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कार से मिला तीन करोड़ कैश, हड़कंप
ब्यूरो,अमर उजाला इंदिरापुरम
Updated Fri, 09 Sep 2016 12:40 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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एनएच-24 पर बृहस्पतिवार सुबह एक कार से तीन करोड़ रुपये बरामद होने पर हड़कंप मंच गया। जांच में पता चला कि यह रकम भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय कार्यालय द्वारा लखनऊ प्रदेश कार्यालय बतौर पार्टी फंड भेजी जा रही थी।
बाद में पुलिस व आयकर विभाग की जांच पड़ताल के बाद रकम छोड़ दी गई, जिसे कार्यकर्ता वापस दिल्ली कार्यालय ले गए। घटना सुबह 9 बजे की है। हरियाणा नंबर की एक स्विफ्ट कार ने काला पत्थर रेड लाइट पर रुकने की बजाय जब तेजी से गाड़ी आगे बढ़ाई तो ट्रैफिक पुलिस ने शक के आधार पर मॉडल टाउन कट पर वायरलेस कर कार को रुकवा लिया।
कार की जांच की गई तो तीन बड़े बैग मिले, जिनमें से दो में 500-500 रुपये के नोटों की गड्डियां भरी थीं जबकि एक बैग में कपड़े थे। गाड़ी में दो युवक थे, जिन्हें तुरंत हिरासत में ले लिया गया। इतनी बड़ी रकम को देखकर जांच करने वाले पुलिसकर्मियों के भी होश उड़ गए।
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उन्होंने मामले की जानकारी आला अधिकारियों को दी और गाड़ी इंदिरापुरम थाने ले गए। पूछताछ के दौरान गाड़ी में सवार युवकों ने बताया कि यह रकम भाजपा के पार्टी फंड की है। इसे दिल्ली से लखनऊ भाजपा कार्यालय ले जाया जा रहा है।
सूचना पर इनकम टैक्स के अधिकारी भी थाने पहुंच गए। पुलिस द्वारा युवकों से इतनी बड़ी रकम ले जाने के दस्तावेज मांगे गए तो उन्होंने भाजपा के केंद्रीय कार्यालय द्वारा जारी लेटर की कापी मोबाइल में वाट्स एप पर दिखाई, जिसे पुलिस ने मानने से इंकार कर दिया।
इस पर युवकों ने भाजपा नेताओं को जानकारी दी। कुछ देर बाद भाजपा के क्षेत्रीय महामंत्री अशोक मोंगा और क्षेत्रीय मंत्री मनोज गुप्ता थाना इंदिरापुरम पहुंचे और पुलिस को रकम ट्रांजिट कर ले जाने का लेटर दिखाया, जिसे भाजपा कार्यालय दिल्ली के अकाउंट हेड मनोज कुमार ने लिखा था।
लेटर में लिखा है कि उत्तर प्रदेश इकाई के कार्यकर्ता अनूप अग्रवाल के जरिए तीन करोड़ रुपये की रकम दिल्ली कार्यालय से लखनऊ कार्यालय भेजी जा रही है। उधर, भाजपा के दिल्ली से आए सीए संजीव सिंह ने थाने पहुंच गए और उन्होंने अधिकारियों को पैसों के लेनदेन की प्रविष्टियां दिखाईं।
इसके बाद बैगों में मिली रकम को गिना गया। सीए द्वारा दिखाई गई प्रविष्टियों से संतुष्ट होकर आयकर अधिकारियों ने रकम को अवमुक्त कर दिया। बातचीत के दौरान अशोक मोंगा और मनोज कुमार ने बताया कि इन्हें यह रकम लेकर पहले शहर कार्यालय आना था।
दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि कार्यकर्ताओं ने ट्रैफिक पुलिस को लेटर दिखाया था, लेकिन पुलिस ने मीडिया बुलाने की धमकी दी और रुपये छोड़ने की एवज में 10 लाख रुपये की मांग की।
इस संबंध में एएसपी आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि ट्रैफिक पुलिस के रोकने के दौरान कार्यकर्ताओं के पास रुपये से संबंधित दस्तावेज नहीं थे, जिसके बाद कैश थाने लाया गया।
करीब छह घंटे की इनकम टैक्स अधिकारियों की जांच के बाद कैश भाजपा कार्यकर्ताओं को सौंप दिया गया है। कार्यकर्ता रकम को वापस दिल्ली कार्यालय ले गए हैं। पुलिस पर रुपये मांगने संबंधी आरोपों की जांच कराई जाएगी।
