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कमिश्नर का आरोप, 'भूमाफियाओं ने कराया मेरा तबादला'

Wed, 31 Dec 2014 12:26 PM IST
Updated Wed, 31 Dec 2014 12:26 PM IST
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Gurgaon commissioner Pradeep Kasni blames land mafia for his transfer

गुड़गांव के कमिश्नर प्रदीप साहनी का महज 39 दिनों बाद एक बार फिर से तबादला कर दिया है। तबादले के एक दिन बाद कमिश्नर प्रदीप साहनी ने अपने तबादले के लिए भूमाफियाओं को जिम्मेदार ठहराते हुए कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।

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अंग्रेजी अखबर दि इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक आईएएस ऑफिसर प्रदीप साहनी का कहना है कि गुड़गांव समेत एनसीआर के कुछ अन्य हिस्सों में भूमाफियाओं का एक ऐसा गुट सक्रिय है, जो मुझे यहां नहीं देखना चाहता।
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हालांकि हरियाणा सरकार इसे 'नियमित ट्रांसफर बता रही है, लेकिन सूत्रों के अनुसार साहनी का तबादला भूमाफियाओं के दबाव में किया गया है। हाल ही में मानेसर-बावल मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब बनाने के लिए गुड़गांव में करीब 3600 एकड़ से अधिक जमीन अधिग्रहित की गई थी। जिसमें घोटालों की आशंका थी और प्रदीप साहनी इसकी जांच-पड़ताल भी शुरू कर दी थी।

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सरकार को साहनी के कारण रोकनी पड़ी थी योजना

Gurgaon commissioner Pradeep Kasni blames land mafia for his transfer

मानेसर-बावल मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब की योजना में एक ऑटो क्षेत्र, वाणिज्य क्षेत्र और एक कंटेनर यार्ड बनाए जाने थे। लेकिन इसी बीच किसानों ने एक आंदोलन शुरू कर दिया। किसानों का आरोप था कि उन्हें उनकी जमीन के लिए उचित अधिग्रहण राशि नहीं दी जा रही।

करीब 39 दिन पहले बरेली से गुड़गांव आए कमिश्नर साहनी किसानों के आरोपों पर संज्ञान लेते हुए मामले की गहराई से जांच शुरू कर दी। जिसके बाद हरियाणा सरकार को बावन योजना रोकनी पड़ी।

सूत्रों के मुताबिक साहनी के इस कदम से हरियाणा सरकार के कई मंत्री भी नाराज हो गए। कासनी के मुताबिक उन्होंने हब बनाने की योजना कोई खलल नहीं डाला है। उनके अ‌नुसार उन्होंने सरकार से महज किसानों को उचित अधिग्रहण राशि देने को कहा था। लेकिन मेरी इस मांग पर मेरा तबादला कर दिया गया।

भूमाफिआयों पर गहरी पड़ताल कर रहे थे कासनी

Gurgaon commissioner Pradeep Kasni blames land mafia for his transfer

आईएएस अधिकारी प्रदीप साहनी ने बीते 22 दिसंबर को गुड़गांव में हरसरू तहसील के सात जमीन लेनदेन के पास कर दिए मामलों को फिर से रद्द कर दिया था।

उनके मुताबिक इन सात मामलों की आरंभिक जांच में ये सभी या तो फर्जी, या‌ फिर इनमें घोटाओं के आसार सामने आए थे। इसलिए इन्हें रद्दकर इनपर पुलिसिया जांच बैठाई जा रही थी।

खास बात ये है कि जांच के लिए सौंपी गई रिपोर्ट में कुछ प्रशासनिक अधिकारियों के नाम भी थे। इसके अलावा सूत्रों का कहना है कि प्रदीप कासनी ने आते ही राजस्व विभाग में पिछली सरकार में हुई गड़बड़ियों को उजागर करने की कवायद शुरू कर दी थी।

इसके चलते उन्होंने पिछले सप्ताह रोजका मेव गुर्जर में जमीन के हुए फर्जी इंतकाल मामले में दो डीआरओ के खिलाफ कार्रवाई की थी।

प्रदीप कासनी का ये है 45वां तबादला

Gurgaon commissioner Pradeep Kasni blames land mafia for his transfer

प्रदीप कासनी को हटाकर रोहतक मंडल के कमिश्नर राजीव रंजन गुड़गांव का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है। 1997 बैच के आईएएस अधिकारी प्रदीप कासनी को भाजपा सरकार ने 21 नवंबर को गुड़गांव का मंडलायुक्त बनाया था।

यह उनका 45वां तबादला है। खट्टर सरकार में पहला। हुड्डा सरकार में विभिन्न आयोग में हुई नियुक्तियों पर सवाल उठाने की वजह से कासनी चर्चा में आए थे। तब कांग्रेस सरकार ने उन्हें प्रशासनिक सुधार विभाग से हटा कर काडा (कमांड एरिया डेवलेपमेंट अथॉरिटी) में लगा दिया था।

आपको बता दें कि आइएएस अशोक खेमका और प्रदीप कासनी में कई समानताएं हैं। खेमका का पिछली सरकार तक 43 बार ट्रांसफर हुआ था। दोनों ही ईमानदार और तेज-तर्रार अफसर माने जाते हैं। दोनों हरियाणा की हुड्डा सरकार की उपेक्षा के शिकार हुए।

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