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Ghaziabad News: अधिकारी बनने का सपना रहा अधूरा, एक माह की नौकरी भी नहीं हो पाई पूरी
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साहिबाबाद (गाजियाबाद)। टीलामोड़ के पसौंडा निवासी सिपाही रितिक की नौकरी का एक माह भी पूरा नहीं कर पाए और सड़क हादसे में उनकी जान चली गई। अप्रैल माह में पासिंग आउट परेड होने के बाद उन्हें फिरोजाबाद के शिकोहाबाद में पहली तैनाती मिली थी। मौत के बाद से परिवार पूरी तरह टूट गया है। वह परिवार में सबसे छोटे और इकलौते सरकारी कर्मचारी थे। 23 मई की शाम करहैड़ा स्थित श्मशान घाट पर परिजनों ने अंतिम संस्कार किया।
पसौंडा निवासी महेश ने बताया कि रितिक बचपन से ही पुलिस विभाग में अधिकारी बनने का सपना देखते थे। वर्ष 2025 में उन्होंने पुलिस भर्ती परीक्षा पास की तो उन्होंने कहा कि यह पहली सीढ़ी है। रितिक दो भाई और एक बहन में सबसे छोटे थे। अप्रैल 2026 में ही उनकी पासिंग आउट परेड के बाद पहली तैनाती शिकोहाबाद थाने में मिली थी। परिवार बेहद खुश था और हर रोज रितिक अपने माता-पिता से फोन पर बातचीत करके कहते थे कि यह उनका पहला कदम है। उन्हें पुलिस अधिकारी बनना है। इसके बाद ही शादी करुंगा। महेश ने बताया कि वह खुद और उनका बड़ा बेटा आकाश दोनों मजदूरी करके परिवार का लालन-पालन करते हैं। रितिक के सिपाही बनने के बाद बेहतर भविष्य की उम्मीद जगी थी। शुक्रवार रात उन्हें हादसे की सूचना मिली तो वह शिकोहाबाद के लिए रवाना हुए, लेकिन जब तक वह पहुंचे तब तक बेटे की मौत हो चुकी थी। इसके बाद से परिवार में कोहराम मच गया। शनिवार शाम जब रितिक का शव घर पहुंचा तो मां अपने बेटे से लिपटकर विलाप करने लगी। पड़ोसियों की आखें भी नम थी तो पिता और भाई खामोश थे।
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पसौंडा निवासी महेश ने बताया कि रितिक बचपन से ही पुलिस विभाग में अधिकारी बनने का सपना देखते थे। वर्ष 2025 में उन्होंने पुलिस भर्ती परीक्षा पास की तो उन्होंने कहा कि यह पहली सीढ़ी है। रितिक दो भाई और एक बहन में सबसे छोटे थे। अप्रैल 2026 में ही उनकी पासिंग आउट परेड के बाद पहली तैनाती शिकोहाबाद थाने में मिली थी। परिवार बेहद खुश था और हर रोज रितिक अपने माता-पिता से फोन पर बातचीत करके कहते थे कि यह उनका पहला कदम है। उन्हें पुलिस अधिकारी बनना है। इसके बाद ही शादी करुंगा। महेश ने बताया कि वह खुद और उनका बड़ा बेटा आकाश दोनों मजदूरी करके परिवार का लालन-पालन करते हैं। रितिक के सिपाही बनने के बाद बेहतर भविष्य की उम्मीद जगी थी। शुक्रवार रात उन्हें हादसे की सूचना मिली तो वह शिकोहाबाद के लिए रवाना हुए, लेकिन जब तक वह पहुंचे तब तक बेटे की मौत हो चुकी थी। इसके बाद से परिवार में कोहराम मच गया। शनिवार शाम जब रितिक का शव घर पहुंचा तो मां अपने बेटे से लिपटकर विलाप करने लगी। पड़ोसियों की आखें भी नम थी तो पिता और भाई खामोश थे।
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