गोपाल राय ने बताया क्यों उस दिन बुरी तरह डर गए थे
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सम विषम योजना शुरू होने के ठीक एक दिन पहले अधिकारियों के सामूहिक छुट्टी पर जाने से दिल्ली सरकार के हाथ-पांव फूल गए थे। सारा सिस्टम धराशायी होने को तैयार था।
ये बातें परिवहन मंत्री गोपाल राय ने शनिवार को सम विषम योजना को सफलतापूर्वक लागू कराने के पीछे की कहानी बयां करते हुए कही। मीडियाकर्मियों से उन्होंने कहा कि यह सफलता सामूहिक प्रयास का नतीजा है। इसमेें मीडिया का रोल भी अहम है।
सम विषम की सफलता के राज मीडिया से साझा करते हुए गोपाल राय ने कहा कि चार अक्तूबर को हमने तय किया था कि योजना को हर हाल में लागू करेंगे। इसे सफल बनाने के लिए हम लगातार काम कर रहे थे। एक जनवरी को इसे लागू करना था।
ऐसे तलाशा विकल्प
ठीक एक दिन पहले 31 दिसंबर 2015 को सरकार ने ट्रॉयल घोषित किया। लेकिन उसी दिन अधिकारी सामूहिक छुट्टी पर चले गए और ट्रॉयल विफल हो गया। जिसे लेकर सरकार के सामने परेशानी खड़ी हो गई।
हालांकि हमने उसका विकल्प ढूंढा और प्रत्येक विधानसभा में 10-10 वॉलेंटियर की तैनाती की। राय ने कहा कि अधिकारियों के इस तरह अचानक छुट्टी पर जाने से हम थोड़े डर जरूर गए थे। यह मुश्किल दौर चुनाव के अंतिम क्षणों से भी बुरा था।
उन्होंने कहा कि हम चुनाव के समय भी इतनी चिंता नहीं करते थे जितनी हमने सम विषम को लागू कराने के फैसले पर की। लेकिन अब सुकून है कि 90 फीसदी लोग इसे लागू कराने का चौतरफा दबाव बना रहे हैं।
पड़ोसियों में बढ़ी दोस्ती
उन्होंने कहा कि यह सामूहिक प्रयास की सफलता थी। इसके लिए उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह और दिल्ली पुलिस की सकारात्मक सहयोग के लिए आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि इसकी सफलता के पीछे गांधीगिरी भी काम आई। इस प्रयोग ने लोगों के दिमाग को बदला।
गोपाल राय ने कहा कि सब विषम के फीडबैक अब भी आ रहे हैं। जानकारी मिली है कि योजना से सामाजिक संबंध मधुर हुए हैं। कारपूलिंग से पड़ोसियों में दोस्ती बढ़ी है। शाम को घर पहुंचने के बाद होने वाले झगड़े में भी कमी आई है।
इसका कारण सिर्फ यह रहा कि सड़क पर कंजेशन घटा, जाम कम लगा जिससे लोग समय पर घर पहुंचेे। जिसका नतीजा यह हुआ की पति-पत्नी के बीच झगड़ा कम हुआ। अब हम पर चौतरफा दबाव है कि इसे दोबारा लागू किया जाए।