{"_id":"58af0a094f1c1b701cb23ff1","slug":"tension-on-the-budget-could-get-stuck-in-the-gda-metro-project","type":"story","status":"publish","title_hn":"बजट पर टेंशन में जीडीए अटक सकता है मेट्रो प्रोजेक्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बजट पर टेंशन में जीडीए अटक सकता है मेट्रो प्रोजेक्ट
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Thu, 23 Feb 2017 11:48 PM IST
विज्ञापन
metro track
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गाजियाबाद। जीडीए इन दिनों वित्तीय संकट से गुजर रहा है। जहां एक ओर खर्च कम करने के लिए जीडीए वीसी ने अधीनस्थ अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं, वहीं मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए भी धन का संकट निकट भविष्य में खड़ा हो सकता है।
विज्ञापन
2210 करोड़ रुपये की लागत वाले मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए जीडीए 540 करोड़ रुपये दे चुका है। वहीं, एक पखवाड़े में 50 करोड़ रुपये और देने हैं। दिलशाद गार्डन से नया बस अड्डा मेट्रो प्रोजेक्ट के पूरा होने का शहरवासी लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं। विभागीय सूत्रों के मुताबिक अब तक प्रोजेक्ट का 40 प्रतिशत काम ही पूरा हो सका है।
विज्ञापन
डीएमआरसी ने पिलर खड़े कर दिए हैं। बाकी काम चल रहा है। जीडीए जितना पैसे देता है, डीएमआरसी उतना ही काम करती है। पूर्व में इस प्रोजेक्ट की लागत 1704 करोड़ रुपये थी जो बाद में बढ़कर 2210 करोड़ रुपये हो गई।
विज्ञापन
इसमें से जीडीए की हिस्सेदारी सबसे अधिक 1400 करोड़ रुपये है जबकि नगर निगम, आवास विकास परिषद और यूपीएसआईडीसी का अलग से अंशदान है। इन विभागों की भी वित्तीय स्थिति भी ज्यादा अच्छी नहीं है।
जीडीए की माली हालत ज्यादा अच्छी नहीं है। जीडीए के सभी आवासीय प्रोजेक्ट भी अटके हुए हैं। अपनी प्रापर्टी की नीलामी से भी जीडीए को मनमाफिक उपलब्धि हासिल नहीं हो पा रही है। नोटबंदी के बाद से बकाएदार का सहारा भी टूटने लगा है।
ऐसे में जीडीए में फंड की कमी होना लाजिमी है। विगत दिनों जीडीए वीसी विजय कुमार यादव ने एक पत्र जारी किया था जिसमें अधिकारियों को कमरे की साज-सज्जा, जलपान, डीजल की मदों में कटौती करने का निर्देश दिया था। यदि एक तरफ जीडीए इन छोटी मदों में कटौती कर रहा है तो मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए बाकी धनराशि कहां से आएगी इसका जवाब अधिकारी टालमटोल करके दे रहे हैं।
क्या कहते हैं वित्त नियंत्रक
जीडीए के वित्त नियंत्रक सीआर यादव ने बताया कि प्रोजेक्ट के लिए अब तक 540 करोड़ रुपये दिया जा चुका है। अगली 50 करोड़ की किस्त दो सप्ताह के भीतर दे दी जाएगी। जहां तक प्रोजेक्ट की बात है तो उसके लिए पर्याप्त फंड है।