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स्वाइप मशीन की डिमांड पूरी नहीं कर पा रहे बैंक
ब्यूरो, अमर उजाला /गाजियाबाद
Updated Sat, 24 Dec 2016 01:10 AM IST
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एटीएम के बाहर लगी लाइन
- फोटो : अमर उजाला
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नोटबंदी के बाद से मार्केट में स्वाइप मशीन की डिमांड बढ़ गई है। एसबीआई, पीएनबी, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई, इलाहाबाद बैंक, एक्सिस बैंक, यूनियन बैंक, बैंक ऑफ इंडिया समेत सभी बैंकों में स्वाइप मशीन लेने के लिए आवेदन आ रहे हैं।
बैंक सूत्रों के मुताबिक शहर में सबसे ज्यादा अकाउंट एसबीआई और पीएनबी के होते हैं। मार्केट में ज्यादा कैश पहुंचा नहीं हैं। इसलिए दुकानदार अपना कारोबार प्रभावित होने से बचाने के लिए स्वाइप मशीन की डिमांड कर रहे हैं।
कैशलेस ट्रांजेक्शन के सभी वैकल्पिक उपायाें में सबसे अच्छा स्वाइप मशीन है। अमूमन बैंक के हर ग्राहक के पास डेबिट या क्रेडिट कार्ड होता है। नोटबंदी के बाद जिस तरह से बैंकाें और मार्केट में कैश की कमी हुई उससे ग्राहकों को ज्यादा से ज्यादा डेबिट या क्रेडिट कार्ड के उपयोग करने की तरफ प्रेरित किया।
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अब लोग नकद रुपये बचाने के लिए प्लास्टिक मनी का उपयोग कर रहे हैं। बैंक सूत्रों की मानें तो लोगाें के रुख को देखते हुए अब दुकानदार भी स्वाइप मशीन की डिमांड करने लगे हैं।
वर्तमान में करीब 13 हजार से ज्यादा स्वाइप मशीन की मांग दुकानदारों की तरफ से की गई है। मशीन की डिमांड के हिसाब से सप्लाई नहीं हो पा रही है।
बोले बैंक अधिकारी
- नोटबंदी के बाद से स्वाइप मशीन के बारे में जानकारी लेने केलिए प्रतिदिन 10 से 20 लोग आते हैं। पहले बहुत कम ही दुकानदारों या शोरूम संचालक बैंकों से संपर्क करते थे। धीरे-धीरे यह डिमांड और बढ़ेगी। - जेएस संधु, एजीएम, इलाहाबाद बैंक
- एसबीआई में 200 से ज्यादा स्वाइप मशीन लेने के लिए एप्लीकेशन आई है। जबकि नोटबंदी से अब तक 20 से 25 मशीन दी जा चुकी है। मशीन के लिए मुख्यालय स्तर पर डिमांड भेजी गई है। आपूर्ति होते ही शोरूम संचालकों को स्वाइप मशीन दी जाएगी। - एसके गोयल, आरएम, एसबीआई
स्वाइप मशीन की ट्रांजेक्शन फीस
हर बैंक अलग-अलग ट्रांजेक्शन फीस लेता है। मसलन इलाहाबाद बैंक दो हजार से कम की खरीददारी करने पर 0.75 प्रतिशत फीस लेता है। इससे ऊपर की खरीददारी पर एक प्रतिशत। इसी प्रकार प्राइवेट सेक्टर बैंक 1.5 से 2 दो प्रतिशत तक ट्रांजेक्शन फीस लेते हैं। इसके अलावा दुकानदार को मशीन को इंस्टॉल करने की फीस अलग से देनी पड़ती है।
शाम ढलते ही शहर के एटीएम हो गए खाली
बैंकाें में कुछ हद तक कैश की किल्लत खत्म होने लगी है, लेकिन एटीएम का हाल पहले जैसा ही है। शुक्रवार शाम को शहर की विभिन्न कॉलोनियों में लगे एटीएम का हाल देखा गया। सिर्फ दो एटीएम से कैश निकल रहा था।
