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टॉयलेट वेस्ट का ट्रीटमेंट कर पार्कों में होगा इस्तेमाल
ब्यूरो अमर उजाला/ गाजियाबाद
Updated Sat, 15 Oct 2016 12:45 AM IST
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नगर निगम
- फोटो : अमर उजाला
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घरों के टॉयलेट वेस्ट का ट्रीटमेंट कर पानी का इस्तेमाल पार्कों में किया जाएगा। इससे न केवल भूजल का दोहन कम होगा, बल्कि हरियाली भी बेहतर होगी। जापान की कंपनी ओईसी (ओरिजनल इंजीनियरिंग कंसलटेंट कारपोरेशन लिमिटेड) की सीनियर पदाधिकारी ने शुक्रवार को महापौर अशु वर्मा से मुलाकात कर जापान में प्रयोग हो रही इस तकनीक का प्रेजेंटेशन दिया।
जापानी कंपनी की कंसलटेंट कुबोटा नाको ने बताया कि उनकी कंपनी करीब 200 घरों के टॉयलेट/सीवरेज को एक जगह इकट्ठा कर जैविक पद्धति से ट्रीटमेंट करेगी। इसके लिए प्लांट लगाने को महज 150 वर्ग मीटर जमीन की जरूरत होगी।
यह प्लांट जमीन के नीचे लगाया जाता है और ऊपर चार-पांच फीट मिट्टी रहती है। यानी मिट्टी के ऊपर खेती, हरियाली की जा सकती है। ट्रीटमेंट के बाद पानी अपने आप मिट्टी सोखती रहती है। इस पानी से पार्क या ग्रीन बेल्ट की सिंचाई होती रहती है।
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यानी पार्कों या ग्रीन बेल्ट की सिंचाई के लिए नगर निगम को ग्राउंड वाटर का इस्तेमाल नहीं करना होगा। उन्होंने बताया कि इस पर निगम को पैसा खर्च नहीं करना होगा। इसके लिए पूरी फंडिंग जायका (जापान इंटरनेशनल कारपोरेशन एजेंसी) करेगी।
फिलहाल ट्रायल बेस पर शहर में दो-चार जगह यह प्लांट लगाए जा सकते हैं। महापौर ने उन्हें इस तकनीक का प्रयोग शहर में करने का आश्वासन दिया है। हालांकि गाजियाबाद शहर में 200 घरों के सीवरेज को अलग कर पाना मुश्किल होगा, लेकिन उनका कहना है कि फिलहाल किसी छोटी आवासीय कालोनी में इसका ट्रायल किया जा सकता है।
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जापानी कंपनी की कंसलटेंट कुबोटा नाको ने बताया कि उनकी कंपनी करीब 200 घरों के टॉयलेट/सीवरेज को एक जगह इकट्ठा कर जैविक पद्धति से ट्रीटमेंट करेगी। इसके लिए प्लांट लगाने को महज 150 वर्ग मीटर जमीन की जरूरत होगी।
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यह प्लांट जमीन के नीचे लगाया जाता है और ऊपर चार-पांच फीट मिट्टी रहती है। यानी मिट्टी के ऊपर खेती, हरियाली की जा सकती है। ट्रीटमेंट के बाद पानी अपने आप मिट्टी सोखती रहती है। इस पानी से पार्क या ग्रीन बेल्ट की सिंचाई होती रहती है।
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यानी पार्कों या ग्रीन बेल्ट की सिंचाई के लिए नगर निगम को ग्राउंड वाटर का इस्तेमाल नहीं करना होगा। उन्होंने बताया कि इस पर निगम को पैसा खर्च नहीं करना होगा। इसके लिए पूरी फंडिंग जायका (जापान इंटरनेशनल कारपोरेशन एजेंसी) करेगी।
फिलहाल ट्रायल बेस पर शहर में दो-चार जगह यह प्लांट लगाए जा सकते हैं। महापौर ने उन्हें इस तकनीक का प्रयोग शहर में करने का आश्वासन दिया है। हालांकि गाजियाबाद शहर में 200 घरों के सीवरेज को अलग कर पाना मुश्किल होगा, लेकिन उनका कहना है कि फिलहाल किसी छोटी आवासीय कालोनी में इसका ट्रायल किया जा सकता है।