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Ghaziabad News: 31 साल में बदल गया घर का रास्ता, बन गए कई मकान
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साहिबाबाद। 31 साल पहले राजू अपने परिवार के बीच रहता था। इकलौता बेटा होने पर परिवार के लोग भी उसे पलकों पर बैठाकर रखते थे। उस समय घर के आसपास ज्यादा घर नहीं हुआ करते थे। घर से कुछ दूरी पर सरकारी स्कूल और शिव मंदिर था। राजू 31 वर्ष बाद गाजियाबाद में अपने घर के पास शिव मंदिर और सरकारी स्कूल की कल्पना लेकर पहुंचा था। बुधवार शाम जब वह अपने घर पहुंचा तो रास्ते बदल चुके थे मंदिर अभी भी है लेकिन आस-पास ऊंचे मकान बन चुके हैं, इनके बीच वह अपना घर नहीं पहचान सका।
31 वर्ष बाद अपने परिवार से मिला राजू काफी खुश है और घर और आस-पास की चमक-धमक देखकर हैरत में है। उसने बताया कि वह जब खोड़ा थाने पहुंचा तो उसने पुलिस को अपने घर के पास मंदिर और सरकारी स्कूल होने की बात कही। इस पर पुलिस उसे खोड़ा के कई मंदिर लेकर पहुंचे लेकिन राजू की स्मृति में जो मंदिर था वह खोड़ा में नहीं मिला। वहां के लोगों ने भी उसे नहीं पहचाना। इस दौरान राजू से करीब 20 अलग-अलग परिवार मिलने के लिए आए। यह वह परिवार थे जिनके अपने गायब थे। सभी परिवार वालों ने राजू को पहचाने से इन्कार कर दिया था। राजू ने बताया कि रोजाना 4 से 5 परिवार उससे मिलने आते थे। राजू जब घर पहुंचा तो उसके घर का आंगन और रास्ते बदल चुके थे। जो स्थान पहले खाली हुआ करता था अब वहां कई मकान बन गए हैं। राजू ने कहा कि वह अभी विश्वास ही नहीं कर पा रहे कि यातना और जिल्लत भरी जिंदगी से वह बाहर निकल चुके हैं। उन्होंने बताया कि मुझे बस ईश्वर पर विश्वास था लेकिन मुझे कुछ भी समझ नहीं आता था कि वहां से कैसे और कब बाहर निकलूंगा। राजू ने कहा कि खोड़ा की पुलिस उसके लिए देवदूत बन, जिन्होंने उसे परिवार से मिलाने के लिए मशक्कत की। वह कहते हैं कि वह अकेले शायद अपना घर नहीं ढूंढ़ पाते क्योंकि इतने वर्षों में सब कुछ बदल चुका है।
परिवार रखता था पलकों पर बैठाकर, राजू ने राजस्थान में झेली यातनाएं
राजू को परिवार के सभी सदस्य बहुत प्यार करते थे। तीनों बहनों उसका ध्यान रखती थीं। परिवार के सभी लोग राजू को अपनी पलकों पर बैठाकर रखते थे। लेकिन उन्हें नहीं पता था कि राजू को 31 साल बनवास काटना पड़ेगा। राजू ने राजस्थान में बकरियां चराईं। वह कई किलोमीटर दूर बकरियों को लेकर जाता था। राजू के साथ उसके मालिक के तीन साथी भी रहते थे। जो हमेशा राजू पर नजर बनाए रखे थे। राजू ने बताया कि वह अकेला झोपड़ी में जंजीर से बंधा हुआ रहकर बस अपनी बचपन की स्मृतियों को याद कर रोता रहता था।
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31 वर्ष बाद अपने परिवार से मिला राजू काफी खुश है और घर और आस-पास की चमक-धमक देखकर हैरत में है। उसने बताया कि वह जब खोड़ा थाने पहुंचा तो उसने पुलिस को अपने घर के पास मंदिर और सरकारी स्कूल होने की बात कही। इस पर पुलिस उसे खोड़ा के कई मंदिर लेकर पहुंचे लेकिन राजू की स्मृति में जो मंदिर था वह खोड़ा में नहीं मिला। वहां के लोगों ने भी उसे नहीं पहचाना। इस दौरान राजू से करीब 20 अलग-अलग परिवार मिलने के लिए आए। यह वह परिवार थे जिनके अपने गायब थे। सभी परिवार वालों ने राजू को पहचाने से इन्कार कर दिया था। राजू ने बताया कि रोजाना 4 से 5 परिवार उससे मिलने आते थे। राजू जब घर पहुंचा तो उसके घर का आंगन और रास्ते बदल चुके थे। जो स्थान पहले खाली हुआ करता था अब वहां कई मकान बन गए हैं। राजू ने कहा कि वह अभी विश्वास ही नहीं कर पा रहे कि यातना और जिल्लत भरी जिंदगी से वह बाहर निकल चुके हैं। उन्होंने बताया कि मुझे बस ईश्वर पर विश्वास था लेकिन मुझे कुछ भी समझ नहीं आता था कि वहां से कैसे और कब बाहर निकलूंगा। राजू ने कहा कि खोड़ा की पुलिस उसके लिए देवदूत बन, जिन्होंने उसे परिवार से मिलाने के लिए मशक्कत की। वह कहते हैं कि वह अकेले शायद अपना घर नहीं ढूंढ़ पाते क्योंकि इतने वर्षों में सब कुछ बदल चुका है।
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परिवार रखता था पलकों पर बैठाकर, राजू ने राजस्थान में झेली यातनाएं
राजू को परिवार के सभी सदस्य बहुत प्यार करते थे। तीनों बहनों उसका ध्यान रखती थीं। परिवार के सभी लोग राजू को अपनी पलकों पर बैठाकर रखते थे। लेकिन उन्हें नहीं पता था कि राजू को 31 साल बनवास काटना पड़ेगा। राजू ने राजस्थान में बकरियां चराईं। वह कई किलोमीटर दूर बकरियों को लेकर जाता था। राजू के साथ उसके मालिक के तीन साथी भी रहते थे। जो हमेशा राजू पर नजर बनाए रखे थे। राजू ने बताया कि वह अकेला झोपड़ी में जंजीर से बंधा हुआ रहकर बस अपनी बचपन की स्मृतियों को याद कर रोता रहता था।
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