वारदात हो जाती तो कौन होता जिम्मेदार
तीन करोड़ रुपये की रकम सिर्फ दो लोगों के भरोसे कार के जरिए भाजपा के दिल्ली कार्यालय से लखनऊ कार्यालय भेजी जा रही थी, जिसे पुलिस लापरवाही मान रही है।
पुलिस का कहना है कि यह बड़ी लापरवाही थी।
बृहस्पतिवार की सुबह मॉडल टाउन कट पर ब्लैक मनी पकड़े जाने की सूचना फैलते ही लोग सकते में आ गए। आसपास लोग जमा होने लगे। सूचना पर थोड़ी देर बाद भाजपा कार्यकर्ता भी वहां पहुंच गए। भाजपा के राष्ट्रीय कार्यालय की ओर से भेजी जा रही तीन करोड़ की रकम के लिए न तो कार में कोई सिक्योरिटी गार्ड था, न ही पुलिस को इसकी सूचना दी गई थी।
हाईवे पर आए दिन होने वाली लूट और डकैती की घटनाओं के बावजूद भाजपा को यह लापरवाही भारी पड़ सकती थी। दिल्ली से लखनऊ तीन करोड़ ले जा रही कार में उत्तर प्रदेश भाजपा इकाई के कार्यकर्ता और लखनऊ निवासी अनूप अग्रवाल और कार चला रहे सिद्धार्थ शुक्ला ही थे। इतनी बड़ी रकम भेजने के लिए पुलिस अधिकारियों तक को सूचित करना जरूरी नहीं समझा गया। ऐसे में अगर रास्ते में वारदात हो जाती तो इसके लिए कौन जिम्मेदार होता।
भाजपा पदाधिकारियों ने दी सफाई
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय मंत्री मनोज गुप्ता ने बताया कि अनूप अग्रवाल और सिद्धार्थ शुक्ला रुपये लेकर नेहरू नगर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय आ रहे थे। जहां से दो और कार्यकर्ता रकम के साथ कार में सवार होकर लखनऊ जाने वाले थे। स्विफ्ट कार गुड़गांव निवासी अजय मिश्रा के नाम है, जो सिद्धार्थ शुक्ला का ममेरा भाई है।
तत्काल जरूरत के चलते कैश ले जा रहे थे
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय महामंत्री अशोक मोंगा ने बताया कि लखनऊ कार्यालय में कुछ कर्मचारियों की सैलरी और निर्माण कार्य की पेमेंट के लिए रकम को भेजा जा रहा था। रकम की तत्काल जरूरत थी और बैंक के जरिए भेजे जाने में समय लगता, इस लिए कैश भेजा जा रहा था।
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बाद में पुलिस व आयकर विभाग की जांच पड़ताल के बाद रकम छोड़ दी गई, जिसे कार्यकर्ता वापस दिल्ली कार्यालय ले गए। घटना सुबह 9 बजे की है। हरियाणा नंबर की एक स्विफ्ट कार ने काला पत्थर रेड लाइट पर रुकने की बजाय जब तेजी से गाड़ी आगे बढ़ाई तो ट्रैफिक पुलिस ने शक के आधार पर मॉडल टाउन कट पर वायरलेस कर कार को रुकवा लिया।
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कार की जांच की गई तो तीन बड़े बैग मिले, जिनमें से दो में 500-500 रुपये के नोटों की गड्डियां भरी थीं जबकि एक बैग में कपड़े थे। गाड़ी में दो युवक थे, जिन्हें तुरंत हिरासत में ले लिया गया। इतनी बड़ी रकम को देखकर जांच करने वाले पुलिसकर्मियों के भी होश उड़ गए।
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उन्होंने मामले की जानकारी आला अधिकारियों को दी और गाड़ी इंदिरापुरम थाने ले गए। पूछताछ के दौरान गाड़ी में सवार युवकों ने बताया कि यह रकम भाजपा के पार्टी फंड की है। इसे दिल्ली से लखनऊ भाजपा कार्यालय ले जाया जा रहा है।
सूचना पर इनकम टैक्स के अधिकारी भी थाने पहुंच गए। पुलिस द्वारा युवकों से इतनी बड़ी रकम ले जाने के दस्तावेज मांगे गए तो उन्होंने भाजपा के केंद्रीय कार्यालय द्वारा जारी लेटर की कापी मोबाइल में वाट्स एप पर दिखाई, जिसे पुलिस ने मानने से इंकार कर दिया।
