साइबर सिटी में हैं 1253 ‘रिवाल्वर रानी’
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पिछले दो दशक में गुरु द्रोण की नगरी गुड़गांव ने आर्थिक तरक्की की जो इबारत लिखी है उसमें महिलाओं का बड़ा योगदान है। आर्थिक मजबूती के साथ वह शक्तिशाली व प्रभावशाली बनकर उभरी हैं।
अपने ऊपर खतरों और पावर वूमेन की इमेज बनाने के लिए उन्होंने हथियार भी खरीदे हैं। जी हां, इस समय गुरुग्राम में 1253 महिलाएं हथियारों से लैस हैं।
उन्होंने साबित किया है कि वह पुरुषों के मुकाबले किसी भी क्षेत्र में कम नहीं हैं। साइबर सिटी में महिलाएं कामकाज में ही नहीं बल्कि शस्त्र रखने के शौक में भी आगे हैं। कमिश्नरी के तीनों जोन में इस समय करीब साढ़े पांच हजार लोगों के पास लाइसेंसी हथियारों का रिकार्ड है, जिनमें से 1253 महिलाएं हैं। इनमें से ज्यादातर ‘रिवाल्वर रानी’हैं।
सैफ अली से लेकर रंधावा तक के लाइसेंस यहीं से हैं बने
सैफ अली खान से लेकर अर्जुन रंधावा तक के शस्त्र लाइसेंस गुड़गांव में बने हैं। कम आयु में ही जिला प्रशासन की ओर से सोहा अली खान को लाइसेंस जारी हो गया था। जिसके चर्चा में आने के बाद उसे निरस्त किया गया था।
शहर में रहने वाले मॉडलों, नेताओं, उद्योगपतियों, सेना के रिटायर्ड अधिकारियों, उनकी पत्नियों, खिलाड़ियों और मल्टीनेशनल कंपनियों के अधिकारियों के पास शस्त्र लाइसेंस हैं। हालांकि शस्त्रधारी महिलाएं अपनी पहचान सार्वजनिक करने से बच रही हैं। वहीं प्रशासन भी नाम उजागर करने में कतरा रहा है।
साइबर सिटी में कमिश्नरी बनने के बाद से शस्त्र लाइसेंस बनाने व देखभाल का जिम्मा पुलिस के पास है। पुलिस के मुताबिक ज्यादातर लाइसेंस बाहर के बने हुए हैं। यह लाइसेंस धारी देश के अलग-अलग प्रदेशों से ताल्लुक रखते हैं।
जो लोग यहां पर आकर बस गए हैं उन्होंने अपना लाइसेंस यहां पर दर्ज करा रखा है। पुलिस अब पूरे रिकार्ड का कंप्यूटरीकरण कर रही है। साइबर सिटी में शस्त्र लाइसेंस देने की प्रक्रिया सख्त है। यहां पर जारी किए जाने वाले लाइसेंस से पहले आवेदक की आयकर रिटर्न देखी जाती है। लाइसेंस लेने के कारणों की सही जांच के होने के बाद ही उसे लाइसेंस जारी किया जाता है।
सिक्योरिटी के कारण सजग हो रही महिलाएं
क्राइम बढ़ रहा है इसलिए सिक्योरिटी को लेकर महिलाएं सजग हो रही हैं। शहर के धनाढ्य वर्ग की महिलाएं हथियारों के साथ चल रही हैं। स्टेटस सिंबल और पावर वूमेन की इमेज बनाने के लिए भी कुछ लोग लाइसेंस ले रहे हैं।-डॉ. ज्योति, मनोवैज्ञानिक
कमिश्नरी में लाइसेंस शाखा का कंप्यूटरीकरण किया जा रहा है। बाहर से आकर रहने वालों के पास लाइसेंस ज्यादा हैं। सुरक्षा मानकों के हिसाब से ही लाइसेंस जारी किया जाता है।-सौरभ सिंह, संयुक्त पुलिस आयुक्त, गुड़गांव
इसे भी जानें...
: हर माह दो सौ से अधिक लोग कर रहे हैं लाइसेंस के लिए आवेदन।
: 150 लाइसेंस नागालैंड के बने हुए हैं।
: अब हो रहा है पूरे रिकार्ड का कंप्यूटरीकरण।