जगह-जगह कूड़े के ढेर नजर आते हैं। जहां कभी बरसाती पानी एकत्र होता था, वहां सीवेज और कूड़े की गंदगी दिखती।
गंदगी खत्म कर रही है प्राकृतिक तालाब
सेक्टर-108 में रहने वाले अतुल बताते हैं कि मैं इस इलाके में पिछले पांच साल से रह रहा हूं। शोभा इंटरनेशनल सिटी से दिल्ली के राघोपुर और नानकहेड़ी जाने वाले रास्ते पर बहुत ही खूबसूरत वॉटर बॉडी यहां थी। काफी संख्या में प्रवासी पक्षी यहां देखे जाते थे। शोभा सिटी समेत आस-पास की सोसाइटियों और गांवों के लोगों के लिए यह पर्यटन स्थल जैसा था मगर धीरे-धीरे इस वाटर बॉडी के साथ काफी कूड़ा डाल दिया गया है। मरे हुए जानवर, बूचड़खाने का कचरा इसमें डाला जा रहा है। सीवेज की गंदगी फेंकी जा रही है।
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झील नहीं, अब तो कूड़ाघर है
नए सेक्टर के विकास ने बसई वेटलैंड तो पहले ही खत्म कर दिया है। ऊंची इमारतें बन गई हैं। व्यवसायिक गतिविधियां शुरू हो गईं। प्रवासी पक्षियों पर तो इसका असर पड़ा ही है। बाकी की कसर खाली जगहों पर कचरा और सीवेज डंप करने वालों ने पूरी कर दी। जो खाली जगहें हैं, वहां भी अब प्रवासी पक्षी नहीं आएंगे। - अनिल गंडास, वन्य जीव संरक्षक
द्वारका एक्सप्रेसवे की तीन लेन हैं। एक 75 मीटर जीएमडीए की सड़क, अपर द्वारका एक्सप्रेसवे मास्टर रोड और 99ए से 109 तक जोड़ने वाली सड़क। इस सबमें ज्यादा सोसाइटियां और गांव हैं। इन सड़कों पर धूल, गंदगी, सड़क के किनारे झाड़ियां, स्ट्रीट लाइट का अभाव है। - सुनील सरीन, सेक्टर 102 इंपीरियल गार्डन
द्वारका एक्सप्रेसवे के खाली प्लॉटों पर गंदगी और सीवेज के तालाब ने नारकीय स्थिति बना दी है। खाली प्लॉटों पर प्रशासन को पार्क, पेड़ पौधे लगाने चाहिए थे। इसे सुंदर लैंड स्केप के रूप में विकसित करना चाहिए। हालात ये हैं कि खाली जगहें नरक जैसी होती जा रही हैं। - प्रवीण कौशल, शोभा सिटी, सेक्टर 108
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पूनम
गुरुग्राम। अंतरराष्ट्रीय स्तर के द्वारका एक्सप्रेसवे की सोसाइटियों के पास गंदगी और सीवेज वहां के निवासियों की मुश्किलें तो बढ़ा ही रहे हैं। साथ ही सोसाइटियों के विकसित होने के बाद से हुई अव्यवस्था उस इलाके के वेटलैंट को भी खत्म कर रही है। इसके खाली प्लॉटों में कूड़ा डंप किया जा रहा है। पहले जो हिस्सा प्राकृतिक रूप से जल संरक्षण का था, वहां सीवेज की गंदगी और कूड़ा कचरा डंप किए जाने से नारकीय स्थिति बन गई है। लोगों का कहना है कि जब यहां बसे थे तब सर्दियों में काफी संख्या में प्रवासी जलीय पक्षियों का सौंदर्य देखने को मिलता था। सीवेज की गंदगी और कूड़े की वजह से इन पक्षियों का प्राकृतिक आशियाना नष्ट हो गया है। यहां साइबेरिया और दूर-दूर से खूबसूरत जलीय पक्षी आकर ठहरते रहे हैं।
द्वारका एक्सप्रेसवे पर सीवेज लाइन नहीं बिछाए जाने और शोधित सीवेज की निकासी की लाइन होने के कारण सोसाइटियों से टैंकर के माध्यम से सीवेज की गंदगी फेंकी जाती है। निवासियों का कहना है कि टैंकर मजबूरी है। टैंकर वाले गंदगी कहीं भी फेंक देते हैं। रही-सही कसर कूड़ा डंपिंग ने पूरी कर दी है। पूरे एक्सप्रेसवे के किनारे जगह-जगह कूड़े के ढेर नजर आते हैं। जहां कभी बरसाती पानी एकत्र होता था, वहां सीवेज और कूड़े की गंदगी दिखती।
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गंदगी खत्म कर रही है प्राकृतिक तालाब
सेक्टर-108 में रहने वाले अतुल बताते हैं कि मैं इस इलाके में पिछले पांच साल से रह रहा हूं। शोभा इंटरनेशनल सिटी से दिल्ली के राघोपुर और नानकहेड़ी जाने वाले रास्ते पर बहुत ही खूबसूरत वॉटर बॉडी यहां थी। काफी संख्या में प्रवासी पक्षी यहां देखे जाते थे। शोभा सिटी समेत आस-पास की सोसाइटियों और गांवों के लोगों के लिए यह पर्यटन स्थल जैसा था मगर धीरे-धीरे इस वाटर बॉडी के साथ काफी कूड़ा डाल दिया गया है। मरे हुए जानवर, बूचड़खाने का कचरा इसमें डाला जा रहा है। सीवेज की गंदगी फेंकी जा रही है।
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झील नहीं, अब तो कूड़ाघर है
नए सेक्टर के विकास ने बसई वेटलैंड तो पहले ही खत्म कर दिया है। ऊंची इमारतें बन गई हैं। व्यवसायिक गतिविधियां शुरू हो गईं। प्रवासी पक्षियों पर तो इसका असर पड़ा ही है। बाकी की कसर खाली जगहों पर कचरा और सीवेज डंप करने वालों ने पूरी कर दी। जो खाली जगहें हैं, वहां भी अब प्रवासी पक्षी नहीं आएंगे। - अनिल गंडास, वन्य जीव संरक्षक
द्वारका एक्सप्रेसवे की तीन लेन हैं। एक 75 मीटर जीएमडीए की सड़क, अपर द्वारका एक्सप्रेसवे मास्टर रोड और 99ए से 109 तक जोड़ने वाली सड़क। इस सबमें ज्यादा सोसाइटियां और गांव हैं। इन सड़कों पर धूल, गंदगी, सड़क के किनारे झाड़ियां, स्ट्रीट लाइट का अभाव है। - सुनील सरीन, सेक्टर 102 इंपीरियल गार्डन
द्वारका एक्सप्रेसवे के खाली प्लॉटों पर गंदगी और सीवेज के तालाब ने नारकीय स्थिति बना दी है। खाली प्लॉटों पर प्रशासन को पार्क, पेड़ पौधे लगाने चाहिए थे। इसे सुंदर लैंड स्केप के रूप में विकसित करना चाहिए। हालात ये हैं कि खाली जगहें नरक जैसी होती जा रही हैं। - प्रवीण कौशल, शोभा सिटी, सेक्टर 108