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देश के सबसे बड़े ऑटोमोबाइल हब की गुहार- पीएम साहब सरकारी बिजली से नहीं होगा मेक इन इंडिया
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Sat, 07 May 2016 12:10 PM IST
सार
- आईएमटी मानेसर इंडस्ट्रियल एसोसिएशन की पीएम से गुहार
- आईएमटी मानेसर इंडस्ट्रियल एसोसिएशन की पीएम से गुहार
- गुजरात की तर्ज पर बिजली आपूर्ति निजी हाथों में देने की मांग
- उद्यमियों ने कहा डीएचबीवीएन बेहतर बिजली आपूर्ति में अक्षम
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पीएम मोदी
- फोटो : pti
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विस्तार
देश के सबसे बड़े ऑटोमोबाइल हब आईएमटी-मानेसर में बिजली संकट का दौर है। इससे परेशान उद्योग जगत ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दरबार में गुहार लगाई है। उनका कहना है कि सरकारी पावर इंफ्रास्ट्रक्चर 'मेक इन इंडिया' के रास्ते का सबसे बड़ा रोड़ा बना हुआ है। आईएमटी मानेसर इंडस्ट्रियल एसोसिएशन ने बिजली आपूर्ति और मेंटिनेंस की जिम्मेदारी गुजरात की तर्ज पर प्राइवेट हाथों में देने की मांग की है।
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आईएमटी मानेसर इंडस्ट्रियल एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री को भेजे अपने पत्र में लिखा है कि दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) उद्योगों को बिजली आपूर्ति करने में समक्ष नहीं है।
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वह सुविधा देने की बजाय लगातार असुविधा खड़ी करता जा रहा है। एसोसिएशन के महासचिव मनोज त्यागी ने बताया कि डीएचबीवीएन बिजली आपूर्ति करने में सक्षम नहीं हो पा रहा है। यहां का पावर सिस्टम दशकों पुराना है।
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अगर औद्योगिक क्षेत्र के पावर सिस्टम में किसी प्रकार की खराबी हो जाए तो डीएचबीवीएन को इसे ठीक कराने में घंटों लग जाता है। कई बार तो दो से तीन दिनों में यह काम पूरा हो पाता है। ऐसे में औद्योगिक उत्पादन बुरी तरह से प्रभावित जाता है। इस प्रकार का नुकसान उद्योगों के लिए असहनीय होता जा रहा है।
आईएमटी मानेसर इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश चंद ने ने कहा कि मीटर जलने की स्थिति में उसे बदलने में तीन से पांच दिन लग जाते हैं। मीटर जलने पर उसकी सील खुलवाने बिजली निगम के एमएंडपी के पास जाना होता है। इसके बाद टेस्टिंग करानी होती है।
यह देरी बिजली निगम की जटिल प्रक्रिया के कारण होती है। अगर अदानी, रिलायंस और टाटा जैसी प्राइवेट कंपनियों को यहां बिजली आपूर्ति की जिम्मेदारी दे दी जाए तो उद्योग प्रधानमंत्री मोदी के मेक इन इंडिया के सपने को साकार करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। एसोसिएशन ने कहा कि दिल्ली, गुजरात और मुंबई में बिजली आपूर्ति निजी हाथों में होने से लोगों की परेशानी काफी कम हुई है।
इंडस्ट्री को क्यों जरूरत है प्राइवेट पावर सेक्टर की:
-डीएचबीवीएन नए कनेक्शन देने में लगाता है लंबा समय
-लोड बढ़वाने और घटवाने में आती है परेशानी
-बिजली निगम पावर सिस्टम का मेंटिनेंस करने में लचर
-आए दिन ब्रेकडाउन सहित अन्य परेशानी
-बिजली की काफी कम उपलब्धता
-आईएमटी मानेसर में दशकों पुराना पावर सिस्टम
-खराबी दूर करने में बिजली निगम का कोई टाइमफ्रेम निर्धारित नहीं -खराब पावर इंफ्रास्ट्रक्चर का रिप्लेसमेंट नहीं होता
-उद्यमियों की शिकायत का नहीं किया जाता समय से निवारण
-डीएचबीवीएन की कार्यशैली काफी लचर
-उद्यमियों का आरोप बिजली निगम उद्योगों का कर रहा है उत्पीडन
-इंडस्ट्रियल यूनिटों को बिजली निगम भेज रहा है कॉमर्शियल एक्टिविटी का नोटिस
-बिजली निगम उद्योगों के बीच कम्युनिकेशन गैप
-मीटर बदलने में लगता है लंबा समय
-बिजली निगम की लालफीताशाही उद्योगों पर पड़ रहा है भारी