बाकी के शटर डाउन थे या वह कैश आउट हो चुके थे। दूसरी ओर दिन में कुछ ही बैंकों केबाहर लोगों की लाइनें दिखाई दी। आंध्रा बैंक, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, पीएनबी, बैंक ऑफ इंडिया की ब्रांच के बाहर लोग लाइन लगाकर कैश के इंतजार में खड़े थे। यहां बैंकों ने 10 से 24 हजार तक वितरित किए। नोटबंदी के बाद शहर के एटीएम की हालत सुधर नहीं रहे हैं। शहर के करीब 90 प्रतिशत से ज्यादा एटीएम कैश आउट हो चुके हैं।
नेहरू नगर (रात 8.15 बजे)
यहां पीएनबी और यूनियन बैंक के एटीएम हैं। पीएनबी के एटीएम का शटर डाउन था। जबकि यूनियन बैंक के एटीएम से कैश नहीं मिल रहा था। कैश न होने की वजह से लोगों की भीड़ नहीं थी।
मालीवाड़ा (रात 8.17 बजे)
मालीवाड़ा में स्थित धनलक्ष्मी बैंक और एचडीएफसी बैंक का शटर बीते 10 दिन से डाउन है। जबकि कुछ दूरी पर स्थित पीएनबी और आईसीआईसीआई बैंक के एटीएम के शटर तो खुले थे पर उसमें कैश नहीं था।
नवयुग मार्केट (8.25 बजे)
नवयुग मार्केट बैंकिंग सेक्टर का हब है। यहां पर सबसे ज्यादा बैंक व एटीएम हैं। कारपोरेशन बैंक, बैंक ऑफ बडौदा, पीएनबी, इलाहाबाद बैंक, युनाइटेड बैंक, सिंडिकेट बैंक, एक्सिस बैंक, सेंट्रल बैंक आफ इंडिया, यूनियन बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, एसबीआई के सभी एटीएम कैश आउट थे। यहां सिर्फ स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर और जयपुर और स्टेट बैंक ऑफ पटियाला के दो एटीएम से ही कैश मिल रहा था। यहां लोग लाइन लगाकर अपनी बारी के इंतजार में खड़े थे।
अंबेडकर रोड (8.40)
अंबेडकर रोड पर सभी एटीएम खाली थे। यहां पर एक्सिस बैंक, एसडीएफी बैंक, देना बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, लक्ष्मी विलास बैंक, पीएनबी के एटीएम के शटर डाउन थ्रे।
क्या कहते हैं लोग
- साहिबाबाद आकर यहां से एटीएम से कैश निकालने पड़ रहे हैं। बीते बृहस्पतिवार को भी आया था पर कैश नहीं मिला। राजेश मौर्या, साहिबाबाद ।
- अर्थला और मोहन नगर में कुल 10 एटीएम हैं। कुछ खराब है और कुछ से कैश नहीं मिल रहा है। पब्लिक परेशान होकर यहां-वहां भाग रही हैं। अजय पांडे, अर्थला
- लाइनपार क्षेत्र की लाखों की आबादी पर एक भी एटीएम काम नहीं कर रहा। लोगों को मजबूर होकर शहर आना पड़ता है। कपिल कुमार, विजय नगर
- ग्रामीण क्षेत्रों के सबसे ज्यादा हालात खराब हैं। यहां न तो एटीएम से पैसा मिल रहा है और न ही बैंकों से। परेशान पब्लिक कहां जाएं। महेश प्रताप, इंद्रगढ़ी
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बैंक सूत्रों के मुताबिक शहर में सबसे ज्यादा अकाउंट एसबीआई और पीएनबी के होते हैं। मार्केट में ज्यादा कैश पहुंचा नहीं हैं। इसलिए दुकानदार अपना कारोबार प्रभावित होने से बचाने के लिए स्वाइप मशीन की डिमांड कर रहे हैं।
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कैशलेस ट्रांजेक्शन के सभी वैकल्पिक उपायाें में सबसे अच्छा स्वाइप मशीन है। अमूमन बैंक के हर ग्राहक के पास डेबिट या क्रेडिट कार्ड होता है। नोटबंदी के बाद जिस तरह से बैंकाें और मार्केट में कैश की कमी हुई उससे ग्राहकों को ज्यादा से ज्यादा डेबिट या क्रेडिट कार्ड के उपयोग करने की तरफ प्रेरित किया।
