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Ghaziabad News: गर्मी से चढ़ा गुस्से का पारा, चिड़चिड़े भी हो रहे लोग
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गाजियाबाद।गर्मी से लोगों के गुस्से का पारा भी चढ़ रहा है। साथ ही लोग चिड़चिड़े भी हो रहे हैं। जिला एमएमजी अस्पताल के वाह्य रोगी विभाग ( ओपीडी ) में ऐसे 35 से 40 मरीज रोज आ रहे हैं जिनमें गर्मी की वजह से तनाव देने वाले हार्मोन बढ़ जाने की समस्या मिल रही है। ऐसे मरीज मानसिक रोग विभाग में भेजे जा रहे हैं। एक महीने पहले तक इनकी संख्या 10 से 15 ही रहती थी।
अस्पताल के मानसिक रोग विभाग के मनोचिकित्सक डॉ. साकेतनाथ तिवारी ने बताया कि तापमान और गुस्से का सीधा असर होता है। गर्मी बढ़ने से पसीना आता है, जिससे व्यवहार में भी बदलाव आ रहा है। शरीर गर्म होने या फिर लगातार पसीना निकलने से बेचैनी हो रही है। यह बढ़ती गर्मी का असर है। लगातार बढ़ता तापमान शरीर के न्यूरो ट्रांसमीटर को प्रभावित कर रहा है। इससे अनिद्रा, थकान और गुस्सा की परेशानी हो रही है। इसके साथ ही स्वभाव में चिड़चिड़ापन भी आ रहा है। गर्मी बढ़ने से स्ट्रेस हार्माेन (कॉर्टिसोल) का लेवल बढ़ जाता है।
एमएमजी अस्पताल के फिजिशियन डॉ. संतराम वर्मा का कहना है कि यह एक तरह का डिसऑर्डर है, जो बढ़ती गर्मी के कारण हो रहा है। शरीर के तापमान को नियंत्रित करने वाला न्यूरो ट्रांसमीटर अधिक गर्मी व सर्दी के कारण गड़बड़ाने लगता है। इससे व्यक्ति में अनिद्रा व गुस्सा बढ़ रहा है। न्यूरो ट्रांसमीटर के लिए 20 से 28 डिग्री सेल्सियस तक तापमान अनुकूल होता है। डॉ. संतराम वर्मा का कहना है कि गर्मी बढ़ने से दिल पर दबाव बढ़ता है तो लोग अधिक तनाव, एंग्जाइटी और गुस्से की समस्या से जूझने लगते हैं। दिल पर सामान्य से अधिक बोझ होने पर इंसान की सोचने-समझने की शक्ति सीधे प्रभावित हो रही है। उसका अपनी भावनाओं पर पूरा कंट्रोल नहीं रह जाता। वह आवेश में फैसले करता है। गर्मी में चिड़चिड़ाहट की असल वजह दिल पर अधिक दबाव रहना है।
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ऑक्सीजन और पानी की कमी से गुस्सा
न्यूरोफिजिशियन डॉ. राकेश कुमार सिंह का कहना है कि शरीर में रक्त, पानी और ऑक्सीजन की जरूरत सबसे अधिक मस्तिष्क को होती है। किसी भी कारण से शरीर में इन तीनों चीजों की कमी होने पर मस्तिष्क पर असर पड़ता है और शरीर की कार्यप्रणाली धीमी हो जाती है। इस कारण से गुस्सा आने लगता है। पारा 44 के पार पहुंचते ही लू के थपेड़े मुंह को जला रहे हैं, इससे शरीर में पानी और ऑक्सीजन का स्तर कम हो रहा है। डिहाइड्रेशन गर्मियों में होने वाली सबसे बड़ी समस्या है। जब शरीर डिहाइड्रेट होगी तो दिमाग की सोचने-समझने की शक्ति और सहनशीलता भी कम हो रही है।
इस तरह से करें बचाव
पानी की कमी नहीं होने दें। हर 20 से 30 मिनट में पानी पीते रहें। दिन में तीन से चार लीटर पानी पीएं
तरबूज, खरबूजा और ककड़ी खाएं। बासी और खट्टी चीजें खाने से बचें
गर्मी में बाहर निकलने से बचें। अगर जाना ही पड़े तो सिर ढककर रखें, छाता लेकर जाएं।
गर्मी में वार्ड से भागकर इमरजेंसी में जा रहे मरीज
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। भीषण गर्मी में संयुक्त अस्पताल की छत तपने और अस्पताल के प्रबंधन की लापरवाही से मेडिकल वार्ड में भर्ती मरीज गर्मी से बेहाल हैं। गर्मी से राहत पाने के लिए अधिकांश मरीज रात में इमरजेंसी में भाग जाते हैं। सुबह होने पर डॉक्टर के आने से पहले वार्ड में वापस आ जाते हैं। जबकि मौसम विभाग ने लू और गर्मी को देखते हुए रेड अलर्ट जारी किया है।
संजय नगर स्थित संयुक्त अस्पताल में रोजाना 20 से 25 मरीज भर्ती हो रहे हैं। इस भीषण गर्मी के कारण वार्ड में भर्ती मरीज परेशान हो रहे हैं। हाल ही में एक कारोबारी ने पांच कूलर दान किया था। मेडिकल वार्ड में एक-एक कूलर लगाए गए हैं। अस्पताल के सभी वार्डों में दो कतार में बेड लगे हैं, दोनों के बीच में कूलर रखे गए हैं। आकार में छोटे होने से किसी भी कतार में मरीजों को हवा नहीं लग रही है। दान में मिले कूलरों में एक खराब हो चुका है, चार चल रहे हैं लेकिन किसी में जाली बाहर निकालकर रखी है तो किसी में पानी नहीं है। जबकि बच्चा वार्ड, सर्जरी वार्ड और नेत्र सर्जरी विभाग में एक भी कूलर या एसी नहीं है। अस्पताल के सीएमएस डॉ. विनोद चंद्र पांडेय का कहना है कि पांच कूलर दान में मिला था, उसे वार्ड में लगवा दिया गया है। प्रयास किया जा रहा है कि वार्ड में एसी लगवाई जाए।
गर्मी से परेशान 256 लोग पहुंचे इलाज कराने
गर्मी और लू से परेशान 256 लोग अस्पताल पहुंचे थे। इनमें अधिकांश मरीजों को सिर व बदन दर्द, मांस पेशियो में ऐंठन, बेचैनी, रक्तचाप कम या अधिक से परेशान थे। सीएमएस डॉ. राकेश कुमार सिंह ने बताया कि गर्मी के कारण बुखार से बीमार हुए 329 मरीज एमएमजी अस्पताल और 175 मरीज संयुक्त अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे थे। शनिवरा को एमएमजी अस्पताल की ओपीडी में 1736 मरीजों का पंजीकरण हुआ, जबकि संयुक्त अस्पताल में 824 मरीजों इलाज कराया।
झुलसाने वाली गर्मी में दिनभर गुल रही बिजली
ट्रांस हिंडन क्षेत्र के इंदिरापुरम, वसुंधरा सहित आठ इलाकों ने झेला संकट
संवाद न्यूज एजेंसी
साहिबाबाद। टीएचए के आठ इलाकों में शनिवार को कहीं लोकल फॉल्ट तो कहीं ट्रांसफॉर्मर के कंडक्टर बदलने की वजह से दिनभर बिजली गुल रही। घंटों बिजली गुल होने से इन्वर्टर की बैटरी डिस्चार्ज हो गई। जिससे घर में पंखा, कूलर, एसी नहीं चलने से बच्चे, बुजुर्ग, महिलाओं सहित अन्य को परेशानी का सामना करना पड़ा। कई इलाकों में दोपहर चार बजे तो कई इलाकों में शाम सात बजे बिजली सुचारू होने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली।
