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Ghaziabad News: गौर ग्रीन एवेन्यू में आग लगने का वास्तविक कारण नहीं चला पता, तकनीकी एजेंसियों से जांच कराने की संस्तुति

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 13 May 2026 02:07 AM IST
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The actual cause of the fire at Gaur Green Avenue remains unknown, and a technical investigation is recommended.
गाजियाबाद। इंदिरापुरम स्थित गौर ग्रीन एवेन्यू में फायर सेफ्टी सिस्टम का रखरखाव संतोषजनक नहीं था और फायर अलार्म भी काम नहीं कर रहा था। इसके अलावा स्वीकृत मानचित्र के विपरीत निर्माण किए गए थे। इससे 29 अप्रैल को लगी भीषण आग के दौरान दमकल वाहनों की आवाजाही बाधित हुई और राहत व बचाव कार्य प्रभावित हुआ।
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ये तथ्य जिलाधिकारी की ओर से गठित उच्चस्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट में सामने आए हैं। रिपोर्ट में आग लगने के वास्तविक कारण का स्पष्ट पता नहीं चल सका है। ऐसे में तकनीकी एजेंसियों से विस्तृत जांच की संस्तुति की गई है।
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घटना की जांच के लिए जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ ने उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की थी। इसमें जीडीए सचिव, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व, मुख्य अग्निशमन अधिकारी और विद्युत सुरक्षा के सहायक निदेशक शामिल थे। समिति ने घटनास्थल के निरीक्षण, सीसीटीवी फुटेज की जांच, निवासियों और आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों से बातचीत के बाद मंगलवार को जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी।
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रिपोर्ट के अनुसार, विद्युत सुरक्षा विभाग की जांच में फ्लैट संख्या डी-943 में विद्युत आपूर्ति व एमसीबी सामान्य पाई गई। वहीं, मुख्य अग्निशमन अधिकारी की रिपोर्ट में सोसायटी की ओर से फायर सेफ्टी स्टाफ और रखरखाव से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाने की बात सामने आई है।

जांच समिति के प्रमुख सुझाव
-सभी भवनों में मानचित्र के विपरीत निर्माण और अतिक्रमण हटाए जाएं
-फायर ड्राइव-वे और खुले क्षेत्रों को पूरी तरह अवरोधमुक्त रखा जाए
-फायर सेफ्टी सिस्टम का नियमित निरीक्षण और रखरखाव सुनिश्चित किया जाए
-प्रत्येक परिसर में प्रशिक्षित फायर सेफ्टी स्टाफ की तैनाती हो
-फायर उपकरणों की नियमित मॉक ड्रिल कराई जाए
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डीएम की सख्त चेतावनी

जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ ने कहा कि यदि किसी भी सोसायटी में स्वीकृत मानचित्र के विपरीत अतिक्रमण पाया गया तो संबंधित के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि हैंडओवर न होने की स्थिति में जिम्मेदारी बिल्डर की होगी, जबकि हैंडओवर हो चुकी सोसायटी में आरडब्ल्यूए या एओए जिम्मेदार होगी।
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