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Ghaziabad News: तेरहवीं के अगले दिन जिंदा घर लौटा गिरधर तो दंग रह गए परिजन
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गिरधर सिंह बिष्ट के लौटने के बाद घर के बाहर लगी लोगों की भीड़, व मौजूद पुलिस फोर्स। अमर उजाला
कौशांबी। मसूरी की नाहल झाल में 12 जून को मिले शव को वैशाली सेक्टर-पांच निवासी गिरधर सिंह बिष्ट का बताकर परिजनों ने अंतिम संस्कार कर दिया। वही, गिरधर बिष्ट तेरहवीं के अगले ही दिन 25 जून को अपनी सोसायटी में जीवित पहुंचे तो अफरा-तफरी मच गई। सूचना पर पहुंची पुलिस के पूछने पर उन्होंने बताया कि वह 13 दिन तक पंजाब के डेरा सच्चा सौदा आश्रम में रहा। उधर, गिरधर की हत्या के आरोप में जिन सात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई है उन्होंने उसके परिवार पर साजिशन झूठा मामला दर्ज कराने का आरोप लगाया है। हालांकि गिरधर के जीवित होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर जिस शव का अंतिम संस्कार किया वह किसका था?
दरअसल, गिरधर सिंह बिष्ट दिल्ली के आनंद विहार से ऑटो रिक्शा बुक करके बृहस्पतिवार सुबह 8:45 बजे अपने घर पहुंचे। जब सोसायटी पहुंचे तो गिरधर को देखते ही लोग दंग रह गए। एक दिन पहले जिस व्यक्ति की तेरहवीं के संस्कार में वे लोग शामिल हुए और 24 घंटे बाद उसे ही अपनी आंखों के सामने खड़ा देख सभी के होश उड़ गए। लोगों से बचते हुए गिरधर जैसे ही अपने घर में दाखिल हुए तो स्वयं के फोटो पर पुष्पमाला देखकर जोर से चिल्लाए और कहा कि मैं मरा नहीं हूं..अभी जिंदा हूं और घर भी आ गया हूं।
स्थानीय लोगों की सूचना पर कौशांबी पुलिस भी मौके पर पहुंची और गिरधर की मां और बहन घर से बाहर चली गईं। गिरधर ने भी दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। काफी देर समझाने के बाद गिरधर मीडिया से बातचीत के लिए बाहर निकले। उन्होंने बताया कि 21 मई को डासना जेल से बाहर निकलने के बाद वह लोगों से रुपये मांगकर पंजाब पहुंचे और वहां डेरा सच्चा सौदा के सत्संग में ध्यान लगाया। 13 दिन बिताने के बाद वह घर लौट आए। वहीं, पुलिसकर्मियों से कहा कि वह इंटेलिजेंस में हैं और उन्हें परेशान न किया जाए। सोसायटी गेट पर तैनात गार्ड जय किशन ने बताया कि पहले उन्हें गिरधर के लौटने का यकीन नहीं हुआ, लेकिन जब वह चिल्लाए तो शोर सुनकर फ्लैट के पास पहुंचे तब बालकनी में उनको खड़ा देखने के बाद ही विश्वास हुआ।
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यह था मामला
17 मई को मारपीट के मामले में कौशांबी पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर गिरधर सिंह बिष्ट को गिरफ्तार किया और अदालत ने उसे जेल भेज दिया था। 21 मई को एसीपी शालीमार गार्डन की कोर्ट से रिहाई का परवाना भेजने के बाद गिरधर जेल से रिहा हो गए, लेकिन घर नहीं लौटे। परिजन ने मसूरी थाने में उनकी गुमशुदगी दर्ज कराई थी। 12 जून को मसूरी नाहल झाल में एक अज्ञात शव पुलिस को मिला। शिनाख्त के लिए गिरधर की मां देवकी देवी और बहन आशा को बुलाया गया। दोनों ने शरीर की चोट और एक जैसे दिखने वाले कपड़ों से पहचान का दावा किया। इसके बाद पुलिस ने शव मां-बेटी को सौंप दिया। परिजन ने उनकी हत्या का आरोप लगाते हुए सात लोगों पर प्राथमिकी दर्ज कराई और डॉक्टर के पैनल से दोबारा पोस्टमार्टम भी कराया। थाने पर हंगामा भी काटा और कड़ी कार्रवाई की मांग रखी। इसके बाद परिवार वालों ने शव का दाहसंस्कार भी करा दिया।
