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Gurugram News: औद्योगिक क्षेत्र में घूम रहे तेंदुए को रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ा
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रास्ता भटककर औद्योगिक क्षेत्र में आ गया था तेंदुआ
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। आईएमटी मानेसर के सेक्टर-8 स्थित औद्योगिक क्षेत्र में शुक्रवार सुबह तेंदुआ देखकर लोगों में हड़कंप मच गया। औद्योगिक इकाई के कर्मियों और आसपास के लोगों के शोर शराबे से तेंदुआ ग्रीनबेल्ट के पेड़ पौधों के बीच छिप गया।
वन्य जीव विभाग की टीम ने दोपहर करीब ढाई बजे तेंदुए को पकड़ा और जांच के बाद अरावली के जंगल में छोड़ दिया गया। यह करीब तीन साल का नर तेंदुआ था जो भटककर औद्योगिक इलाके में आ गया था। वन संरक्षक डॉ. सुभाष चंद्र यादव ने बताया कि करीब ढाई तीन साल का नर तेंदुआ राह भटकर औद्योगिक इलाके में आ गया था। रेस्क्यू टीम में शामिल विशेषज्ञ अनिल गंडास ने बताया कि लोगों की सूचना के बाद वन्य जीव विभाग की टीम ने आईएमटी मानेसर के प्लॉट नंबर 414 में तेंदुआ देखा। मानेसर के 14 पुलिस कर्मियों की टीम ने जाल बिछाया मगर लोगों को देखकर तेंदुआ छिपा रहा। इसके बाद रोहतक से वन्य जीवों के विशेषज्ञ आए और उन्होंने ट्रैक्यूलाइजर से तेंदुए को बेहोश कर पिंजरे में डाला।
पिछले सालों में बढ़ी हैं तेंदु़ओं की संख्या
अरावली की पहाड़ियों में वर्ष 2007-08 में बमुश्किल आठ तेंदुए थे। वर्ष 2017 में 35 तेंदुए पाए गए थे। इसके बाद वन विभाग के सर्वे की रिपोर्ट जारी नहीं कि गई है मगर वन क्षेत्र में काम करने वालों के अनुसार करीब 60 तेंदुए फरीदाबाद, सोहना और मानेसर में अरावली के क्षेत्र में है। भोजन की तलाश में तेंदुए अरावली के साथ लगे गांवों और गौशालों में कई बार देखे जाते रहे हैं क्योंकि अरावली क्षेंत्र में उनके भोजन की कमी होती जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार टेरेटरी की लड़ाई में भी तेंदुए भटक जाते हैं। वन्यजीव अधिकारी आरके जांगड़ा ने बताया कि अरावली के पास के इलाके में तेंदुओं का आना आम बात है। शहरीकरण के कारण उनका इलाका घटा है।
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पिछले दिनों तेंदुए के शहर में आने की घटनाएं
- 31 अगस्त को ढाई साल की मादा तेंदुआ गुरुग्राम फरीदाबाद रोड पर सड़क दुर्घटना में मारी गई
- 12 जनवरी को सोहना के अनमोल आशियाना सोसाइटी के बेसमेंट में तेंदुआ घुस गया था जिसे रेस्क्यू करके जंगल में छोड़ दिया गया।
- 19 दिसंबर 2024 को रेवाड़ी के कानुका गांव तेंदुआ देखा गया। जिसे भीड़ के बीच से वन्य जीव विभाग ने रेस्क्यू किया था।
- जुलाई 2024 में सोहना के पास टिकली और घामडौज में तेंदुए ने गौशाला में 10 गोवंश का शिकार किया था।
- जून 2024 में नरसिंहपुर की एक सोसाइटी में तेंदुआ देखा गया था, फरीदाबाद के बड़खल से तेंदुएं का रेस्क्यू किया गया था। गर्मी के मौसम में यह माना गया कि गर्मी में पानी की कमी के कारण तेंदुए शहर में आते हैं।
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विशेषज्ञ ने कहा
सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ रही है। तेंदुए बाघों के दुश्मन होते हैं। अरावली का यह रेंज एक ही है। इधर तेंदुओं की संख्या भी बढ़ रही है। क्षेत्रों में वर्चस्व की लड़ाई में तेंदुए इधर- उधर भटक रहे हैं। व
