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Ghaziabad News: हवा से ज्यादा व्यवस्था खराब...ग्रैप-1 की पाबंदियों पर धूल
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बुलंदशहर रोड औद्योगिक क्षेत्र में उड़ती धूल से गुजरते वाहन। संवाद
- फोटो : ARchive
गाजियाबाद। शहर की हवा खराब हुई तो ग्रैप-1 लागू कर दिया गया, लेकिन प्रदूषण रोकने की जिम्मेदारी निभाने वाली व्यवस्था पहले दिन ही जमीन पर बेअसर नजर आई। बृहस्पतिवार को बुलंदशहर रोड स्थित औद्योगिक क्षेत्र में धूल उड़ती रही, राजनगर एक्सटेंशन में खुले में कूड़ा जलता रहा और पेट्रोल पंपों पर पीयूसीसी की जांच के बिना वाहनों को ईंधन मिलता रहा। आरडीसी में रेस्टोरेंट के बाहर तंदूर भी तैयार होते दिखे। एक्यूआई 220 के पार पहुंचने के बाद बुधवार को प्रशासन ने एनजीटी के आदेश के बाद एडवाइजरी जारी की थी, लेकिन बृहस्पतिवार को भी कई जगह नियमों के पालन में लापरवाही सामने आई।
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धूल उड़ती रही, छिड़काव की सुध नहीं
ग्रैप-1 लागू होने के बाद धूल पर नियंत्रण के लिए जरूरी कदम उठाए जाने हैं। इसके बावजूद बुलंदशहर रोड औद्योगिक क्षेत्र में धूल उड़ती दिखाई दी। यहां से बाइक लेकर गुजर रहे अशोक सिंह ने बताया कि कोई भी नियम लागू हो जाए, क्षेत्र के हालात नहीं सुधरते। कई बार यहां से निकलने में सांस लेना मुश्किल हो जाता है। लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में पानी का छिड़काव तक नहीं होता। उन्होंने सवाल उठाया कि धूल नियंत्रण की जिम्मेदारी संभालने वाले विभागों की निगरानी आखिर कहां है।
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नियम लागू करने का दावा, पेट्रोल पंपों पर जानकारी तक नहीं
प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर अंकुश लगाने के लिए बिना पीयूसीसी (प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र) के ईंधन नहीं देने का नियम लागू किया गया है। इसके बावजूद पुराने बस अड्डे समेत शहर के कई पेट्रोल पंपों पर नियम के पालन की व्यवस्था नजर नहीं आई। पीयूसीसी जांच के लिए तैयार एप के काम नहीं करने से बिना जांच के ही ईंधन दिया जा रहा है। जीटी रोड पर धुआं छोड़ती बाइकें भी दिखाई दीं। एक पेट्रोल पंपकर्मी ने बताया कि नियम का पालन कैसे करना है, इसकी जानकारी ही नहीं है।
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खुले में जलता रहा कूड़ा, निगरानी नहीं
राजनगर एक्सटेंशन में अग्रवाल हाइट्स के पास खुले में कूड़ा जलाया जा रहा था। ग्रैप-1 के तहत कूड़ा जलाने वालों पर कार्रवाई की जानी है, लेकिन मौके पर निगरानी की प्रभावी व्यवस्था नजर नहीं आई। राजनगर एक्सटेंशन की केडीपी सोसायटी के एओए अध्यक्ष धर्मेंद्र चौधरी ने बताया कि रोक के बावजूद क्षेत्र में कूड़ा जलाने की घटनाएं आए दिन होती हैं। शिकायतें भी की जाती हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो रहा।
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खुले में जलते हैं तंदूर, लोग परेशान
ग्रैप-1 के तहत खुले में तंदूर जलाने पर रोक संबंधी प्रावधान लागू है। इसके बावजूद आरडीसी में कई रेस्टोरेंट के बाहर तंदूर तैयार किए जा रहे थे। निरीक्षण के दौरान वे शुरू नहीं किए गए थे, लेकिन लोगों ने बताया कि इनका इस्तेमाल बाहर ही किया जाता है। तंदूर में कोयला जलने से धुआं निकलता है और एक साथ कई तंदूर जलने पर आसपास के लोगों को परेशानी होती है।
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विभागों को निगरानी के निर्देश, फिर भी लापरवाही
