बुलंदशहर। गेहूं की खेती में उर्वरकों की खपत कम करने, किसानों की लागत घटाने और नाइट्रोजन के बेहतर उपयोग के लिए ग्रीन अमोनिया तकनीक का प्रदर्शन शुरू किया गया है। बृहस्पतिवार को कृषि विज्ञान केंद्र बुलंदशहर की ओर से गांव काहिरा में गेहूं की फसल पर इस तकनीक का प्रदर्शन किया गया। अधिकारियों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में पहली बार बुलंदशहर में इसकी शुरुआत हुई है। जिले में 200 एकड़ भूमि पर प्रदर्शन कर तकनीक की उपयोगिता का आकलन किया जाएगा।
कृषि विज्ञान केंद्र में पहुंचे भारतीय कृषि अनुसंधान प्रणाली मोदीपुरम के निदेशक डॉ. सुनील कुमार और अटारी कानपुर के निदेशक डॉ. राघवेंद्र सिंह ने बताया कि ग्रीन अमोनिया खेती में नाइट्रोजन की उपलब्धता बढ़ाने का विकल्प बन सकती है। अभी किसान मुख्य रूप से यूरिया का इस्तेमाल करते हैं, जिसमें 46 प्रतिशत नाइट्रोजन होती है। इसकी उपयोग दक्षता करीब 35 से 40 प्रतिशत तक रहती है। वहीं, ग्रीन अमोनिया में 82 प्रतिशत नाइट्रोजन होने और इसकी दक्षता 75 से 80 प्रतिशत तक होने का दावा किया गया है। डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि इस तकनीक में खेत की जुताई के समय जमीन में करीब 15 सेंटीमीटर गहराई पर अमोनिया गैस डाली जाती है। इसके तीन दिन बाद गेहूं की बुवाई की जा सकती है। इससे फसल के दौरान बार-बार नाइट्रोजन देने की जरूरत कम होगी। डॉ. राघवेंद्र सिंह ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सात कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से इस तकनीक का प्रदर्शन किया जा रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र की प्रभारी अधिकारी डॉ. रेशू सिंह ने बताया कि प्रदर्शन के लिए किसानों से कोई शुल्क नहीं लिया गया है। इस दौरान उप कृषि निदेशक बबलू कुमार सहित कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञ और कर्मचारी मौजूद रहे।