महिला पर फेंका था खौलता पानी, व्यापारी के सिर में मारी थी हथौड़ी
सोसायटी निवासी नैना ने बताया कि उनके पति रामकुमार के दोनों हाथ खराब हैं। वह सोसायटी के बाहर ही अंडे की ठेली लगाकर परिवार का पालन करती हैं। 13 मई को गिरधर अंडे की ठेली पर पहुंचा और उसने अचानक खौलता हुआ पानी उनके ऊपर डाल दिया। वह बुरी तरह झुलस गईंं और खुद को बचाने के लिए सोसायटी के बाहर ही संचालित ऑटोमोबाइल की दुकान पर पहुंची। वहां पर शैलेष, सुनील और धर्मेंद्र आदि ने उन्हें बचाया। इसके बाद से गिरधर रंजिश मानने लगा और 14 जून को गिरधर ने दुकान पर पहुंचकर शैलेष के सिर में हथौड़ी मार दी। उनके सिर में सात टांके आए और कौशांबी पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर गिरधर को जेल भेज दिया था। वहीं, सोसायटी निवासी रविंद्र त्यागी ने बताया कि करीब सात वर्ष पहले एक रात गिरधर अपनी मां और बहनों से मारपीट कर रहे थे। चीख पुकार सुनकर वह सोसायटी के ही कुछ लोगों के साथ उनके फ्लैट पर गए और उनकी मां-बहनों को उनसे बचाया था। जिसके बाद से गिरधर उनसे भी रंजिश रखने लगा था।
हत्या का झूठा आरोप लगाने पर होगी कार्रवाई
मसूरी पुलिस के अनुसार 12 जून को शव मिलने के बाद परिवार को शिनाख्त के लिए बुलाया गया था। उस समय शव का चेहरा फूलने की वजह से पहचान में नहीं आ रहा था। परिजन ने कपड़े और पुरानी चोट के निशान का हवाला देते हुए शिनाख्त कर दी। पुलिस ने कई बार टोका भी, लेकिन परिजन लगातार शव काे गिरधर का ही बताते रहे। मसूरी पुलिस का कहना है कि शव की फर्जी पहचान और हत्या का झूठा मुकदमा दर्ज कराने के आरोप में भी कार्रवाई की जाएगी।
तीन आरोपी लापता, भागने की आशंका
गिरधर की हत्या के आरोप में उनकी मां ने सोसायटी के पास ऑटोमोबाइल की दुकान संचालित करने वाले शैलेश, सुनील, धर्मेंद्र, सोसायटी निवासी रविंद्र त्यागी, सीआईएसएफ जवान, अंडा बिक्री करने वाली महिला के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। शैलेष के भाई बबलू का आरोप है कि प्राथमिकी दर्ज होने वाली रात से ही उनके तीनों भाई लापता हैं। वहीं, कौशांबी और मसूरी पुलिस ने तीनों की गिरफ्तारी या हिरासत में लेने की बात से इंकार किया है। उन्होंने अंदेशा जताया कि गिरफ्तारी के डर से तीनों भाग गए हैं।
यह उठ रहे सवाल
1- जिस शव को गिरधर का बताया वह असल में किसका था
2- परिजनों ने किस आधार पर शव की शिनाख्त की थी
3- हत्या के दर्ज मामले में पुलिस अब आगे क्या करेगी
4- भविष्य में अगर मृत व्यक्ति के परिजन आते हैं तो पुलिस क्या करेगी
