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Gurugram News: 100 नए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनेंगे
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वर्षा जल संचयन और भूजल रिचार्ज को मिलेगा बढ़ावा, एनएच-48 के दोनों ओर 50-50 नए सिस्टम स्थापित किए जाएंगे
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) ने शहर में 100 अतिरिक्त रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित करने का निर्णय लिया है। जीएमडीए के अधिकारियों की वीरवार को कार्यालय में एक बैठक हुई। जिसमें यह फैसला पायलट प्रोजेक्ट के उत्साहजनक परिणामों के बाद लिया गया है। जिसका उद्देश्य वर्षा जल का बेहतर उपयोग और भूजल स्तर को रिचार्ज करना है। इन सिस्टमों में से 50 एनएच-48 के पूर्वी हिस्से और 50 पश्चिमी हिस्से में बनाए जाएंगे।
जीएमडीए ने कनाडा स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ वाटरलू के डॉ. पंकज कुमार गुप्ता के सहयोग से पांच रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं का पायलट प्रोजेक्ट नई तकनीक पर चलाया था। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी इस तकनीक को आगे बढ़ाने का सुझाव दिया था। इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य बारिश के पानी को सीधे बहने से रोककर वैज्ञानिक तरीके से जमीन में पहुंचाना है। इससे सतही जल बहाव और जलभराव कम होगा, साथ ही भूजल रिचार्ज को बढ़ावा मिलेगा। जीएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पीसी मीणा ने सेक्टर-31 में बने पायलट सिस्टम का निरीक्षण कर उसकी कार्यप्रणाली और प्रगति की समीक्षा की। मीणा ने पायलट प्रोजेक्ट के परिणामों को उत्साहजनक बताया। उन्होंने शहर में 100 अतिरिक्त रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित करने के निर्देश दिए।
पायलट प्रोजेक्ट की सफलता का प्रमाण सेक्टर-31 में देखने को मिला। 7 अगस्त 2026 को हुई बारिश के दौरान, यहां के सिस्टम से लगभग 7.20 लाख लीटर वर्षा जल जमीन में रिचार्ज किया गया। फ्लोमीटर रीडिंग से यह आंकड़ा दर्ज किया गया। जीएमडीए इन आंकड़ों के आधार पर भविष्य के सिस्टम की क्षमता और डिजाइन तय करेगा।
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ऑनलाइन निगरानी और स्थानीय भागीदारी
सभी नए हार्वेस्टिंग सिस्टम में फ्लोमीटर लगाए जाएंगे, जिन्हें जीएमडीए के इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) से जोड़ा जाएगा। इससे प्रत्येक सिस्टम से गुजरने वाले पानी की मात्रा की ऑनलाइन निगरानी हो सकेगी। पीसी मीणा ने बताया कि तकनीक आधारित निगरानी पूरे नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। स्थानीय पार्षदों और ग्रीवेंस कमेटी के सदस्यों को भी इन सिस्टमों की निगरानी में शामिल किया जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर रखरखाव और समस्याओं का समय पर समाधान सुनिश्चित होगा।
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अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) ने शहर में 100 अतिरिक्त रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित करने का निर्णय लिया है। जीएमडीए के अधिकारियों की वीरवार को कार्यालय में एक बैठक हुई। जिसमें यह फैसला पायलट प्रोजेक्ट के उत्साहजनक परिणामों के बाद लिया गया है। जिसका उद्देश्य वर्षा जल का बेहतर उपयोग और भूजल स्तर को रिचार्ज करना है। इन सिस्टमों में से 50 एनएच-48 के पूर्वी हिस्से और 50 पश्चिमी हिस्से में बनाए जाएंगे।
जीएमडीए ने कनाडा स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ वाटरलू के डॉ. पंकज कुमार गुप्ता के सहयोग से पांच रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं का पायलट प्रोजेक्ट नई तकनीक पर चलाया था। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी इस तकनीक को आगे बढ़ाने का सुझाव दिया था। इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य बारिश के पानी को सीधे बहने से रोककर वैज्ञानिक तरीके से जमीन में पहुंचाना है। इससे सतही जल बहाव और जलभराव कम होगा, साथ ही भूजल रिचार्ज को बढ़ावा मिलेगा। जीएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पीसी मीणा ने सेक्टर-31 में बने पायलट सिस्टम का निरीक्षण कर उसकी कार्यप्रणाली और प्रगति की समीक्षा की। मीणा ने पायलट प्रोजेक्ट के परिणामों को उत्साहजनक बताया। उन्होंने शहर में 100 अतिरिक्त रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित करने के निर्देश दिए।
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पायलट प्रोजेक्ट की सफलता का प्रमाण सेक्टर-31 में देखने को मिला। 7 अगस्त 2026 को हुई बारिश के दौरान, यहां के सिस्टम से लगभग 7.20 लाख लीटर वर्षा जल जमीन में रिचार्ज किया गया। फ्लोमीटर रीडिंग से यह आंकड़ा दर्ज किया गया। जीएमडीए इन आंकड़ों के आधार पर भविष्य के सिस्टम की क्षमता और डिजाइन तय करेगा।
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ऑनलाइन निगरानी और स्थानीय भागीदारी
सभी नए हार्वेस्टिंग सिस्टम में फ्लोमीटर लगाए जाएंगे, जिन्हें जीएमडीए के इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) से जोड़ा जाएगा। इससे प्रत्येक सिस्टम से गुजरने वाले पानी की मात्रा की ऑनलाइन निगरानी हो सकेगी। पीसी मीणा ने बताया कि तकनीक आधारित निगरानी पूरे नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। स्थानीय पार्षदों और ग्रीवेंस कमेटी के सदस्यों को भी इन सिस्टमों की निगरानी में शामिल किया जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर रखरखाव और समस्याओं का समय पर समाधान सुनिश्चित होगा।