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Gurugram News: अस्पताल में अब तक नहीं बना बर्न वार्ड
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। सेक्टर-10 स्थित नागरिक अस्पताल में अब तक स्थायी बर्न वार्ड तैयार नहीं हो पाया है, जिसके कारण पटाखों से झुलसने वाले मरीजों का इलाज फिलहाल एक अस्थायी वार्ड के सहारे ही किया जाएगा। त्योहारों के दौरान जलने की घटनाएं बढ़ने की आशंका रहती है, ऐसे में स्थायी व्यवस्था न होने से मरीजों में संक्रमण फैलने का खतरा और अस्पताल प्रबंधन के सामने उचित उपचार देने की चुनौती बढ़ सकती है।
इस आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए लोगों को खुद भी सतर्क रहना होगा। पटाखे जलाते समय हमेशा खुले मैदान का चयन करें, सूती कपड़े पहनें और पास में पानी व रेत की बाल्टी जरूर रखें। यदि कोई दुर्घटना होती है, तो जले हुए हिस्से पर तुरंत 10 से 15 मिनट तक ठंडा पानी डालें और भूलकर भी टूथपेस्ट या तेल न लगाएं। स्थिति गंभीर होने पर बिना समय गंवाए 102/108 एम्बुलेंस हेल्पलाइन पर संपर्क करें या नजदीकी बड़े आपातकालीन केंद्र पहुंचें।
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हर साल अस्पताल में 4-8 बैड का बर्न वार्ड तैयार किया जाता है और इसके लिए स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की भी नियुक्ति की जाती है। यदि कोई मरीज गंभीर हालत में आता है तो उसे सफदरजंग रेफर कर दिया जाता है। - डॉ. मनीष राठी, डीएमएस, जिला नागरिक अस्पताल, गुरुग्राम
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गुरुग्राम। सेक्टर-10 स्थित नागरिक अस्पताल में अब तक स्थायी बर्न वार्ड तैयार नहीं हो पाया है, जिसके कारण पटाखों से झुलसने वाले मरीजों का इलाज फिलहाल एक अस्थायी वार्ड के सहारे ही किया जाएगा। त्योहारों के दौरान जलने की घटनाएं बढ़ने की आशंका रहती है, ऐसे में स्थायी व्यवस्था न होने से मरीजों में संक्रमण फैलने का खतरा और अस्पताल प्रबंधन के सामने उचित उपचार देने की चुनौती बढ़ सकती है।
इस आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए लोगों को खुद भी सतर्क रहना होगा। पटाखे जलाते समय हमेशा खुले मैदान का चयन करें, सूती कपड़े पहनें और पास में पानी व रेत की बाल्टी जरूर रखें। यदि कोई दुर्घटना होती है, तो जले हुए हिस्से पर तुरंत 10 से 15 मिनट तक ठंडा पानी डालें और भूलकर भी टूथपेस्ट या तेल न लगाएं। स्थिति गंभीर होने पर बिना समय गंवाए 102/108 एम्बुलेंस हेल्पलाइन पर संपर्क करें या नजदीकी बड़े आपातकालीन केंद्र पहुंचें।
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हर साल अस्पताल में 4-8 बैड का बर्न वार्ड तैयार किया जाता है और इसके लिए स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की भी नियुक्ति की जाती है। यदि कोई मरीज गंभीर हालत में आता है तो उसे सफदरजंग रेफर कर दिया जाता है। - डॉ. मनीष राठी, डीएमएस, जिला नागरिक अस्पताल, गुरुग्राम
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