डीसीपी ग्रामीण सुरेंद्रनाथ तिवारी का कहना है कि गिरधर के घर लौटने की जानकारी मिली तो टीम ने वहां जाकर पूछताछ की है। हत्या के मामले को खत्म कर दिया जाएगा। यदि जांच में साजिशन मामला दर्ज कराने की पुष्टि होती है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा जिस शव का दाह संस्कार किया गया है उसकी शिनाख्त के लिए दोबारा से प्रयास शुरू किया जा रहा है।
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दरअसल, गिरधर सिंह बिष्ट दिल्ली के आनंद विहार से ऑटो रिक्शा बुक करके बृहस्पतिवार सुबह 8:45 बजे अपने घर पहुंचे। जब सोसायटी पहुंचे तो गिरधर को देखते ही लोग दंग रह गए। एक दिन पहले जिस व्यक्ति की तेरहवीं के संस्कार में वे लोग शामिल हुए और 24 घंटे बाद उसे ही अपनी आंखों के सामने खड़ा देख सभी के होश उड़ गए। लोगों से बचते हुए गिरधर जैसे ही अपने घर में दाखिल हुए तो स्वयं के फोटो पर पुष्पमाला देखकर जोर से चिल्लाए और कहा कि मैं मरा नहीं हूं..अभी जिंदा हूं और घर भी आ गया हूं।
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स्थानीय लोगों की सूचना पर कौशांबी पुलिस भी मौके पर पहुंची और गिरधर की मां और बहन घर से बाहर चली गईं। गिरधर ने भी दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। काफी देर समझाने के बाद गिरधर मीडिया से बातचीत के लिए बाहर निकले। उन्होंने बताया कि 21 मई को डासना जेल से बाहर निकलने के बाद वह लोगों से रुपये मांगकर पंजाब पहुंचे और वहां डेरा सच्चा सौदा के सत्संग में ध्यान लगाया। 13 दिन बिताने के बाद वह घर लौट आए। वहीं, पुलिसकर्मियों से कहा कि वह इंटेलिजेंस में हैं और उन्हें परेशान न किया जाए। सोसायटी गेट पर तैनात गार्ड जय किशन ने बताया कि पहले उन्हें गिरधर के लौटने का यकीन नहीं हुआ, लेकिन जब वह चिल्लाए तो शोर सुनकर फ्लैट के पास पहुंचे तब बालकनी में उनको खड़ा देखने के बाद ही विश्वास हुआ।
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यह था मामला
17 मई को मारपीट के मामले में कौशांबी पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर गिरधर सिंह बिष्ट को गिरफ्तार किया और अदालत ने उसे जेल भेज दिया था। 21 मई को एसीपी शालीमार गार्डन की कोर्ट से रिहाई का परवाना भेजने के बाद गिरधर जेल से रिहा हो गए, लेकिन घर नहीं लौटे। परिजन ने मसूरी थाने में उनकी गुमशुदगी दर्ज कराई थी। 12 जून को मसूरी नाहल झाल में एक अज्ञात शव पुलिस को मिला। शिनाख्त के लिए गिरधर की मां देवकी देवी और बहन आशा को बुलाया गया। दोनों ने शरीर की चोट और एक जैसे दिखने वाले कपड़ों से पहचान का दावा किया। इसके बाद पुलिस ने शव मां-बेटी को सौंप दिया। परिजन ने उनकी हत्या का आरोप लगाते हुए सात लोगों पर प्राथमिकी दर्ज कराई और डॉक्टर के पैनल से दोबारा पोस्टमार्टम भी कराया। थाने पर हंगामा भी काटा और कड़ी कार्रवाई की मांग रखी। इसके बाद परिवार वालों ने शव का दाहसंस्कार भी करा दिया।
महिला पर फेंका था खौलता पानी, व्यापारी के सिर में मारी थी हथौड़ी