प्रशासन की ओर से सभी विभागों को अपने-अपने क्षेत्रों में निगरानी रखने और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद शहर में अलग-अलग जगह प्रदूषण फैलाने वाले स्रोत सामने आ रहे हैं। इससे निगरानी और कार्रवाई की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
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खुले में रखी थी निर्माण सामग्री
सौर ऊर्जा मार्ग, साहिबाबाद व एयरफोर्स रोड पर खुले में निर्माण सामग्री रखी रही। हवा के झोंके निर्माण सामग्री को उड़ा रहे थे, जिससे हवा में जहर घुलता रहा। कई अलग-अलग जगहों पर बिल्डरों की ओर से भी निर्माण सामग्री को नहीं ढका गया था।
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राजेंद्रनगर में लगे मिट्टी के ढेर
राजेंद्र नगर सेक्टर-2 लोहिया पार्क के सामने कुछ दिन पूर्व ही सड़क खोदकर सीवर लाइन डाली गई है। यहां सड़क किनारे मिट्टी के ढेर लगे हैं। अधिकारियों ने न तो यहां से मिट्टी हटवाई न ही इसे ढका और न ही पानी का छिड़काव कराया। पास ही डीएवी स्कूल है, प्रत्येक वाहन के साथ यहां धूल का गुबार उठ रहा था।
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पत्तियों पर जमी रही धूल
वसुंधरा सेक्टर-16 की ग्रीन बेल्ट में लगे पेड़ों की पत्तियों पर धूल जमी रही। यह धूल यह बयां कर रही थी कि नगर निगम से लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कोई भी पानी छिड़काव की मशीन इस ओर से नहीं गुजरी है।
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प्रदूषण के मुख्य कारण
-टूटी सड़कों से उड़ती धूल।
-खुले में रखी निर्माण सामग्री।
-कूड़े में आग लगाना।
-वाहनों और फैक्टरियों से उठता धुआं।
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बृहस्पतिवार को जिले के सभी स्टेशनों का एक्यूआई
खोड़ा-257
गोविंदपुरम-122
इंदिरापुरम-316
लोनी-131
वसुंधरा-338
वेद विहार-125
संजयनगर-298
वेव सिटी- 219
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ग्रैप-1 की पाबंदियां लागू हैं। सभी विभागों को अपने-अपने क्षेत्र में नजर रखने के लिए कहा गया है। नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित विभागों के कार्यों पर भी नजर रखी जा रही है। लापरवाही करने वालों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
-रविंद्र मांदड़, जिलाधिकारी
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ग्रैप-1 की पाबंदियों को लागू कराने की जिम्मेदारी सभी संबंधित विभागों की है। लापरवाही पाए जाने पर जिला प्रशासन की ओर लापरवाही पर जुर्माना लगाए जाने की व्यवस्था है। हमारी टीम भी निगरानी में है, जहां से शिकायत मिलेगी कार्रवाई की जाएगी।
-अंकित सिंह, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी
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धूल उड़ती रही, छिड़काव की सुध नहीं
ग्रैप-1 लागू होने के बाद धूल पर नियंत्रण के लिए जरूरी कदम उठाए जाने हैं। इसके बावजूद बुलंदशहर रोड औद्योगिक क्षेत्र में धूल उड़ती दिखाई दी। यहां से बाइक लेकर गुजर रहे अशोक सिंह ने बताया कि कोई भी नियम लागू हो जाए, क्षेत्र के हालात नहीं सुधरते। कई बार यहां से निकलने में सांस लेना मुश्किल हो जाता है। लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में पानी का छिड़काव तक नहीं होता। उन्होंने सवाल उठाया कि धूल नियंत्रण की जिम्मेदारी संभालने वाले विभागों की निगरानी आखिर कहां है।
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नियम लागू करने का दावा, पेट्रोल पंपों पर जानकारी तक नहीं