इस पर युवकों ने भाजपा नेताओं को जानकारी दी। कुछ देर बाद भाजपा के क्षेत्रीय महामंत्री अशोक मोंगा और क्षेत्रीय मंत्री मनोज गुप्ता थाना इंदिरापुरम पहुंचे और पुलिस को रकम ट्रांजिट कर ले जाने का लेटर दिखाया, जिसे भाजपा कार्यालय दिल्ली के अकाउंट हेड मनोज कुमार ने लिखा था।
लेटर में लिखा है कि उत्तर प्रदेश इकाई के कार्यकर्ता अनूप अग्रवाल के जरिए तीन करोड़ रुपये की रकम दिल्ली कार्यालय से लखनऊ कार्यालय भेजी जा रही है। उधर, भाजपा के दिल्ली से आए सीए संजीव सिंह ने थाने पहुंच गए और उन्होंने अधिकारियों को पैसों के लेनदेन की प्रविष्टियां दिखाईं।
इसके बाद बैगों में मिली रकम को गिना गया। सीए द्वारा दिखाई गई प्रविष्टियों से संतुष्ट होकर आयकर अधिकारियों ने रकम को अवमुक्त कर दिया। बातचीत के दौरान अशोक मोंगा और मनोज कुमार ने बताया कि इन्हें यह रकम लेकर पहले शहर कार्यालय आना था।
दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि कार्यकर्ताओं ने ट्रैफिक पुलिस को लेटर दिखाया था, लेकिन पुलिस ने मीडिया बुलाने की धमकी दी और रुपये छोड़ने की एवज में 10 लाख रुपये की मांग की।
इस संबंध में एएसपी आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि ट्रैफिक पुलिस के रोकने के दौरान कार्यकर्ताओं के पास रुपये से संबंधित दस्तावेज नहीं थे, जिसके बाद कैश थाने लाया गया।
करीब छह घंटे की इनकम टैक्स अधिकारियों की जांच के बाद कैश भाजपा कार्यकर्ताओं को सौंप दिया गया है। कार्यकर्ता रकम को वापस दिल्ली कार्यालय ले गए हैं। पुलिस पर रुपये मांगने संबंधी आरोपों की जांच कराई जाएगी।
वारदात हो जाती तो कौन होता जिम्मेदार
तीन करोड़ रुपये की रकम सिर्फ दो लोगों के भरोसे कार के जरिए भाजपा के दिल्ली कार्यालय से लखनऊ कार्यालय भेजी जा रही थी, जिसे पुलिस लापरवाही मान रही है।
पुलिस का कहना है कि यह बड़ी लापरवाही थी।
बृहस्पतिवार की सुबह मॉडल टाउन कट पर ब्लैक मनी पकड़े जाने की सूचना फैलते ही लोग सकते में आ गए। आसपास लोग जमा होने लगे। सूचना पर थोड़ी देर बाद भाजपा कार्यकर्ता भी वहां पहुंच गए। भाजपा के राष्ट्रीय कार्यालय की ओर से भेजी जा रही तीन करोड़ की रकम के लिए न तो कार में कोई सिक्योरिटी गार्ड था, न ही पुलिस को इसकी सूचना दी गई थी।
हाईवे पर आए दिन होने वाली लूट और डकैती की घटनाओं के बावजूद भाजपा को यह लापरवाही भारी पड़ सकती थी। दिल्ली से लखनऊ तीन करोड़ ले जा रही कार में उत्तर प्रदेश भाजपा इकाई के कार्यकर्ता और लखनऊ निवासी अनूप अग्रवाल और कार चला रहे सिद्धार्थ शुक्ला ही थे। इतनी बड़ी रकम भेजने के लिए पुलिस अधिकारियों तक को सूचित करना जरूरी नहीं समझा गया। ऐसे में अगर रास्ते में वारदात हो जाती तो इसके लिए कौन जिम्मेदार होता।
भाजपा पदाधिकारियों ने दी सफाई
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय मंत्री मनोज गुप्ता ने बताया कि अनूप अग्रवाल और सिद्धार्थ शुक्ला रुपये लेकर नेहरू नगर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय आ रहे थे। जहां से दो और कार्यकर्ता रकम के साथ कार में सवार होकर लखनऊ जाने वाले थे। स्विफ्ट कार गुड़गांव निवासी अजय मिश्रा के नाम है, जो सिद्धार्थ शुक्ला का ममेरा भाई है।
तत्काल जरूरत के चलते कैश ले जा रहे थे
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय महामंत्री अशोक मोंगा ने बताया कि लखनऊ कार्यालय में कुछ कर्मचारियों की सैलरी और निर्माण कार्य की पेमेंट के लिए रकम को भेजा जा रहा था। रकम की तत्काल जरूरत थी और बैंक के जरिए भेजे जाने में समय लगता, इस लिए कैश भेजा जा रहा था।