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मन की बात: अफगानिस्तान लौटने को तैयार नहीं वहां के लोग, बोले- शुक्र है पहले ही आ गए थे भारत
Wed, 18 Aug 2021 10:52 AM IST
शाहरुख खान
मयंक तिवारी, अमर उजाला, गुरुग्राम
मयंक तिवारी, अमर उजाला, गुरुग्राम
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 18 Aug 2021 10:52 AM IST
सार
अफगान परिवार 5 दिन पहले मेडिकल वीजा पर भारत आया था। देश के हालात सामान्य होने तक 11 लोगों का अफगानिस्तान लौटने का इरादा नहीं है।
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मुबारक शाह, अफगानिस्तान का नागरिक
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
अफगानिस्तान में तालिबान का कब्जा होने के बाद वहां के नागरिकों में दहशत है। अफगानिस्तान से मेडिकल वीजा पर आया 11 सदस्यीय परिवार पांच दिन मेदांता के पास रहने के बाद अब लाजपत नगर चला गया है। वहां से वह ग्रेटर नोएडा जाएगा। भारत पहुंचने के बाद अपने देश के हालात जानकर ये सभी बेहद सुकून महसूस कर रहे हैं। वे ऊपरवाले का शुक्रिया अदा कर रहे हैं। अफगानिस्तान में हालात सामान्य होने तक उनका लौटने का कोई इरादा नहीं है।
पांच दिन पहले परिवार के साथ मेडिकल वीजा पर आए मुबारक शाह बताते हैं कि उनकी कपड़े की दुकान है। उनका परिवार मां के उपचार के बारे में पहले से सोच रहा था। कोरोना काल में उड़ानें बंद हो गईं। टूरिस्ट वीजा बंद था। देश के बदलते हालात देख परिजनों ने मेडिकल वीजा के लिए आवेदन किया। इसके बाद वे उपचार के लिए भारत आ गए। पांच दिन रहकर मां का उपचार भी कराया। उनके मुताबिक, यह शहर काफी महंगा है। उनके पास तीन माह तक ठहरने की अनुमति है।
परिवार के लोग होटल में गए थे। वहां बात नहीं बनी तो उन लोगों को एक बिचौलिया सन्नी मिल गया। उसने उनके रहने का इंतजाम ग्रेटर नोएडा में किया है। वहां ये एक मकान किराये पर लेकर रहेंगे। हालात नहीं सुधरे तो ऑनलाइन आवेदन करके वीजा आगे बढ़वाएंगे।
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शामूरा शाह कहते हैं कि जब तक हालात ठीक नहीं हो जाते, तब तक वे भारत में ही रहेंगे। वे रिश्तेदारों के संपर्क में हैं। वहां हालात दिन पर दिन खराब हो रहे हैं। कुछ दिन और रुक जाते तो आने में भी परेशानी हो जाती।
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पांच दिन पहले परिवार के साथ मेडिकल वीजा पर आए मुबारक शाह बताते हैं कि उनकी कपड़े की दुकान है। उनका परिवार मां के उपचार के बारे में पहले से सोच रहा था। कोरोना काल में उड़ानें बंद हो गईं। टूरिस्ट वीजा बंद था। देश के बदलते हालात देख परिजनों ने मेडिकल वीजा के लिए आवेदन किया। इसके बाद वे उपचार के लिए भारत आ गए। पांच दिन रहकर मां का उपचार भी कराया। उनके मुताबिक, यह शहर काफी महंगा है। उनके पास तीन माह तक ठहरने की अनुमति है।
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परिवार के लोग होटल में गए थे। वहां बात नहीं बनी तो उन लोगों को एक बिचौलिया सन्नी मिल गया। उसने उनके रहने का इंतजाम ग्रेटर नोएडा में किया है। वहां ये एक मकान किराये पर लेकर रहेंगे। हालात नहीं सुधरे तो ऑनलाइन आवेदन करके वीजा आगे बढ़वाएंगे।
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शामूरा शाह कहते हैं कि जब तक हालात ठीक नहीं हो जाते, तब तक वे भारत में ही रहेंगे। वे रिश्तेदारों के संपर्क में हैं। वहां हालात दिन पर दिन खराब हो रहे हैं। कुछ दिन और रुक जाते तो आने में भी परेशानी हो जाती।
लाजपत नगर में है मिनी अफगानिस्तान
अफगानिस्तान से आने वाले लोग एक बार लाजपतनगर जरूर जाते हैं। कारण कि वहां लोगों की काफी संख्या है। वे अपने देश के लोगों की मदद भी करते हैं। उनका परिवार भी मंगलवार को लाजपत नगर जा रहा है। वहां से वह ग्रेटर नोएडा जाएगा।
काबुल होटल और रेस्तरां में नहीं दिख रहे अफगान
किसी समय अफगानिस्तान से आने वाले वाले लोग सेक्टर-38 के काबूल रेस्तरां और होटल पर जरूर नजर आते थे। वहां के हालात खराब होने के बाद वे नजर नहीं आ रहे हैं। बहुत से लोग तो उड़ान बंद होने के कारण वहीं फंस गए हैं। होटल संचालक हेमंत बताते हैं कि इन दिनों इनकी संख्या कम है। 13 दिन पहले एक परिवार आया था, जो उपचार कराने के बाद सोमवार को लाजपत नगर चला गया। यह परिवार वहां की एक राजनीतिक हस्ती का है।
स्वदेशी लोगों की मदद कर रहे अफगान
अफगानिस्तान से आने वालों की मदद अफगान ही कर रहे हैं। बहुत से ऐसे लोग हैं, जो पहले टूरिस्ट वीजा पर आए थे और यहीं काम करने लगे। कुछ साल रहने के बाद वे दिल्ली के वसंत विहार स्थित यूएनएचसीआर में वापस जाने पर खतरा बताकर शरणार्थी का दर्जा ले लेते हैं। लोग अब इनकी मदद करते हैं और गाइड के रूप में इनसे पैसा लेते हैं।
काबुल होटल और रेस्तरां में नहीं दिख रहे अफगान
किसी समय अफगानिस्तान से आने वाले वाले लोग सेक्टर-38 के काबूल रेस्तरां और होटल पर जरूर नजर आते थे। वहां के हालात खराब होने के बाद वे नजर नहीं आ रहे हैं। बहुत से लोग तो उड़ान बंद होने के कारण वहीं फंस गए हैं। होटल संचालक हेमंत बताते हैं कि इन दिनों इनकी संख्या कम है। 13 दिन पहले एक परिवार आया था, जो उपचार कराने के बाद सोमवार को लाजपत नगर चला गया। यह परिवार वहां की एक राजनीतिक हस्ती का है।
स्वदेशी लोगों की मदद कर रहे अफगान
अफगानिस्तान से आने वालों की मदद अफगान ही कर रहे हैं। बहुत से ऐसे लोग हैं, जो पहले टूरिस्ट वीजा पर आए थे और यहीं काम करने लगे। कुछ साल रहने के बाद वे दिल्ली के वसंत विहार स्थित यूएनएचसीआर में वापस जाने पर खतरा बताकर शरणार्थी का दर्जा ले लेते हैं। लोग अब इनकी मदद करते हैं और गाइड के रूप में इनसे पैसा लेते हैं।