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Ghaziabad News: गौर ग्रीन सोसायटी में आग हादसे की हो सकती है पुलिस जांच
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इंदिरापुरम। गौर ग्रीन सोसायटी में आग हादसे की जांच अब पुलिस के पास जा सकती है। हालांकि प्रशासन, जीडीए और दमकल विभाग की संयुक्त जांच टीम की रिपोर्ट पर विचार और सहमति के बाद ही फैसला लिया जाएगा। हादसा कैसे हुआ इसकी जांच दो बिंदुओं पर आकर अटक गई है। वहीं, हादसे के दिन दमकल को देरी से सूचना देना और फायर अलार्म को लेकर भी आरडब्ल्यूए की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। संयुक्त टीम जल्द ही अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजेगी। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।
गौर ग्रीन मामले में बनी संयुक्त टीम पूरे मामले की जांच कर रही है। एक पहलू है यह है कि मितेश पालीवाल के फ्लैट से आग शुरू हुई और हो सकता है कि मंदिर के दीपक से भी लकी हो। जबकि दूसरा पहलू आग को साजिशन भी बताया जा रहा है। जांच टीम ने अंदेशा जताया है कि आग जानबूझकर किसी ने लगाई है। संयुक्त टीम जांच कर रही है और आसपास के सभी सीसीटीवी कैमरों खंगाल रही है। चूंकि यही फुटेज आग की घटना से पर्दा उठा सकती है। अब तक की जांच में कई अन्य तथ्य भी सामने आए हैं। सूत्रों का कहना है कि 29 अप्रैल की सुबह करीब 8ः30 बजे आग लगी थी। आरडब्ल्यूए ने दमकल को तुरंत सूचना नहीं दी। करीब 20 मिनट बाद किसी बाहरी व्यक्ति ने आग की सूचना दमकल विभाग को दी थी। जब दमकल टीम मौके पर पहुंच चुकी थी तो आरडब्ल्यूए ने 9वीं मंजिल के फ्लैट मालिक को भी नहीं बुलाया था। चाभी न होने की वजह से टीम को आग बुझाने में भी देरी हुई। फ्लैट में अंदर जाने के लिए दरवाजों को तोड़ना पड़ा। डबल डोर के मोटी चादर वाले दरवाजों को तोड़ने में ही 10-15 मिनट लग गए। सूत्रों के अनुसार जिस डी टावर में आग लगी वहां फायर अलार्म ऑटोमेटिक न होने की जगह मैनुअल ऑपरेटिंग वाले थे। उन्हें सक्रिय करने के लिए फ्लोर पर लगे फायर बॉक्स को खोलकर बटन दबाना पड़ता है। ऐसे में यह आशंका भी जताई जा रही है कि धुआं भरने और आग की लपटें ऊपर तक पहुंचने के बाद भी अलार्म नहीं बजा होगा। इन सभी तथ्यों के सामने आने के बाद कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
आरडब्ल्यूए ने नहीं दिए जवाब तो डीएम को जाएगी रिपोर्ट
दमकल विभाग ने आरडब्ल्यूए से सात बिंदुओं पर जवाब मांगा है। इसमें सोसायटी का नवीनीकरण कब-कब हुआ, सोसायटी में मॉक ड्रिल कब कराई गई। आरडब्ल्यूए की तरफ से कितनी बार सोसायटी में लगे अग्निशमन उपकरणों व सिस्टम की जांच कराई गई और किस कंपनी से जांच कराई। इसका पूरा ब्योरा मांगा है। साथ ही सोसायटी में कोई फायर ऑफिसर की तैनाती और स्थानीय लोगों के प्रशिक्षण की भी पूरी जानकारी मांगी है। इसके लिए उनके पास तीन दिन का समय है। मुख्य अग्निशमन अधिकारी राहुल पाल ने बताया कि अगर आरडब्ल्यूए जल्द जानकारी उपलब्ध नहीं कराएगी तो इसकी रिपोर्ट भी जिलाधिकारी को भेजी जाएगी। इसके बाद निर्देशानुसार आगे की कार्रवाई होगी।
