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फर्जी मार्कशीट बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़, दो भाई गिरफ्तार

Wed, 01 Feb 2017 11:29 PM IST
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद Updated Wed, 01 Feb 2017 11:29 PM IST
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Who busted a fake mark sheets, two brothers arrested
अपराध - फोटो : अमर उजाला

विजय नगर पुलिस ने फर्जी मार्कशीट बनाने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ कर दो सगे भाइयों को गिरफ्तार किया है। हालांकि गिरोह का मास्टरमाइंड साइबर कैफे संचालक फरार हो गया है। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है। पकड़े गए दोनों भाई कमीशन पर फर्जी मार्कशीट बनवाने का काम करते थे।

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यह गिरोह फर्जी मार्कशीट बनाने के साथ ओरिजनल मार्कशीट में नंबर बढ़ाने और जन्मतिथि कम करने का काम भी करता था। पुलिस दोनों भाइयों से पूछताछ कर रही है। पकड़े गए दोनों भाई विजय नगर निवासी मोहित और रोहित पुत्र रामनिवास हैं जबकि फरार गिरोह सरगना साइबर कैफेे मालिक सुरेश है। मोहित और रोहित बीए के स्टूडेंट हैं।
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एसएचओ विजय नगर नीरज ने बताया कि मुखबिर की सूचना पर मंगलवार शाम को विजय नगर तिराहा स्थित एक साइबर कैफे से दोनों भाइयों को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में दोनों ने बताया कि गिरोह का मास्टरमाइंड कैफे मालिक सुरेश उन्हें नई फर्जी मार्कशीट बनवाने पर 50 प्रतिशत और ओरिजल मार्कशीट की स्कैन कॉपी में नंबर बढ़ाने और
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जन्मतिथि कम करवाने पर 40 प्रतिशत कमीशन देता है। ग्राहक की हैसियत के आधार पर रकम तय की जाती थी। पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी दो से पांच हजार रुपये में फर्जी मार्कशीट बनाकर बेचते थे। करीब तीन महीने से यह धंधा चल रहा था और 100 से अधिक फर्जी मार्कशीट बनाए जा चुके हैं।

एसएचओ ने बताया कि गिरोह के मास्टमाइंड एवं कैफे संचालक सुरेश की तलाश की जा रही है। आरोपियों की निशानदेही पर चार असली मार्कशीट, छह नकली मार्कशीट, एक कलर प्रिंटर, मॉनिटर, सीपीयू और अन्य कागजात बरामद किए हैं। धोखाधड़ी के आरोप में रिपोर्ट दर्ज की गई है।

ज्यादातर युवतियों को फांसता था गिरोह
गिरोह का भंडाफोड़ करने वाले जांच अधिकारी एसआई अंजनी सिंह ने बताया कि गिरोह ज्यादातर युवतियों को फांसता था। युवतियां जल्द ही मार्कशीट में नंबर बढ़ाने और जन्मतिथि कम करने या फर्जी मार्कशीट बनवाने के लालच में आ जाती थीं। इसके साथ ही ज्यादातर ग्राहक ऐसे थे, जिन्हें विवाह के लिए बेटे-बेटी की मार्कशीट में अधिक अंक चाहिए होते थे।


इसके साथ ही निजी कंपनियों में काम करने वाले भी फर्जी मार्कशीट बनाते थे। जांच अधिकारी ने बताया कि आरोपी सीबीएसई और यूपी बोर्ड की मार्कशीट में हेराफेरी करते थे। उन्होंने बताया कि यूपी बोर्ड की मार्कशीट में रोल नंबर बदलने में आसानी होती थी, क्योंकि इन मार्कशीट को बाद में कोई नहीं देखता। इनमें फर्जीवाड़ा करना आसान रहता था।

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