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ग्रेनोवासियों को नए साल में मिलेगा गंगाजल, सितंबर तक बिछा दी जाएंगी लाइनें
Sun, 09 Aug 2020 12:12 PM IST
प्राची प्रियम
माई सिटी रिपोर्टर, ग्रेटर नोएडा
माई सिटी रिपोर्टर, ग्रेटर नोएडा
Published by: प्राची प्रियम
Updated Sun, 09 Aug 2020 12:12 PM IST
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ग्रेटर नोएडा में नए वर्ष से होगी गंगाजल की सप्लाई
- फोटो : अमर उजाला
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लंबे समय से गंगाजल का इंतजार कर रहे ग्रेनोवासियों के लिए राहत भरी खबर है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने परियोजना के सिविल कार्य को सितंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
उसके बाद लाइनों को जोड़कर जनवरी 2021 से गंगाजल की सप्लाई शुरू हो जाएगी। वहीं अगले दो माह में ग्रेनो में बने चारों सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से 50 गांवों को जोड़ने की योजना को भी बोर्ड ने मंजूरी दे दी है।
ग्रेटर नोएडा में 85 क्यूसेक गंगाजल आपूर्ति की योजना पर काम चल रहा है। करीब 290 करोड़ रुपये की इस परियोजना की शुरुआत मई 2010 में हुई थी। इसे जर्मनी की एक संस्था और एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की वित्तीय मदद से तैयार किया जा रहा है।
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इसे 2015 तक पूरा करने का लक्ष्य था, लेकिन जमीन विवाद के कारण परियोजना अटकी रही। अब इसे रफ्तार मिली है। प्राधिकरण के सीईओ नरेंद्र भूषण ने बताया कि गंगाजल लाने के लिए गाजियाबाद के देहरा गंग नहर से ग्रेटर नोएडा तक पाइप लाइन बिछाई जा रही है।
देहरा से करीब 11 किलोमीटर आने पर प्राइमरी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जा रहा है। वहां से 18 किलोमीटर दूरी पर स्थित पल्ला में दूसरा प्लांट बनाया जा रहा है। इसके बाद ग्रेटर नोएडा के मास्टर रिजर्व वायर तक पानी आएगा।
वहां से वितरण के लिए बने रिजर्व वायर तक पहुंचाया जाएगा और फिर ओवरहेड टैंक के जरिए सप्लाई होगी। ग्रेनो में वर्तमान में करीब 70 क्यूसेक जलापूर्ति की जा रही है। फिलहाल भूजल से ही सप्लाई होती है।
सितंबर तक सिविल कार्य होने के बाद लाइनों को जोड़ा जाएगा। उसके बाद गंगाजल की आपूर्ति होगी। गंगाजल आने से खारे पानी की समस्या दूर हो जाएगी।
निर्मित भवनों व वाणिज्यिक भूखंड की योजना जल्द
ग्रेटर नोएडा में बने घरों की योजना भी शीघ्र लाने को बोर्ड ने मंजूरी दी है। संपत्ति विभाग ऐसे भवनों की सूची तैयार कर रहा है। उसके बाद योजना लॉन्च की जाएगी। प्राधिकरण ने कई योजनाओं के जरिए इन भवनों का निर्माण कराया था, लेकिन कई अब भी खाली पड़े हैं।
वहीं, एक्सपो मार्ट के पास स्थित वाणिज्यिक भूखंड की योजना भी शीघ्र लाई जाएगी। बोर्ड ने इसे भी मंजूरी दे दी है। 19000 वर्ग मीटर भूखंड पर यह योजना आएगी। इसका डिजाइन पहले ही तैयार हो चुका है।
प्लॉट लेकर बैठने वालों पर कार्रवाई
बोर्ड ने साफ किया है कि जिन आवंटियों को प्लॉट लिए हुए 5 साल बीत गए हैं, उनका परीक्षण किया जाए। यदि वे एक साल में बनाने को तैयार हैं तो प्राधिकरण के सीईओ उन्हें वक्त दे सकते हैं।
अन्यथा उनका आवंटन निरस्त कर दिया जाए, जिससे कि वे प्लॉट नए लोगों को आवंटित हो सकें। शासन ने भी यह आदेश दे रखा है। ग्रेनो में अब भी आवासीय सेक्टरों में 40 से 50 फीसदी भूखंड खाली पड़े हैं।
किराए पर मिलेगी प्राधिकरण की बिल्डिंग
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के दफ्तर की दूसरी बिल्डिंग (टावर टी-2) को किराए पर देने के फैसले पर भी बोर्ड ने मुहर लगा दी है। बैंक, सरकारी संस्थान सहित अन्य निजी संस्थाएं भी किराए पर फ्लोर ले सकती हैं। ये प्राधिकरण दफ्तर परिसर के अंदर ही मौजूद है।
किसानों को आबादी के भूखंड जल्द
किसानों को आबादी के भूखंड शीघ्र उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है। उन किसानों को जल्दी प्लॉट मिल जाएगा, जिनकी जमीन पर कोई विवाद या अतिक्रमण नहीं है। ऐसे सभी किसानों को मई 2021 तक सबलीज कर देने का लक्ष्य है।
सीएजी के सवालों का दो हफ्ते में जवाब
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की पहले चरण की सीएजी ऑडिट पूरी हो गई है। सीएजी ने कई आपत्ति दर्ज कराई हैं, जिन पर प्राधिकरण को जवाब देना है। इसके लिए प्राधिकरण बोर्ड ने अपने सभी संबंधित विभागों को दो हफ्ते का समय दिया है।
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उसके बाद लाइनों को जोड़कर जनवरी 2021 से गंगाजल की सप्लाई शुरू हो जाएगी। वहीं अगले दो माह में ग्रेनो में बने चारों सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से 50 गांवों को जोड़ने की योजना को भी बोर्ड ने मंजूरी दे दी है।
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ग्रेटर नोएडा में 85 क्यूसेक गंगाजल आपूर्ति की योजना पर काम चल रहा है। करीब 290 करोड़ रुपये की इस परियोजना की शुरुआत मई 2010 में हुई थी। इसे जर्मनी की एक संस्था और एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की वित्तीय मदद से तैयार किया जा रहा है।
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इसे 2015 तक पूरा करने का लक्ष्य था, लेकिन जमीन विवाद के कारण परियोजना अटकी रही। अब इसे रफ्तार मिली है। प्राधिकरण के सीईओ नरेंद्र भूषण ने बताया कि गंगाजल लाने के लिए गाजियाबाद के देहरा गंग नहर से ग्रेटर नोएडा तक पाइप लाइन बिछाई जा रही है।
देहरा से करीब 11 किलोमीटर आने पर प्राइमरी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जा रहा है। वहां से 18 किलोमीटर दूरी पर स्थित पल्ला में दूसरा प्लांट बनाया जा रहा है। इसके बाद ग्रेटर नोएडा के मास्टर रिजर्व वायर तक पानी आएगा।
वहां से वितरण के लिए बने रिजर्व वायर तक पहुंचाया जाएगा और फिर ओवरहेड टैंक के जरिए सप्लाई होगी। ग्रेनो में वर्तमान में करीब 70 क्यूसेक जलापूर्ति की जा रही है। फिलहाल भूजल से ही सप्लाई होती है।
सितंबर तक सिविल कार्य होने के बाद लाइनों को जोड़ा जाएगा। उसके बाद गंगाजल की आपूर्ति होगी। गंगाजल आने से खारे पानी की समस्या दूर हो जाएगी।
निर्मित भवनों व वाणिज्यिक भूखंड की योजना जल्द
ग्रेटर नोएडा में बने घरों की योजना भी शीघ्र लाने को बोर्ड ने मंजूरी दी है। संपत्ति विभाग ऐसे भवनों की सूची तैयार कर रहा है। उसके बाद योजना लॉन्च की जाएगी। प्राधिकरण ने कई योजनाओं के जरिए इन भवनों का निर्माण कराया था, लेकिन कई अब भी खाली पड़े हैं।
वहीं, एक्सपो मार्ट के पास स्थित वाणिज्यिक भूखंड की योजना भी शीघ्र लाई जाएगी। बोर्ड ने इसे भी मंजूरी दे दी है। 19000 वर्ग मीटर भूखंड पर यह योजना आएगी। इसका डिजाइन पहले ही तैयार हो चुका है।
प्लॉट लेकर बैठने वालों पर कार्रवाई
बोर्ड ने साफ किया है कि जिन आवंटियों को प्लॉट लिए हुए 5 साल बीत गए हैं, उनका परीक्षण किया जाए। यदि वे एक साल में बनाने को तैयार हैं तो प्राधिकरण के सीईओ उन्हें वक्त दे सकते हैं।
अन्यथा उनका आवंटन निरस्त कर दिया जाए, जिससे कि वे प्लॉट नए लोगों को आवंटित हो सकें। शासन ने भी यह आदेश दे रखा है। ग्रेनो में अब भी आवासीय सेक्टरों में 40 से 50 फीसदी भूखंड खाली पड़े हैं।
किराए पर मिलेगी प्राधिकरण की बिल्डिंग
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के दफ्तर की दूसरी बिल्डिंग (टावर टी-2) को किराए पर देने के फैसले पर भी बोर्ड ने मुहर लगा दी है। बैंक, सरकारी संस्थान सहित अन्य निजी संस्थाएं भी किराए पर फ्लोर ले सकती हैं। ये प्राधिकरण दफ्तर परिसर के अंदर ही मौजूद है।
किसानों को आबादी के भूखंड जल्द
किसानों को आबादी के भूखंड शीघ्र उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है। उन किसानों को जल्दी प्लॉट मिल जाएगा, जिनकी जमीन पर कोई विवाद या अतिक्रमण नहीं है। ऐसे सभी किसानों को मई 2021 तक सबलीज कर देने का लक्ष्य है।
सीएजी के सवालों का दो हफ्ते में जवाब
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की पहले चरण की सीएजी ऑडिट पूरी हो गई है। सीएजी ने कई आपत्ति दर्ज कराई हैं, जिन पर प्राधिकरण को जवाब देना है। इसके लिए प्राधिकरण बोर्ड ने अपने सभी संबंधित विभागों को दो हफ्ते का समय दिया है।