{"_id":"60ab41c0cc7d93232c590017","slug":"gntcd-amendment-act-plea-filed-opposing-this-amendment-in-delhi-high-court-it-seek-response-from-centre-and-delhi-government","type":"story","status":"publish","title_hn":"जीएनसीटीडी कानून: एक्ट में संशोधन के खिलाफ याचिका पर अदालत ने केंद्र और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जीएनसीटीडी कानून: एक्ट में संशोधन के खिलाफ याचिका पर अदालत ने केंद्र और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा
Mon, 24 May 2021 11:33 AM IST
पूजा त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Mon, 24 May 2021 11:33 AM IST
सार
यह याचिका नीरज शर्मा नाम के व्यक्ति ने दायर की है। याचिकाकर्ता स्वयं को आम आदमी पार्टी (आप) का सदस्य बताता है।
विज्ञापन
दिल्ली उच्च न्यायालय (फाइल फोटो)
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दिल्ली हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (जीएनसीटीडी) कानून में संशोधन को असंवैधानिक करार देने का अनुरोध करने वाली एक याचिका पर सोमवार को केंद्र तथा दिल्ली सरकार से जवाब मांगा। इस संशोधन के जरिए उप राज्यपाल की शक्तियां बढ़ गई हैं।
यह याचिका नीरज शर्मा नाम के व्यक्ति ने दायर की है। याचिकाकर्ता स्वयं को आम आदमी पार्टी (आप) का सदस्य बताता है। चीफ जस्टिस डीएन पटेल तथा न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने कानून मंत्रालय तथा दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर इस याचिका पर अपना रुख बताने को कहा है।
याचिका में कहा गया है कि संशोधित जीएनसीटीडी कानून संविधान के विभिन्न मौलिक अधिकारों और अनुच्छेद 239 एए का विरोधाभासी है। याचिका के अनुसार, यह कानून उच्चतम न्यायालय के उस फैसले के भी खिलाफ है जिसमें कहा गया है कि उप राज्यपाल को सार्वजनिक व्यवस्था, पुलिस और भूमि से संबंधित अधिकार होंगे तथा अन्य सभी चीजों के लिए वह मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार काम करने के लिए बाध्य होंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
यह याचिका नीरज शर्मा नाम के व्यक्ति ने दायर की है। याचिकाकर्ता स्वयं को आम आदमी पार्टी (आप) का सदस्य बताता है। चीफ जस्टिस डीएन पटेल तथा न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने कानून मंत्रालय तथा दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर इस याचिका पर अपना रुख बताने को कहा है।
विज्ञापन
याचिका में कहा गया है कि संशोधित जीएनसीटीडी कानून संविधान के विभिन्न मौलिक अधिकारों और अनुच्छेद 239 एए का विरोधाभासी है। याचिका के अनुसार, यह कानून उच्चतम न्यायालय के उस फैसले के भी खिलाफ है जिसमें कहा गया है कि उप राज्यपाल को सार्वजनिक व्यवस्था, पुलिस और भूमि से संबंधित अधिकार होंगे तथा अन्य सभी चीजों के लिए वह मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार काम करने के लिए बाध्य होंगे।
विज्ञापन