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एडीएम वित्त सौरभ भट्ट का कहना है कि संयुक्त टीम की जांच रिपोर्ट सबमिट होने के बाद विचार-विमर्श किया जाएगा। अगर सभी विभागाें की सहमति बनी तो पुलिस जांच के लिए पत्र लिखकर कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी।
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गौर ग्रीन मामले में बनी संयुक्त टीम पूरे मामले की जांच कर रही है। एक पहलू है यह है कि मितेश पालीवाल के फ्लैट से आग शुरू हुई और हो सकता है कि मंदिर के दीपक से भी लकी हो। जबकि दूसरा पहलू आग को साजिशन भी बताया जा रहा है। जांच टीम ने अंदेशा जताया है कि आग जानबूझकर किसी ने लगाई है। संयुक्त टीम जांच कर रही है और आसपास के सभी सीसीटीवी कैमरों खंगाल रही है। चूंकि यही फुटेज आग की घटना से पर्दा उठा सकती है। अब तक की जांच में कई अन्य तथ्य भी सामने आए हैं। सूत्रों का कहना है कि 29 अप्रैल की सुबह करीब 8ः30 बजे आग लगी थी। आरडब्ल्यूए ने दमकल को तुरंत सूचना नहीं दी। करीब 20 मिनट बाद किसी बाहरी व्यक्ति ने आग की सूचना दमकल विभाग को दी थी। जब दमकल टीम मौके पर पहुंच चुकी थी तो आरडब्ल्यूए ने 9वीं मंजिल के फ्लैट मालिक को भी नहीं बुलाया था। चाभी न होने की वजह से टीम को आग बुझाने में भी देरी हुई। फ्लैट में अंदर जाने के लिए दरवाजों को तोड़ना पड़ा। डबल डोर के मोटी चादर वाले दरवाजों को तोड़ने में ही 10-15 मिनट लग गए। सूत्रों के अनुसार जिस डी टावर में आग लगी वहां फायर अलार्म ऑटोमेटिक न होने की जगह मैनुअल ऑपरेटिंग वाले थे। उन्हें सक्रिय करने के लिए फ्लोर पर लगे फायर बॉक्स को खोलकर बटन दबाना पड़ता है। ऐसे में यह आशंका भी जताई जा रही है कि धुआं भरने और आग की लपटें ऊपर तक पहुंचने के बाद भी अलार्म नहीं बजा होगा। इन सभी तथ्यों के सामने आने के बाद कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
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आरडब्ल्यूए ने नहीं दिए जवाब तो डीएम को जाएगी रिपोर्ट
दमकल विभाग ने आरडब्ल्यूए से सात बिंदुओं पर जवाब मांगा है। इसमें सोसायटी का नवीनीकरण कब-कब हुआ, सोसायटी में मॉक ड्रिल कब कराई गई। आरडब्ल्यूए की तरफ से कितनी बार सोसायटी में लगे अग्निशमन उपकरणों व सिस्टम की जांच कराई गई और किस कंपनी से जांच कराई। इसका पूरा ब्योरा मांगा है। साथ ही सोसायटी में कोई फायर ऑफिसर की तैनाती और स्थानीय लोगों के प्रशिक्षण की भी पूरी जानकारी मांगी है। इसके लिए उनके पास तीन दिन का समय है। मुख्य अग्निशमन अधिकारी राहुल पाल ने बताया कि अगर आरडब्ल्यूए जल्द जानकारी उपलब्ध नहीं कराएगी तो इसकी रिपोर्ट भी जिलाधिकारी को भेजी जाएगी। इसके बाद निर्देशानुसार आगे की कार्रवाई होगी।
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एडीएम वित्त सौरभ भट्ट का कहना है कि संयुक्त टीम की जांच रिपोर्ट सबमिट होने के बाद विचार-विमर्श किया जाएगा। अगर सभी विभागाें की सहमति बनी तो पुलिस जांच के लिए पत्र लिखकर कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी।