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Gurugram News: पजेशन नहीं देने के साथ ही रखे थे 26.54 लाख , अब ब्याज समेत करने होंगे वापस
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उपभोक्ता आयोग से
- 2017 में देना था फ्लैट का पजेशन ,बिल्डर ने आर्बिट्रेशन करके अपने पास रख ली थी राशि
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। फ्लैट का पजेशन समय पर नहीं देने और अपनी तरफ से आर्बिट्रेशन करके खरीदार के 26.54 लाख रुपये रखने पर अब सत्या बिल्डर को यह राशि ब्याज समेत वापस करनी होगी। यह आदेश जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष संजीव जिंदल ने दिया है।
सेक्टर-14 निवासी अरुण सचदेवा और उनके बेटे विभोर सचदेवा ने आयोग में दायर की याचिका में बताया कि उन्होंने सत्या डेवलपर्स कंपनी की तरफ से बनाई जा रही द हरमिटेज परियोजना में एक फ्लैट दो जून 2014 को बुक किया था। कंपनी के साथ 1.02 करोड़ रुपये में करार हुआ था। उन्होंने 39.30 लाख रुपये कंपनी को दे दिए थे। कंपनी ने आश्वासन दिया गया था कि एक दिसंबर 2017 तक फ्लैट का पजेशन दे दिया जाएगा। कंपनी ने 2017 में विभाग में आवेदन करके परियोजना का लाइसेंस 2019 तक करा लिया था।
जब उन्हें पजेशन नहीं मिला तो उन्होंने कंपनी से उनकी राशि को वापस करने के लिए कहा लेकिन कंपनी ने रुपये वापस नहीं किए। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कंपनी ने एक तरफा आर्बिट्रेशन कराया और करार में तय हुई राशि का 20 प्रतिशत से ज्यादा राशि को जब्त कर लिया। उनका कहना था कि यह हरेरा के नियमों के खिलाफ है। 10 प्रतिशत से ज्यादा राशि को जब्त नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि आर्बिट्रेशन प्रक्रिया में उनकी तरफ से भी अधिवक्ता कंपनी ने पेश कराया था। कंपनी ने 2023 में एक बॉन्ड के नाम पर 39.30 लाख रुपये में से सिर्फ कुछ रुपये ही वापस किए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग ने माना कि सत्या डेवलपर्स ने बिना किसी अफसोस के अनुचित व्यापार प्रथाओं का इस्तेमाल किया है। कंपनी को आदेश दिया है कि वह 26.54 लाख रुपये नौ प्रतिशत की दर से शिकायतकर्ता को वापस करें। इस दौरान उन्हें हुई मानसिक परेशानी पर दो लाख रुपये का मुआवजा और कानूनी प्रक्रिया पर खर्च होने पर 55 हजार रुपये दिए जाएं।
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- 2017 में देना था फ्लैट का पजेशन ,बिल्डर ने आर्बिट्रेशन करके अपने पास रख ली थी राशि
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। फ्लैट का पजेशन समय पर नहीं देने और अपनी तरफ से आर्बिट्रेशन करके खरीदार के 26.54 लाख रुपये रखने पर अब सत्या बिल्डर को यह राशि ब्याज समेत वापस करनी होगी। यह आदेश जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष संजीव जिंदल ने दिया है।
सेक्टर-14 निवासी अरुण सचदेवा और उनके बेटे विभोर सचदेवा ने आयोग में दायर की याचिका में बताया कि उन्होंने सत्या डेवलपर्स कंपनी की तरफ से बनाई जा रही द हरमिटेज परियोजना में एक फ्लैट दो जून 2014 को बुक किया था। कंपनी के साथ 1.02 करोड़ रुपये में करार हुआ था। उन्होंने 39.30 लाख रुपये कंपनी को दे दिए थे। कंपनी ने आश्वासन दिया गया था कि एक दिसंबर 2017 तक फ्लैट का पजेशन दे दिया जाएगा। कंपनी ने 2017 में विभाग में आवेदन करके परियोजना का लाइसेंस 2019 तक करा लिया था।
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जब उन्हें पजेशन नहीं मिला तो उन्होंने कंपनी से उनकी राशि को वापस करने के लिए कहा लेकिन कंपनी ने रुपये वापस नहीं किए। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कंपनी ने एक तरफा आर्बिट्रेशन कराया और करार में तय हुई राशि का 20 प्रतिशत से ज्यादा राशि को जब्त कर लिया। उनका कहना था कि यह हरेरा के नियमों के खिलाफ है। 10 प्रतिशत से ज्यादा राशि को जब्त नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि आर्बिट्रेशन प्रक्रिया में उनकी तरफ से भी अधिवक्ता कंपनी ने पेश कराया था। कंपनी ने 2023 में एक बॉन्ड के नाम पर 39.30 लाख रुपये में से सिर्फ कुछ रुपये ही वापस किए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग ने माना कि सत्या डेवलपर्स ने बिना किसी अफसोस के अनुचित व्यापार प्रथाओं का इस्तेमाल किया है। कंपनी को आदेश दिया है कि वह 26.54 लाख रुपये नौ प्रतिशत की दर से शिकायतकर्ता को वापस करें। इस दौरान उन्हें हुई मानसिक परेशानी पर दो लाख रुपये का मुआवजा और कानूनी प्रक्रिया पर खर्च होने पर 55 हजार रुपये दिए जाएं।
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