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Ghaziabad News: सीटी स्कैन कराने पहुंची युवती को डॉक्टर ने कर दिया एम्स रेफर
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गाजियाबाद। एमएमजी अस्पताल में सीटी स्कैन कराने पहुंची युवती को नाक कान गला रोग विशेषज्ञ ने एम्स रेफर कर दिया। युवती को सरकारी अस्पताल में जांच की सलाह देने वाले प्राइवेट ईएनटी सर्जन डॉ. बीपी त्यागी को एमएमजी अस्पताल के ईएनटी सर्जन डॉ. राकेश द्वारा अपशब्द बोलने का भी आरोप लगाया है। डॉ. त्यागी ने मामले की शिकायत सीएमओ डॉ. भवतोष शंखधार से की है। सीएमओ का कहना है कि मामले की जांच के लिए सीएमएस को निर्देश दिया गया है।
पंचवटी निवासी रोशनी (18) के कान में दर्द और सूजन के अलावा बाहरी हिस्से में ट्यूमर हो गया है। ऊपरी त्वचा काली पड़ने लगी है। परिजन रोशनी को आरडीसी में वरिष्ठ ईएनटी सर्जन डॉ. बीपी त्यागी के पास ले गए। डॉ. त्यागी ने बताया कि ऑपरेशन कर कान का ट्यूमर हटाना पड़ेगा। इससे पहले सीटी स्कैन कराना होगा, उन्होंने रोशनी को एमएमजी अस्पताल में जांच कराने की सलाह दी।रोशनी ने बताया कि पर्ची बनवाने के बाद एमएमजी अस्पताल में कार्यरत नाक, कान गला रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश कुमार को दिखाया। आरोप है कि डॉ. राकेश ने डॉ. त्यागी का पर्चा देखकर उपचार और सीटी स्कैन कराने से इन्कार कर दिया। डॉ. राकेश ने बिना किसी जांच के ही एम्स रेफर कर दिया। युवती का यह भी आरोप है कि डॉ. राकेश ने डॉ. त्यागी बारे में भी अपशब्द कहे। रोशनी के परिजन बिना सीटी स्कैन करवाए वापस डॉ. त्यागी के पास पहुंचे और पूरी बात बताई। उन्होंने राष्ट्रीय जनसत्ता दल की ओर से सीएमओ को शिकायती पत्र भेजकर कार्रवाई करने की मांग की है।
डॉ. राकेश कुमार का कहना है कि प्राइवेट डॉक्टर के पर्चे पर सीटी स्कैन जांच नहीं लिखा जा सकता सकते हैं। मरीज का एमएमजी अस्पताल में ऑपरेशन नहीं हो सकता था, इसलिए उसे एम्स रेफर किया था। किसी को कोई अपशब्द नहीं कहा है।
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सीएमएस डॉ. मनोज चतुर्वेदी का कहना है कि मरीज का उपचार अस्पताल में संभव नहीं था, इसलिए उसे एम्स रेफर किया गया। मरीज से दुर्व्यवहार और निजी डॉक्टर के लिए अपशब्द कहने के मामले की जांच की जाएगी।
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पंचवटी निवासी रोशनी (18) के कान में दर्द और सूजन के अलावा बाहरी हिस्से में ट्यूमर हो गया है। ऊपरी त्वचा काली पड़ने लगी है। परिजन रोशनी को आरडीसी में वरिष्ठ ईएनटी सर्जन डॉ. बीपी त्यागी के पास ले गए। डॉ. त्यागी ने बताया कि ऑपरेशन कर कान का ट्यूमर हटाना पड़ेगा। इससे पहले सीटी स्कैन कराना होगा, उन्होंने रोशनी को एमएमजी अस्पताल में जांच कराने की सलाह दी।रोशनी ने बताया कि पर्ची बनवाने के बाद एमएमजी अस्पताल में कार्यरत नाक, कान गला रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश कुमार को दिखाया। आरोप है कि डॉ. राकेश ने डॉ. त्यागी का पर्चा देखकर उपचार और सीटी स्कैन कराने से इन्कार कर दिया। डॉ. राकेश ने बिना किसी जांच के ही एम्स रेफर कर दिया। युवती का यह भी आरोप है कि डॉ. राकेश ने डॉ. त्यागी बारे में भी अपशब्द कहे। रोशनी के परिजन बिना सीटी स्कैन करवाए वापस डॉ. त्यागी के पास पहुंचे और पूरी बात बताई। उन्होंने राष्ट्रीय जनसत्ता दल की ओर से सीएमओ को शिकायती पत्र भेजकर कार्रवाई करने की मांग की है।
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डॉ. राकेश कुमार का कहना है कि प्राइवेट डॉक्टर के पर्चे पर सीटी स्कैन जांच नहीं लिखा जा सकता सकते हैं। मरीज का एमएमजी अस्पताल में ऑपरेशन नहीं हो सकता था, इसलिए उसे एम्स रेफर किया था। किसी को कोई अपशब्द नहीं कहा है।
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सीएमएस डॉ. मनोज चतुर्वेदी का कहना है कि मरीज का उपचार अस्पताल में संभव नहीं था, इसलिए उसे एम्स रेफर किया गया। मरीज से दुर्व्यवहार और निजी डॉक्टर के लिए अपशब्द कहने के मामले की जांच की जाएगी।