शहर में शनिवार को 45 डिग्री तापमान और गर्म लू के थपेड़ो के बीच टीएचए के वैशाली, इंदिरापुरम, शालीमार गार्डन, राजेंद्रनगर, वसुंधरा, राजबाग, जनकपुरी, शहीदनगर में बिजली आपूर्ति बाधित रही। वैशाली निवासी सुशील ने बताया कि सुबह करीब 11 बजे अचानक बिजली गुल हो गई। एक घंटे इंतजार करने के बाद बिजली सुचारू नहीं होने पर बिजली घर पर फोन किया गया तो कोई जवाब नहीं मिला। आसपास से पता चला की ऊर्जा निगम की टीम केबल बदलने और कंडक्टर बदलने का काम कर रही है। दिनभर काम होने की वजह से शाम सात बजे बिजली आपूर्ति सुचारू हो सकी। राजबाग निवासी सुरेश ने बताया कि सुबह 10 बजे से दिनभर बिजली की आवाजाही होती रही। हर एक घंटे के अंतराल पर बिजली गुल होती रही। यही हाल इंदिरापुरम, वसुंधरा, राजेंद्रनगर सहित अन्य इलाकों को दिनभर बिजली की आवाजाही होती रही।
सामान नहीं होने पर देर से शुरू हुआ काम
ऊर्जा निगम के अवर अभियंता दिनकर ने बताया कि पुराने केबल और कंडक्टर बदलने का काम अप्रैल माह में पूरा होना था मगर ट्रांसफॉर्मर सहित केबल का सामान नहीं होने से काम नहीं हो पाया था। सामान आने के बाद वैशाली में पुराने केबल और कंडक्टर बदलने का काम किया जा रहा है। जिसमें रोजाना पांच से आठ घंटे का समय लग रहा है। अगले चार दिन तक यह काम चलेगा।
पारा पहुंचा 45 के पार
शनिवार को अधिकतम तापमान 45.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। न्यूनतम तापमान भी 28 डिग्री सेल्यिस होने से रात में भी गर्मी से राहत नहीं मिली। मौसम वैज्ञानिक प्रो. यूपी शाही ने बताया कि 22 मई तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में मौसम शुष्क रहने, लू चलने, दिन का तापमान 43 से 45 डिग्री सेल्सियस और रात का 30 डिग्री रहने के आसार हैं। गर्मी और लू के थपेड़ों को देखते हुए गाजियाबाद और आसपास के जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है। रेड अलर्ट उस स्थिति में जारी किया जाता है, जब तेज गर्मी या लू का प्रकोप इस कदर होता है कि घर से बाहर निकलने में बीमार होने का खतरा बढ़ जाता है।
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अस्पताल के मानसिक रोग विभाग के मनोचिकित्सक डॉ. साकेतनाथ तिवारी ने बताया कि तापमान और गुस्से का सीधा असर होता है। गर्मी बढ़ने से पसीना आता है, जिससे व्यवहार में भी बदलाव आ रहा है। शरीर गर्म होने या फिर लगातार पसीना निकलने से बेचैनी हो रही है। यह बढ़ती गर्मी का असर है। लगातार बढ़ता तापमान शरीर के न्यूरो ट्रांसमीटर को प्रभावित कर रहा है। इससे अनिद्रा, थकान और गुस्सा की परेशानी हो रही है। इसके साथ ही स्वभाव में चिड़चिड़ापन भी आ रहा है। गर्मी बढ़ने से स्ट्रेस हार्माेन (कॉर्टिसोल) का लेवल बढ़ जाता है।
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एमएमजी अस्पताल के फिजिशियन डॉ. संतराम वर्मा का कहना है कि यह एक तरह का डिसऑर्डर है, जो बढ़ती गर्मी के कारण हो रहा है। शरीर के तापमान को नियंत्रित करने वाला न्यूरो ट्रांसमीटर अधिक गर्मी व सर्दी के कारण गड़बड़ाने लगता है। इससे व्यक्ति में अनिद्रा व गुस्सा बढ़ रहा है। न्यूरो ट्रांसमीटर के लिए 20 से 28 डिग्री सेल्सियस तक तापमान अनुकूल होता है। डॉ. संतराम वर्मा का कहना है कि गर्मी बढ़ने से दिल पर दबाव बढ़ता है तो लोग अधिक तनाव, एंग्जाइटी और गुस्से की समस्या से जूझने लगते हैं। दिल पर सामान्य से अधिक बोझ होने पर इंसान की सोचने-समझने की शक्ति सीधे प्रभावित हो रही है। उसका अपनी भावनाओं पर पूरा कंट्रोल नहीं रह जाता। वह आवेश में फैसले करता है। गर्मी में चिड़चिड़ाहट की असल वजह दिल पर अधिक दबाव रहना है।
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ऑक्सीजन और पानी की कमी से गुस्सा
न्यूरोफिजिशियन डॉ. राकेश कुमार सिंह का कहना है कि शरीर में रक्त, पानी और ऑक्सीजन की जरूरत सबसे अधिक मस्तिष्क को होती है। किसी भी कारण से शरीर में इन तीनों चीजों की कमी होने पर मस्तिष्क पर असर पड़ता है और शरीर की कार्यप्रणाली धीमी हो जाती है। इस कारण से गुस्सा आने लगता है। पारा 44 के पार पहुंचते ही लू के थपेड़े मुंह को जला रहे हैं, इससे शरीर में पानी और ऑक्सीजन का स्तर कम हो रहा है। डिहाइड्रेशन गर्मियों में होने वाली सबसे बड़ी समस्या है। जब शरीर डिहाइड्रेट होगी तो दिमाग की सोचने-समझने की शक्ति और सहनशीलता भी कम हो रही है।
इस तरह से करें बचाव
पानी की कमी नहीं होने दें। हर 20 से 30 मिनट में पानी पीते रहें। दिन में तीन से चार लीटर पानी पीएं
तरबूज, खरबूजा और ककड़ी खाएं। बासी और खट्टी चीजें खाने से बचें
गर्मी में बाहर निकलने से बचें। अगर जाना ही पड़े तो सिर ढककर रखें, छाता लेकर जाएं।
गर्मी में वार्ड से भागकर इमरजेंसी में जा रहे मरीज
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। भीषण गर्मी में संयुक्त अस्पताल की छत तपने और अस्पताल के प्रबंधन की लापरवाही से मेडिकल वार्ड में भर्ती मरीज गर्मी से बेहाल हैं। गर्मी से राहत पाने के लिए अधिकांश मरीज रात में इमरजेंसी में भाग जाते हैं। सुबह होने पर डॉक्टर के आने से पहले वार्ड में वापस आ जाते हैं। जबकि मौसम विभाग ने लू और गर्मी को देखते हुए रेड अलर्ट जारी किया है।
संजय नगर स्थित संयुक्त अस्पताल में रोजाना 20 से 25 मरीज भर्ती हो रहे हैं। इस भीषण गर्मी के कारण वार्ड में भर्ती मरीज परेशान हो रहे हैं। हाल ही में एक कारोबारी ने पांच कूलर दान किया था। मेडिकल वार्ड में एक-एक कूलर लगाए गए हैं। अस्पताल के सभी वार्डों में दो कतार में बेड लगे हैं, दोनों के बीच में कूलर रखे गए हैं। आकार में छोटे होने से किसी भी कतार में मरीजों को हवा नहीं लग रही है। दान में मिले कूलरों में एक खराब हो चुका है, चार चल रहे हैं लेकिन किसी में जाली बाहर निकालकर रखी है तो किसी में पानी नहीं है। जबकि बच्चा वार्ड, सर्जरी वार्ड और नेत्र सर्जरी विभाग में एक भी कूलर या एसी नहीं है। अस्पताल के सीएमएस डॉ. विनोद चंद्र पांडेय का कहना है कि पांच कूलर दान में मिला था, उसे वार्ड में लगवा दिया गया है। प्रयास किया जा रहा है कि वार्ड में एसी लगवाई जाए।
गर्मी से परेशान 256 लोग पहुंचे इलाज कराने
गर्मी और लू से परेशान 256 लोग अस्पताल पहुंचे थे। इनमें अधिकांश मरीजों को सिर व बदन दर्द, मांस पेशियो में ऐंठन, बेचैनी, रक्तचाप कम या अधिक से परेशान थे। सीएमएस डॉ. राकेश कुमार सिंह ने बताया कि गर्मी के कारण बुखार से बीमार हुए 329 मरीज एमएमजी अस्पताल और 175 मरीज संयुक्त अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे थे। शनिवरा को एमएमजी अस्पताल की ओपीडी में 1736 मरीजों का पंजीकरण हुआ, जबकि संयुक्त अस्पताल में 824 मरीजों इलाज कराया।
झुलसाने वाली गर्मी में दिनभर गुल रही बिजली
ट्रांस हिंडन क्षेत्र के इंदिरापुरम, वसुंधरा सहित आठ इलाकों ने झेला संकट
संवाद न्यूज एजेंसी
साहिबाबाद। टीएचए के आठ इलाकों में शनिवार को कहीं लोकल फॉल्ट तो कहीं ट्रांसफॉर्मर के कंडक्टर बदलने की वजह से दिनभर बिजली गुल रही। घंटों बिजली गुल होने से इन्वर्टर की बैटरी डिस्चार्ज हो गई। जिससे घर में पंखा, कूलर, एसी नहीं चलने से बच्चे, बुजुर्ग, महिलाओं सहित अन्य को परेशानी का सामना करना पड़ा। कई इलाकों में दोपहर चार बजे तो कई इलाकों में शाम सात बजे बिजली सुचारू होने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली।
शहर में शनिवार को 45 डिग्री तापमान और गर्म लू के थपेड़ो के बीच टीएचए के वैशाली, इंदिरापुरम, शालीमार गार्डन, राजेंद्रनगर, वसुंधरा, राजबाग, जनकपुरी, शहीदनगर में बिजली आपूर्ति बाधित रही। वैशाली निवासी सुशील ने बताया कि सुबह करीब 11 बजे अचानक बिजली गुल हो गई। एक घंटे इंतजार करने के बाद बिजली सुचारू नहीं होने पर बिजली घर पर फोन किया गया तो कोई जवाब नहीं मिला। आसपास से पता चला की ऊर्जा निगम की टीम केबल बदलने और कंडक्टर बदलने का काम कर रही है। दिनभर काम होने की वजह से शाम सात बजे बिजली आपूर्ति सुचारू हो सकी। राजबाग निवासी सुरेश ने बताया कि सुबह 10 बजे से दिनभर बिजली की आवाजाही होती रही। हर एक घंटे के अंतराल पर बिजली गुल होती रही। यही हाल इंदिरापुरम, वसुंधरा, राजेंद्रनगर सहित अन्य इलाकों को दिनभर बिजली की आवाजाही होती रही।
सामान नहीं होने पर देर से शुरू हुआ काम
ऊर्जा निगम के अवर अभियंता दिनकर ने बताया कि पुराने केबल और कंडक्टर बदलने का काम अप्रैल माह में पूरा होना था मगर ट्रांसफॉर्मर सहित केबल का सामान नहीं होने से काम नहीं हो पाया था। सामान आने के बाद वैशाली में पुराने केबल और कंडक्टर बदलने का काम किया जा रहा है। जिसमें रोजाना पांच से आठ घंटे का समय लग रहा है। अगले चार दिन तक यह काम चलेगा।
पारा पहुंचा 45 के पार
शनिवार को अधिकतम तापमान 45.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। न्यूनतम तापमान भी 28 डिग्री सेल्यिस होने से रात में भी गर्मी से राहत नहीं मिली। मौसम वैज्ञानिक प्रो. यूपी शाही ने बताया कि 22 मई तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में मौसम शुष्क रहने, लू चलने, दिन का तापमान 43 से 45 डिग्री सेल्सियस और रात का 30 डिग्री रहने के आसार हैं। गर्मी और लू के थपेड़ों को देखते हुए गाजियाबाद और आसपास के जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है। रेड अलर्ट उस स्थिति में जारी किया जाता है, जब तेज गर्मी या लू का प्रकोप इस कदर होता है कि घर से बाहर निकलने में बीमार होने का खतरा बढ़ जाता है।