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ग्रेनो में कम समय में रिपेयर हो सकेंगी पानी व सीवर की लाइनें, आईआईटी रुड़की जीपीआर मशीन से लाइनों की कर रहा मैपिंग
Mon, 21 Sep 2020 05:12 PM IST
पूजा त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क, ग्रेटर नोएडा
अमर उजाला नेटवर्क, ग्रेटर नोएडा
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Mon, 21 Sep 2020 05:12 PM IST
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ग्रेटर नोएडा में बिजली, पानी और सीवर लाइनें क्षतिग्रस्त होने पर रिपेयर करने में बहुत समय लग जाता है, तब तक निवासी परेशान रहते हैं। वहीं, फाल्ट के सही लोकेशन का पता नहीं होने की वजह से यह दिक्कत होती है। इस समस्या का हल जल्द मिल सकता है।
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ग्रेनो प्राधिकरण जमीन के अंदर बिजली, पानी, सीवर व टेलीफोन आदि लाइनों की जीआईएस मैपिंग करा रहा है। आईआईटी रुड़की ने इसकी शुरुआत कर दी है। जीपीआर मशीन से मैपिंग की जा रही है। इसे प्राधिकरण की वेबसाइट पर भी अपलोड किया जाएगा। जिसे ग्रेनोवासी वेबसाइट पर देख सकेंगे। ग्रेनो प्राधिकरण के सीईओ नरेंद्र भूषण ने एक साल में पूरे शहर की लाइनों की मैपिंग कर लेने की उम्मीद जताई है।
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दरअसल, अभी तक ग्रेटर नोएडा के सीवेज सिस्टम का मास्टर प्लान नहीं बना है, जिससे पता नहीं चल पाता कि कितने समय में कितने एसटीपी या सीवर लाइनों की जरूरत पड़ेगी। पूर्व में कुछ जगह पानी व सीवर की लाइनें डाल दी गई हैं, लेकिन उनको एसटीपी से नहीं जोड़ा गया है। इस वजह से सीवर नहीं निकल पा रहा।
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खासकर ग्रामीण एरिया में ज्यादा दिक्कत हो रही है। वहां पर लाइनें पड़ चुकी हैं, लेकिन उन लाइनों को एसटीपी से जोड़ने के लिए ढूंढने में परेशानी हो रही है। इन दिक्कतों को दूर करने के लिए प्राधिकरण मैपिंग कराकर मास्टर प्लान तैयार करा रहा है। इसकी जिम्मेदारी आईआईटी रुड़की को दी गई है।
आईआईटी ने ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रैडर मशीन (जीपीआर मशीन) के जरिए मैपिंग शुरू कर दी है। इस मशीन से 9 से 10 मीटर जमीन के अंदर की लाइनों की लोकेशन फोटो के साथ मिल सकेगी। प्राधिकरण का दावा है कि एनसीआर में ग्रेटर नोएडा पहला शहर है जहां मैपिंग के लिए जीपीआर मशीन का इस्तेमाल हो रहा है। मैपिंग हो जाने पर फाल्ट ढूंढने और उसे दुरुस्त करने में सुविधा होगी।
स्मार्ट सिटी के लिए बढ़ाए कदम
ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने के लिए प्राधिकरण की तरफ से कई कदम उठाए गए हैं। प्राधिकरण ने आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों के लिए 14 सलाहकार नियुक्त किए हैं। इनमें स्मार्ट विलेज, इंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग, ई-फाइलिंग सिस्टम, कूड़ा प्रबंधन, मित्रा ऐप, लैंड ऑडिट, सुगम यातायात, सीवर व्यवस्था, पानी, सीवर, ड्रेनेज का मास्टर प्लान आदि शामिल हैं।