मंत्रियों के फर्जी डिग्री व एक मंत्री पर स्टिंग से परेशान रही सरकार
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14 फरवरी को आम आदमी पार्टी की सरकार एक साल का सफर पूरा करेगी। चुनाव से पहले 70 प्वाइंट एजेंडे को पूरा करने व वादों की लंबी फेहरिस्त थमाने वाले केजरीवाल कुछ जगह खरे उतरे तो कुछ मामलों में उनकी सरकार ने दिल्लीवालों को निराश किया।
नए प्रयोगों, विवादों व केंद्र सरकार से सीधे टकराव के चलते भी वह देश की राजनीति में चर्चा में बने रहे। इस सरकार में पहली बार कोई मुख्यमंत्री बिना किसी पोर्टफोलियो के रहा।
14 फरवरी 2015 को रामलीला मैदान में कैबिनेट के साथ शपथ लेते समय मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जनता से किए वादों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण बताया था।
बड़ी घोषणाओं सहित बहुत से वादे अभी पेंडिंग हैं
400 यूनिट तक बिजली के दाम आधे करने, 20 हजार लीटर पानी फ्री करने, जनलोकपाल बिल प्रस्ताव पास करने, किसानों को सबसे ज्यादा मुआवजा देने सहित कुछ वादों को पूरा करने के अलावा सरकार अन्य किए गए वादों के बीच केंद्र सरकार के आड़े आने के अलावा कुछ विवादों में उलझी रही।
दिल्ली में सीसीटीवी कैमरे, वाईफाई, महिला सुरक्षा को लेकर की गई बड़ी घोषणाओं सहित बहुत से वादे अभी पेंडिंग हैं। इस कड़ी में कानून मंत्री जितेंद्र तोमर के फर्जी डिग्री में जेल जाने पर सरकार को बड़ा झटका लगा।
एक मंत्री आसिम खान को भ्रष्टाचार में स्वयं हटाने के बाद अब एक अन्य मंत्री इमरान हुसैन के खिलाफ स्टिंग व इस एक वर्ष के कार्यकाल में पूर्व कानून मंत्री सोमनाथ भारती सहित छह विधायकों के जेल जाने पर भी सरकार असहज दिखी।
सम-विषम फॉर्मूले ने दी सरकार को राहत
हालांकि, आप की सरकार विवादों के बीच नए प्रयोग करने से पीछे नहीं हटी। राजधानी में बढ़ते प्रदूषण के चलते केजरीवाल ने सम-विषम योजना की घोषणा कर दी।
सरकार के निर्णय के बाद देश भर में इस पर बहस शुरू हो गई, लेकिन केजरीवाल ने इसे लागू कर दिया। नए साल की शुरुआत में फार्मूला लागू करने के बाद इसकी कामयाबी से बड़ी राहत मिली।
पंजाब में विधानसभा चुनाव से पूर्व सम-विषम फॉर्मूला हिट रहने, दिल्ली में बिजली के दाम आधे व पानी फ्री सहित दिल्ली के प्रयोगों की सफलता को वहां भुनाने की कोशिश भी शुरू हो गई है। हालांकि विधानसभा चुनाव के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र संघ चुनाव में एबीवीपी व एनएसयूआई से पिछड़ जाने पर उसे बड़ा झटका लगा।
इन मुद्दों को लेकर चर्चा में रहे सीएम
सरकार का विज्ञापन बजट 526 करोड़ रुपये रखने
किसान गजेंद्र के पेड़ से फांसी लगाकर खुदकुशी करने
प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों का सामूहिक अवकाश पर जाने
जनलोकपाल बिल के ड्राफ्ट पर सवाल उठने
21 विधायकों को संसदीय सचिव बनाने
सभी विधायकों का वेतन कई गुना बढ़ाने को स्वीकृति देने
मुख्यमंत्री का वेतन प्रधानमंत्री से ज्यादा होने
नगर निगम का पैसा न देने पर दो बार सफाईकर्मियों की हड़ताल
कार्यक्रम के दौरान युवती के मुख्यमंत्री पर स्याही फेंकने
केजरीवाल के प्रधानमंत्री को मनोरोगी तक कह देने
तीन मंत्रियों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप
भ्रष्टाचार के आंदोलन से जन्म लेने के बाद पहले कांग्रेस के समर्थन से 49 दिनों की सरकार चलाने व भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में बाधा डालने पर सरकार छोड़ देने वाली आम आदमी पार्टी की सरकार अब 67 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत में एक साल बीता चुकी है।
भ्रष्टाचार पर कभी केजरीवाल विपक्ष को घेरते हैं तो विपक्ष के पास भी एक साल में केजरीवाल को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घेरने के कई मौके आए।
तीन मंत्रियों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप, प्रमुख सचिव पर सीबीआई की छापेमारी के अलावा एसीबी की स्वायत्तता पर केंद्र व दिल्ली सरकार के बीच विवादों के बाद दिल्ली पुलिस के एसीबी को अपने अधीन में ले लेने से भ्रष्टाचार के खिलाफ दिल्ली सरकार की लड़ाई मंद हो गई।