-अनिल गंडास,वाइल्ड लाइफ रेस्क्यूअर
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। आईएमटी मानेसर के सेक्टर-8 स्थित औद्योगिक क्षेत्र में शुक्रवार सुबह तेंदुआ देखकर लोगों में हड़कंप मच गया। औद्योगिक इकाई के कर्मियों और आसपास के लोगों के शोर शराबे से तेंदुआ ग्रीनबेल्ट के पेड़ पौधों के बीच छिप गया।
वन्य जीव विभाग की टीम ने दोपहर करीब ढाई बजे तेंदुए को पकड़ा और जांच के बाद अरावली के जंगल में छोड़ दिया गया। यह करीब तीन साल का नर तेंदुआ था जो भटककर औद्योगिक इलाके में आ गया था। वन संरक्षक डॉ. सुभाष चंद्र यादव ने बताया कि करीब ढाई तीन साल का नर तेंदुआ राह भटकर औद्योगिक इलाके में आ गया था। रेस्क्यू टीम में शामिल विशेषज्ञ अनिल गंडास ने बताया कि लोगों की सूचना के बाद वन्य जीव विभाग की टीम ने आईएमटी मानेसर के प्लॉट नंबर 414 में तेंदुआ देखा। मानेसर के 14 पुलिस कर्मियों की टीम ने जाल बिछाया मगर लोगों को देखकर तेंदुआ छिपा रहा। इसके बाद रोहतक से वन्य जीवों के विशेषज्ञ आए और उन्होंने ट्रैक्यूलाइजर से तेंदुए को बेहोश कर पिंजरे में डाला।
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पिछले सालों में बढ़ी हैं तेंदु़ओं की संख्या
अरावली की पहाड़ियों में वर्ष 2007-08 में बमुश्किल आठ तेंदुए थे। वर्ष 2017 में 35 तेंदुए पाए गए थे। इसके बाद वन विभाग के सर्वे की रिपोर्ट जारी नहीं कि गई है मगर वन क्षेत्र में काम करने वालों के अनुसार करीब 60 तेंदुए फरीदाबाद, सोहना और मानेसर में अरावली के क्षेत्र में है। भोजन की तलाश में तेंदुए अरावली के साथ लगे गांवों और गौशालों में कई बार देखे जाते रहे हैं क्योंकि अरावली क्षेंत्र में उनके भोजन की कमी होती जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार टेरेटरी की लड़ाई में भी तेंदुए भटक जाते हैं। वन्यजीव अधिकारी आरके जांगड़ा ने बताया कि अरावली के पास के इलाके में तेंदुओं का आना आम बात है। शहरीकरण के कारण उनका इलाका घटा है।
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पिछले दिनों तेंदुए के शहर में आने की घटनाएं
- 31 अगस्त को ढाई साल की मादा तेंदुआ गुरुग्राम फरीदाबाद रोड पर सड़क दुर्घटना में मारी गई
- 12 जनवरी को सोहना के अनमोल आशियाना सोसाइटी के बेसमेंट में तेंदुआ घुस गया था जिसे रेस्क्यू करके जंगल में छोड़ दिया गया।
- 19 दिसंबर 2024 को रेवाड़ी के कानुका गांव तेंदुआ देखा गया। जिसे भीड़ के बीच से वन्य जीव विभाग ने रेस्क्यू किया था।
- जुलाई 2024 में सोहना के पास टिकली और घामडौज में तेंदुए ने गौशाला में 10 गोवंश का शिकार किया था।
- जून 2024 में नरसिंहपुर की एक सोसाइटी में तेंदुआ देखा गया था, फरीदाबाद के बड़खल से तेंदुएं का रेस्क्यू किया गया था। गर्मी के मौसम में यह माना गया कि गर्मी में पानी की कमी के कारण तेंदुए शहर में आते हैं।
विशेषज्ञ ने कहा
सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ रही है। तेंदुए बाघों के दुश्मन होते हैं। अरावली का यह रेंज एक ही है। इधर तेंदुओं की संख्या भी बढ़ रही है। क्षेत्रों में वर्चस्व की लड़ाई में तेंदुए इधर- उधर भटक रहे हैं। व
-अनिल गंडास,वाइल्ड लाइफ रेस्क्यूअर