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विजिलेंस ने तलब किया गैर मुमकिन पहाड़ के रिकॉर्ड
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सोहना। गैर-मुमकिन पहाड़ी क्षेत्र (अरावली) की जमीन को राजस्व रिकॉर्ड में गलत दर्शाने वालों पर जल्द ही शिकंजा कस जाएगा। भूमाफियाओं ने अधिकारियों के साथ सांठ-गांठ कर उक्त जमीन की खरीद फरोख्त कर सरकार को राजस्व का नुकसान पहुंचाया है। मामले की जांच के लिए सरकार ने राज्य चौकसी ब्यूरो को जिम्मेदारी दी है। ब्यूरो ने उक्त भूमि का समस्त रिकॉर्ड सोहना तहसीलदार को पांच दिनों के अंदर भेजने के लिखित फरमान जारी किए हैं। आदेशों में वर्ष 1992 से लेकर वर्तमान समय तक के पटवारी, गिरदावर, नायब तहसीलदार व तहसीलदार आदि के नाम व फोन नंबरों का भी ब्यौरा मांगा गया है। चौकसी ब्यूरो द्वारा मांगे गए रिकॉर्ड के बाद अब भू माफियाओं सहित अधिकारियों के होश उड़ गए हैं।
गौरतलब है कि सोहना, रायसीना, ग्वाल पहाड़ी में भूमाफियाओं व बिल्डरों ने अरावली के हरे-भरे जंगलों की कटाई कर फॉर्म हाउस, फ्लैट आदि का निर्माण किया था। भूमाफिया व बिल्डरों ने अधिकारियों व नेताओं से सांठगांठ कर इस कार्य को अंजाम दिया था। भूमाफियाओं ने राजस्व रिकॉर्ड में गैर-मुमकिन पहाड़ को अधिकारियों से सांठ-गांठ कर भूड़ क्षेत्र दिखाया था। जमीन को गैर मुमकिन पहाड़ से भूड़ क्षेत्र दिखाने में पटवारी व गिरदावर की भूमिका संदिग्ध है। हैरत की बात है कि ऐसे लोगों ने उक्त भूमि को तहसीलदार से मिलीभगत करके करोड़ों रुपए की राशि कमाकर सरकार को भारी राजस्व का नुकसान पहुंचाया था। उक्त मामले की शिकायत सरकार को मिलने पर जांच राज्य चौकसी ब्यूरो के पास पहुंच गई है। शिकायत पर जांच के लिए विजिलेंस ने कई बार तहसीलदार सोहना को लिखित पत्र प्रेषित कर समस्त भूमि क ब्यौरा पेश करने को कहा था, किन्तु आजतक भी उक्त रिकॉर्ड विजिलेंस को उपलब्ध नहीं कराया गया। इसको देखते हुए अब विजिलेंस ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। विजिलेंस ने अब पत्र लिखकर पांच दिनों के अन्दर समस्त रिकॉर्ड व सन 1992 से लेकर वर्तमान तक के अधिकारियों की नाम, पता व मोबाइल नंबर देने के फरमान जारी किए हैं।
अधिकारियों पर गिरेगी गाज
करीब चार वर्षों से मामले की जांच कछुआ गति से चल रही थी। विजिलेंस ने कई बार राजस्व अधिकारियों को रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा, किन्तु उन्होंने अभी तक भी रिकॉर्ड नहीं दिया। इसको देखते हुए अब विजिलेंस ने अब उक्त रिकॉर्ड के साथ-साथ 1992 से अब तक यहां कार्यरत रहे तहसीलदार, नायब तहसीलदार, रजिस्ट्री क्लर्क, गिरदावर व पटवारी आदि के नाम, पते व फोन नंबर की जानकारी भी मांग ली है। ऐसे में माना जा रहा है कि जल्द ही अधिकारियों पर गाज गिर सकती है।
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गौरतलब है कि सोहना, रायसीना, ग्वाल पहाड़ी में भूमाफियाओं व बिल्डरों ने अरावली के हरे-भरे जंगलों की कटाई कर फॉर्म हाउस, फ्लैट आदि का निर्माण किया था। भूमाफिया व बिल्डरों ने अधिकारियों व नेताओं से सांठगांठ कर इस कार्य को अंजाम दिया था। भूमाफियाओं ने राजस्व रिकॉर्ड में गैर-मुमकिन पहाड़ को अधिकारियों से सांठ-गांठ कर भूड़ क्षेत्र दिखाया था। जमीन को गैर मुमकिन पहाड़ से भूड़ क्षेत्र दिखाने में पटवारी व गिरदावर की भूमिका संदिग्ध है। हैरत की बात है कि ऐसे लोगों ने उक्त भूमि को तहसीलदार से मिलीभगत करके करोड़ों रुपए की राशि कमाकर सरकार को भारी राजस्व का नुकसान पहुंचाया था। उक्त मामले की शिकायत सरकार को मिलने पर जांच राज्य चौकसी ब्यूरो के पास पहुंच गई है। शिकायत पर जांच के लिए विजिलेंस ने कई बार तहसीलदार सोहना को लिखित पत्र प्रेषित कर समस्त भूमि क ब्यौरा पेश करने को कहा था, किन्तु आजतक भी उक्त रिकॉर्ड विजिलेंस को उपलब्ध नहीं कराया गया। इसको देखते हुए अब विजिलेंस ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। विजिलेंस ने अब पत्र लिखकर पांच दिनों के अन्दर समस्त रिकॉर्ड व सन 1992 से लेकर वर्तमान तक के अधिकारियों की नाम, पता व मोबाइल नंबर देने के फरमान जारी किए हैं।
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अधिकारियों पर गिरेगी गाज
करीब चार वर्षों से मामले की जांच कछुआ गति से चल रही थी। विजिलेंस ने कई बार राजस्व अधिकारियों को रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा, किन्तु उन्होंने अभी तक भी रिकॉर्ड नहीं दिया। इसको देखते हुए अब विजिलेंस ने अब उक्त रिकॉर्ड के साथ-साथ 1992 से अब तक यहां कार्यरत रहे तहसीलदार, नायब तहसीलदार, रजिस्ट्री क्लर्क, गिरदावर व पटवारी आदि के नाम, पते व फोन नंबर की जानकारी भी मांग ली है। ऐसे में माना जा रहा है कि जल्द ही अधिकारियों पर गाज गिर सकती है।
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