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18 माह में बनकर तैयार हो जाएगा वेस्ट टू एनर्जी प्लांट

Tue, 30 May 2017 12:18 AM IST
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद Updated Tue, 30 May 2017 12:18 AM IST
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West to Energy Plant to be ready in 18 months
बिजलीघर - फोटो : अमर उजाला

गालंद में वेस्ट टू एनर्जी प्लांट लगाने के लिए नगर निगम अधिकारियों ने शासन को प्रस्ताव भेज दिया है। शासन से स्वीकृति मिलने के बाद महज 18 महीने में प्लांट बनकर तैयार हो जाएगा। इस प्लांट पर करीब 220 करोड़ की लागत आएगी और शहर के कचरे से प्रतिदिन 15 मेगावाट बिजली तैयार होगी।

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गालंद में जीडीए को 34 एकड़ जमीन बिल्डरों से लेकर नगर निगम को हस्तांतरित करनी है। इसमें से 18 एकड़ जमीन नगर निगम को बीते दिनों हस्तांतरित की जा चुकी है। अब नगर निगम ने प्राइवेट कंपनी ईको ग्रीन के साथ मिलकर पीपीपी मॉडल पर कूड़े से बिजली बनाने का प्लांट लगाने की प्लानिंग की है।
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कंपनी ने नगर निगम को प्रस्ताव बनाकर करीब एक महीने पहले ही दे दिया था। अब निगम अधिकारियों ने इस पर स्वीकृति के लिए नगर विकास विभाग को भेज दिया है। यहां से मंजूरी मिलने के बाद कूड़े से बिजली बनाने का प्लांट लगाने की शुरुआत की जाएगी। प्लांट तैयार होने में करीब 18 महीने का समय लगेगा।
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इससे पहले प्लांट लगाने वाली कंपनी को पावर कारपोरेशन के साथ पीपीए (पावर परचेज एग्रीमेंट) भी साइन करना होगा। प्लांट में बनने वाली 15 मेगावाट बिजली पावर कारपोरेशन को दी जाएगी।

30 साल के लिए लीज पर दी जाएगी जमीन
नगर निगम कूड़े से बिजली बनाने वाले प्लांट पर पैसा खर्च नहीं करेगा। नगर निगम सिर्फ प्लांट के लिए जमीन उपलब्ध कराएगा। निगम अधिकारियों के मुताबिक प्लांट के लिए 34 एकड़ जमीन 30 साल के लिए लीज पर दी जाएगी।

गालंद में बनेगा डंपिंग ग्राउंड, स्वास्थ्य विभाग पर बढ़ेगा बोझ
गालंद में डंपिंग ग्राउंड बनने से कूड़ा निस्तारण की समस्या तो दूर हो जाएगी, लेकिन नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग पर बोझ बढ़ जाएगा। निगम के वाहनों को तकरीबन 30 किलोमीटर लंबा चक्कर लगाना पड़ेगा।

फिलहाल वह पांच किलोमीटर दूर प्रताप विहार में कूड़ा डंप करते हैं, लेकिन फिर 20 किलोमीटर दूर गालंद में कूड़ा डालने जाना पड़ेगा। नगर निगम को बड़े वाहन भी खरीदने पड़ेंगे।

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शासन को प्रस्ताव भेज दिया गया है। मंजूरी मिलने के बाद जरूरत होगी तो टेंडर कॉल किए जाएंगे और यह प्रक्रिया पूरी कर प्लांट लगाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। 18 महीने में प्लांट बनकर तैयार हो जाएगा। यानी 2019 की शुरूआत में कूड़ा निस्तारण की समस्या दूर हो जाएगी। - डीके सिन्हा, अपर नगरायुक्त

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