प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर अंकुश लगाने के लिए बिना पीयूसीसी (प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र) के ईंधन नहीं देने का नियम लागू किया गया है। इसके बावजूद पुराने बस अड्डे समेत शहर के कई पेट्रोल पंपों पर नियम के पालन की व्यवस्था नजर नहीं आई। पीयूसीसी जांच के लिए तैयार एप के काम नहीं करने से बिना जांच के ही ईंधन दिया जा रहा है। जीटी रोड पर धुआं छोड़ती बाइकें भी दिखाई दीं। एक पेट्रोल पंपकर्मी ने बताया कि नियम का पालन कैसे करना है, इसकी जानकारी ही नहीं है।
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खुले में जलता रहा कूड़ा, निगरानी नहीं
राजनगर एक्सटेंशन में अग्रवाल हाइट्स के पास खुले में कूड़ा जलाया जा रहा था। ग्रैप-1 के तहत कूड़ा जलाने वालों पर कार्रवाई की जानी है, लेकिन मौके पर निगरानी की प्रभावी व्यवस्था नजर नहीं आई। राजनगर एक्सटेंशन की केडीपी सोसायटी के एओए अध्यक्ष धर्मेंद्र चौधरी ने बताया कि रोक के बावजूद क्षेत्र में कूड़ा जलाने की घटनाएं आए दिन होती हैं। शिकायतें भी की जाती हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो रहा।
खुले में जलते हैं तंदूर, लोग परेशान
ग्रैप-1 के तहत खुले में तंदूर जलाने पर रोक संबंधी प्रावधान लागू है। इसके बावजूद आरडीसी में कई रेस्टोरेंट के बाहर तंदूर तैयार किए जा रहे थे। निरीक्षण के दौरान वे शुरू नहीं किए गए थे, लेकिन लोगों ने बताया कि इनका इस्तेमाल बाहर ही किया जाता है। तंदूर में कोयला जलने से धुआं निकलता है और एक साथ कई तंदूर जलने पर आसपास के लोगों को परेशानी होती है।
विभागों को निगरानी के निर्देश, फिर भी लापरवाही
प्रशासन की ओर से सभी विभागों को अपने-अपने क्षेत्रों में निगरानी रखने और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद शहर में अलग-अलग जगह प्रदूषण फैलाने वाले स्रोत सामने आ रहे हैं। इससे निगरानी और कार्रवाई की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
खुले में रखी थी निर्माण सामग्री
सौर ऊर्जा मार्ग, साहिबाबाद व एयरफोर्स रोड पर खुले में निर्माण सामग्री रखी रही। हवा के झोंके निर्माण सामग्री को उड़ा रहे थे, जिससे हवा में जहर घुलता रहा। कई अलग-अलग जगहों पर बिल्डरों की ओर से भी निर्माण सामग्री को नहीं ढका गया था।
राजेंद्रनगर में लगे मिट्टी के ढेर
राजेंद्र नगर सेक्टर-2 लोहिया पार्क के सामने कुछ दिन पूर्व ही सड़क खोदकर सीवर लाइन डाली गई है। यहां सड़क किनारे मिट्टी के ढेर लगे हैं। अधिकारियों ने न तो यहां से मिट्टी हटवाई न ही इसे ढका और न ही पानी का छिड़काव कराया। पास ही डीएवी स्कूल है, प्रत्येक वाहन के साथ यहां धूल का गुबार उठ रहा था।
पत्तियों पर जमी रही धूल
वसुंधरा सेक्टर-16 की ग्रीन बेल्ट में लगे पेड़ों की पत्तियों पर धूल जमी रही। यह धूल यह बयां कर रही थी कि नगर निगम से लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कोई भी पानी छिड़काव की मशीन इस ओर से नहीं गुजरी है।
प्रदूषण के मुख्य कारण
-टूटी सड़कों से उड़ती धूल।
-खुले में रखी निर्माण सामग्री।
-कूड़े में आग लगाना।
-वाहनों और फैक्टरियों से उठता धुआं।
बृहस्पतिवार को जिले के सभी स्टेशनों का एक्यूआई
खोड़ा-257
गोविंदपुरम-122
इंदिरापुरम-316
लोनी-131
वसुंधरा-338
वेद विहार-125
संजयनगर-298
वेव सिटी- 219
ग्रैप-1 की पाबंदियां लागू हैं। सभी विभागों को अपने-अपने क्षेत्र में नजर रखने के लिए कहा गया है। नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित विभागों के कार्यों पर भी नजर रखी जा रही है। लापरवाही करने वालों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
-रविंद्र मांदड़, जिलाधिकारी
ग्रैप-1 की पाबंदियों को लागू कराने की जिम्मेदारी सभी संबंधित विभागों की है। लापरवाही पाए जाने पर जिला प्रशासन की ओर लापरवाही पर जुर्माना लगाए जाने की व्यवस्था है। हमारी टीम भी निगरानी में है, जहां से शिकायत मिलेगी कार्रवाई की जाएगी।
-अंकित सिंह, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी