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Ghaziabad News: इलाज के लिए महिला को करना पड़ा पांच घंटे तक इंतजार
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गाजियाबाद।
एमएमजी अस्पताल में चिकित्सकों और स्टाफ की लापरवाही से समय पर इलाज मिलना मुश्किल हो रहा है। विजय नगर बाईपास निवासी 55 वर्षीय गिरिजा देवी को गंभीर हालत के बावजूद पांच घंटे तक भर्ती नहीं किया गया। उल्टी-दस्त के साथ खून आने की शिकायत के बाद परिजन उन्हें सुबह सात बजे अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन उन्हें दोपहर 12 बजे भर्ती किया गया।
गिरिजा देवी की बेटी दीपा ने बताया कि उनकी मां पिछले तीन दिनों से बीमार हैं। इलाज के लिए लगातार अस्पताल आ रही थीं, लेकिन डॉक्टर उन्हें भर्ती नहीं कर रहे थे। बुधवार सुबह स्थिति गंभीर हो गई तो वह उन्हें इमरजेंसी लेकर पहुंचीं। वहां डॉक्टर ने ओपीडी में दिखाने की सलाह दी। ओपीडी-34 में बैठे डॉ. आलोक रंजन ने मरीज की हालत देखकर तुरंत भर्ती करने की सलाह दी और पर्ची पर स्पष्ट रूप से लिखा भी।
इसके बाद वे इमरजेंसी पहुंचीं, लेकिन बार-बार अनुरोध के बावजूद उन्हें भर्ती नहीं किया गया। दीपा का आरोप है कि जब भी वह डॉक्टर या स्टाफ से बात करती थीं, उन्हें बाहर बैठने को कह दिया जाता था। इस बीच मरीज की हालत बिगड़ती रही, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसी दौरान अमर उजाला की टीम भी मौके पर पहुंच गई। टीम ने मरीज को भर्ती नहीं किए जाने के कारणों पर सीएमएस से बातचीत की, तब जाकर अस्पताल प्रशासन सक्रिय हुआ और करीब 12 बजे गिरिजा देवी को भर्ती किया गया।
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जांच के बाद होगी कार्रवाई
सीएमएस डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि हो सकता है उस समय इमरजेंसी में मरीजों की भीड़ अधिक रही हो, फिर भी पांच घंटे की देरी गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी। यदि स्टाफ की लापरवाही पाई गई तो संबंधित कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी।
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एमएमजी अस्पताल में चिकित्सकों और स्टाफ की लापरवाही से समय पर इलाज मिलना मुश्किल हो रहा है। विजय नगर बाईपास निवासी 55 वर्षीय गिरिजा देवी को गंभीर हालत के बावजूद पांच घंटे तक भर्ती नहीं किया गया। उल्टी-दस्त के साथ खून आने की शिकायत के बाद परिजन उन्हें सुबह सात बजे अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन उन्हें दोपहर 12 बजे भर्ती किया गया।
गिरिजा देवी की बेटी दीपा ने बताया कि उनकी मां पिछले तीन दिनों से बीमार हैं। इलाज के लिए लगातार अस्पताल आ रही थीं, लेकिन डॉक्टर उन्हें भर्ती नहीं कर रहे थे। बुधवार सुबह स्थिति गंभीर हो गई तो वह उन्हें इमरजेंसी लेकर पहुंचीं। वहां डॉक्टर ने ओपीडी में दिखाने की सलाह दी। ओपीडी-34 में बैठे डॉ. आलोक रंजन ने मरीज की हालत देखकर तुरंत भर्ती करने की सलाह दी और पर्ची पर स्पष्ट रूप से लिखा भी।
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इसके बाद वे इमरजेंसी पहुंचीं, लेकिन बार-बार अनुरोध के बावजूद उन्हें भर्ती नहीं किया गया। दीपा का आरोप है कि जब भी वह डॉक्टर या स्टाफ से बात करती थीं, उन्हें बाहर बैठने को कह दिया जाता था। इस बीच मरीज की हालत बिगड़ती रही, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसी दौरान अमर उजाला की टीम भी मौके पर पहुंच गई। टीम ने मरीज को भर्ती नहीं किए जाने के कारणों पर सीएमएस से बातचीत की, तब जाकर अस्पताल प्रशासन सक्रिय हुआ और करीब 12 बजे गिरिजा देवी को भर्ती किया गया।
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जांच के बाद होगी कार्रवाई
सीएमएस डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि हो सकता है उस समय इमरजेंसी में मरीजों की भीड़ अधिक रही हो, फिर भी पांच घंटे की देरी गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी। यदि स्टाफ की लापरवाही पाई गई तो संबंधित कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी।