रफ्तार पर लगाम लगाकर कम किया जाएगा सड़क हादसों का ग्राफ, यातायात निदेशालय ने दी हिदायत
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आने वाले दिनों में एक्सप्रेसवे पर फर्राटा भरना महंगा पड़ सकता है। सड़क हादसों से लाल हो रही सड़कों पर गति सीमा कम करने की तैयारी शुरू हो गई है। जल्द ही ट्रैफिक पुलिस की तरफ से इसका प्रस्ताव तैयार कर आला अधिकारियाें को सौंपा जाएगा। मंजूरी मिलने पर इसे लागू किया जाएगा। विकास के नाम पर अरबों खर्च करने के बाद भी जिले की सड़कें सुरक्षित नहीं हैं। साल दर साल सड़क हादसों का ग्राफ बढ़ रहा है। यही नहीं एक्सप्रेसवे सबसे ज्यादा असुरक्षित बताए जाते हैं। जिन पर गति सीमा का उल्लंघन सड़क हादसों की बड़ी वजह बन रहा है। 8 जुलाई को यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए बस हादसे में 29 लोगों की मौत के बाद शासन स्तर पर हादसों में कमी लाने के लिए मंथन शुरू हो गया है। इसी कड़ी में गति सीमा में बदलाव का खाका तैयार करने के लिए बैठकों का दौर शुरू होने जा रहा है।
हल्के वाहन के लिए 100 किमी/प्रति घंटे है मौजूदा गति सीमा
फिलहाल दोनों एक्सप्रेसवे (यमुना और नोएडा-ग्रेनो) पर हल्के वाहनों के लिए 100 किलोमीटर और भारी वाहनों के लिए 60 किलोमीटर प्रतिघंटे की गति सीमा निर्धारित है। लेकिन एक्सप्रेसवे पर 180 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से भी वाहन दौड़ते पाए गए हैं।
80 किमी प्रति घंटे का रखा जा सकता है प्रस्ताव
गति सीमा घटाकर कितनी की जाएगी इसको लेकर अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है लेकिन माना जा रहा है कि हल्के वाहनों के लिए 100 से घटाकर 80 किलोमीटर प्रतिघंटा का प्रस्ताव रखा जाएगा।
2005 लोगों ने गंवाई जान
यातायात निदेशालय ने दी हिदायत
यमुना एक्सप्रेसवे पर 8 जुलाई को बस हादसे के बाद परिवहन आयुक्त की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई थी। कमेटी ने सड़क हादसों में कमी लगाने के लिए छह सुझाव दिए थे। यातायात निदेशालय ने हाल ही में 13 जिलों के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों को पत्र लिखकर इस पर अमल करने की हिदायत दी है। कोहरे के दौरान एक्सप्रेसवे पर वाहनों की गति सीमा को 100 किलोमीटर प्रति घंटा से घटाने को कहा है।
जिले में सड़क हादसे
वर्ष हादसे मौत
2014 976 386
2015 933 362
2016 926 382
2017 1043 423
2018 1067 452
2019 335 159
(नोट: वर्ष 2019 के आंकड़े अप्रैल माह तक के हैं।)