सोसायटी निवासी नैना ने बताया कि उनके पति रामकुमार के दोनों हाथ खराब हैं। वह सोसायटी के बाहर ही अंडे की ठेली लगाकर परिवार का पालन करती हैं। 13 मई को गिरधर अंडे की ठेली पर पहुंचा और उसने अचानक खौलता हुआ पानी उनके ऊपर डाल दिया। वह बुरी तरह झुलस गईंं और खुद को बचाने के लिए सोसायटी के बाहर ही संचालित ऑटोमोबाइल की दुकान पर पहुंची। वहां पर शैलेष, सुनील और धर्मेंद्र आदि ने उन्हें बचाया। इसके बाद से गिरधर रंजिश मानने लगा और 14 जून को गिरधर ने दुकान पर पहुंचकर शैलेष के सिर में हथौड़ी मार दी। उनके सिर में सात टांके आए और कौशांबी पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर गिरधर को जेल भेज दिया था। वहीं, सोसायटी निवासी रविंद्र त्यागी ने बताया कि करीब सात वर्ष पहले एक रात गिरधर अपनी मां और बहनों से मारपीट कर रहे थे। चीख पुकार सुनकर वह सोसायटी के ही कुछ लोगों के साथ उनके फ्लैट पर गए और उनकी मां-बहनों को उनसे बचाया था। जिसके बाद से गिरधर उनसे भी रंजिश रखने लगा था।
हत्या का झूठा आरोप लगाने पर होगी कार्रवाई
मसूरी पुलिस के अनुसार 12 जून को शव मिलने के बाद परिवार को शिनाख्त के लिए बुलाया गया था। उस समय शव का चेहरा फूलने की वजह से पहचान में नहीं आ रहा था। परिजन ने कपड़े और पुरानी चोट के निशान का हवाला देते हुए शिनाख्त कर दी। पुलिस ने कई बार टोका भी, लेकिन परिजन लगातार शव काे गिरधर का ही बताते रहे। मसूरी पुलिस का कहना है कि शव की फर्जी पहचान और हत्या का झूठा मुकदमा दर्ज कराने के आरोप में भी कार्रवाई की जाएगी।
तीन आरोपी लापता, भागने की आशंका
गिरधर की हत्या के आरोप में उनकी मां ने सोसायटी के पास ऑटोमोबाइल की दुकान संचालित करने वाले शैलेश, सुनील, धर्मेंद्र, सोसायटी निवासी रविंद्र त्यागी, सीआईएसएफ जवान, अंडा बिक्री करने वाली महिला के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। शैलेष के भाई बबलू का आरोप है कि प्राथमिकी दर्ज होने वाली रात से ही उनके तीनों भाई लापता हैं। वहीं, कौशांबी और मसूरी पुलिस ने तीनों की गिरफ्तारी या हिरासत में लेने की बात से इंकार किया है। उन्होंने अंदेशा जताया कि गिरफ्तारी के डर से तीनों भाग गए हैं।
यह उठ रहे सवाल
1- जिस शव को गिरधर का बताया वह असल में किसका था
2- परिजनों ने किस आधार पर शव की शिनाख्त की थी
3- हत्या के दर्ज मामले में पुलिस अब आगे क्या करेगी
4- भविष्य में अगर मृत व्यक्ति के परिजन आते हैं तो पुलिस क्या करेगी
डीसीपी ग्रामीण सुरेंद्रनाथ तिवारी का कहना है कि गिरधर के घर लौटने की जानकारी मिली तो टीम ने वहां जाकर पूछताछ की है। हत्या के मामले को खत्म कर दिया जाएगा। यदि जांच में साजिशन मामला दर्ज कराने की पुष्टि होती है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा जिस शव का दाह संस्कार किया गया है उसकी शिनाख्त के लिए दोबारा से प्रयास शुरू किया जा रहा है।

गिरधर सिंह बिष्ट के लौटने के बाद घर के बाहर लगी लोगों की भीड़, व मौजूद पुलिस फोर्स। अमर उजाला

गिरधर सिंह बिष्ट के लौटने के बाद घर के बाहर लगी लोगों की भीड़, व मौजूद पुलिस फोर्स। अमर उजाला