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संक्रमण दर में 8 फीसदी का इजाफा तो दोगुने से ज्यादा बढ़े सक्रिय मरीज
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गुरुग्राम। अप्रैल में कोरोना का ग्राफ जिस तेजी से बढ़ रहा है, उसको देखते हुए जांच की रफ्तार बढ़ाने की दरकार है। कोरोना संक्रमण के आंकड़ों पर गौर करें तो अप्रैल के शुरुआती 13 दिनों में संक्रमण दर 8 गुना तक बढ़ गई है जबकि सक्रिय मरीजों की संख्या भी दोगुनी से ज्यादा हो गई है। 31 मार्च तक जिले में महज 177 सक्रिय मरीज थे और संक्रमण दर भी 1.25 पर सीमित थी। अब 13 दिन बाद आंकड़े बिल्कुल अलग हैं।
13 अप्रैल को संक्रमण दर बढ़कर 9.10 पर पहुंच गई तो सक्रिय मरीजों की संख्या भी बढ़कर 451 पर पहुंच गई है। हैरत की बात यह है कि जब संक्रमण दर 2 फीसदी से भी कम थी उस वक्त तक रोजाना 3000 से ज्यादा नमूनों की जांच की जा रही थी। अब जब संक्रमण दर 9 फीसदी पर पहुंच गई है तो रोजाना लिए जाने वाले नमूनों की संख्या आधी रह गई है। 31 मार्च के आंकड़ों को ही देेखें तो उस दिन 3189 नमूले लिए गए थे। वहीं, पिछले बुधवार को महज 1604 नमूनों की ही जांच की गई, जिसमें से 146 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई।
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तब हो रही थी रोजाना 11000 नमूनों की जांच
जनवरी की शुुरुआत से फरवरी के मध्य तक कोरोना की तीसरी लहर के दौरान रोजाना लिए जाने वाले नमूनों की संख्या 11000 तक पहुंच गई थी। इस समय 2000 से भी कम नमूने लिए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मरीजों की जल्द पहचान के लिए कोरोना की जांच बढ़ाने पर जोर देना होगा। राहत की बात यह है कि अब भी कोरोना मरीजों के अस्पतालों में भर्ती होने की नौबत नहीं आ रही है और अब भी सिर्फ 1 मरीज ही अस्पताल में भर्ती है।
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13 अप्रैल को संक्रमण दर बढ़कर 9.10 पर पहुंच गई तो सक्रिय मरीजों की संख्या भी बढ़कर 451 पर पहुंच गई है। हैरत की बात यह है कि जब संक्रमण दर 2 फीसदी से भी कम थी उस वक्त तक रोजाना 3000 से ज्यादा नमूनों की जांच की जा रही थी। अब जब संक्रमण दर 9 फीसदी पर पहुंच गई है तो रोजाना लिए जाने वाले नमूनों की संख्या आधी रह गई है। 31 मार्च के आंकड़ों को ही देेखें तो उस दिन 3189 नमूले लिए गए थे। वहीं, पिछले बुधवार को महज 1604 नमूनों की ही जांच की गई, जिसमें से 146 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई।
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तब हो रही थी रोजाना 11000 नमूनों की जांच
जनवरी की शुुरुआत से फरवरी के मध्य तक कोरोना की तीसरी लहर के दौरान रोजाना लिए जाने वाले नमूनों की संख्या 11000 तक पहुंच गई थी। इस समय 2000 से भी कम नमूने लिए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मरीजों की जल्द पहचान के लिए कोरोना की जांच बढ़ाने पर जोर देना होगा। राहत की बात यह है कि अब भी कोरोना मरीजों के अस्पतालों में भर्ती होने की नौबत नहीं आ रही है और अब भी सिर्फ 1 मरीज ही अस्पताल में भर्ती है।
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