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अब लोग नकद रुपये बचाने के लिए प्लास्टिक मनी का उपयोग कर रहे हैं। बैंक सूत्रों की मानें तो लोगाें के रुख को देखते हुए अब दुकानदार भी स्वाइप मशीन की डिमांड करने लगे हैं।
वर्तमान में करीब 13 हजार से ज्यादा स्वाइप मशीन की मांग दुकानदारों की तरफ से की गई है। मशीन की डिमांड के हिसाब से सप्लाई नहीं हो पा रही है।
बोले बैंक अधिकारी
- नोटबंदी के बाद से स्वाइप मशीन के बारे में जानकारी लेने केलिए प्रतिदिन 10 से 20 लोग आते हैं। पहले बहुत कम ही दुकानदारों या शोरूम संचालक बैंकों से संपर्क करते थे। धीरे-धीरे यह डिमांड और बढ़ेगी। - जेएस संधु, एजीएम, इलाहाबाद बैंक
- एसबीआई में 200 से ज्यादा स्वाइप मशीन लेने के लिए एप्लीकेशन आई है। जबकि नोटबंदी से अब तक 20 से 25 मशीन दी जा चुकी है। मशीन के लिए मुख्यालय स्तर पर डिमांड भेजी गई है। आपूर्ति होते ही शोरूम संचालकों को स्वाइप मशीन दी जाएगी। - एसके गोयल, आरएम, एसबीआई
स्वाइप मशीन की ट्रांजेक्शन फीस
हर बैंक अलग-अलग ट्रांजेक्शन फीस लेता है। मसलन इलाहाबाद बैंक दो हजार से कम की खरीददारी करने पर 0.75 प्रतिशत फीस लेता है। इससे ऊपर की खरीददारी पर एक प्रतिशत। इसी प्रकार प्राइवेट सेक्टर बैंक 1.5 से 2 दो प्रतिशत तक ट्रांजेक्शन फीस लेते हैं। इसके अलावा दुकानदार को मशीन को इंस्टॉल करने की फीस अलग से देनी पड़ती है।
शाम ढलते ही शहर के एटीएम हो गए खाली
बैंकाें में कुछ हद तक कैश की किल्लत खत्म होने लगी है, लेकिन एटीएम का हाल पहले जैसा ही है। शुक्रवार शाम को शहर की विभिन्न कॉलोनियों में लगे एटीएम का हाल देखा गया। सिर्फ दो एटीएम से कैश निकल रहा था।
बाकी के शटर डाउन थे या वह कैश आउट हो चुके थे। दूसरी ओर दिन में कुछ ही बैंकों केबाहर लोगों की लाइनें दिखाई दी। आंध्रा बैंक, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, पीएनबी, बैंक ऑफ इंडिया की ब्रांच के बाहर लोग लाइन लगाकर कैश के इंतजार में खड़े थे। यहां बैंकों ने 10 से 24 हजार तक वितरित किए। नोटबंदी के बाद शहर के एटीएम की हालत सुधर नहीं रहे हैं। शहर के करीब 90 प्रतिशत से ज्यादा एटीएम कैश आउट हो चुके हैं।
नेहरू नगर (रात 8.15 बजे)
यहां पीएनबी और यूनियन बैंक के एटीएम हैं। पीएनबी के एटीएम का शटर डाउन था। जबकि यूनियन बैंक के एटीएम से कैश नहीं मिल रहा था। कैश न होने की वजह से लोगों की भीड़ नहीं थी।
मालीवाड़ा (रात 8.17 बजे)
मालीवाड़ा में स्थित धनलक्ष्मी बैंक और एचडीएफसी बैंक का शटर बीते 10 दिन से डाउन है। जबकि कुछ दूरी पर स्थित पीएनबी और आईसीआईसीआई बैंक के एटीएम के शटर तो खुले थे पर उसमें कैश नहीं था।
नवयुग मार्केट (8.25 बजे)
नवयुग मार्केट बैंकिंग सेक्टर का हब है। यहां पर सबसे ज्यादा बैंक व एटीएम हैं। कारपोरेशन बैंक, बैंक ऑफ बडौदा, पीएनबी, इलाहाबाद बैंक, युनाइटेड बैंक, सिंडिकेट बैंक, एक्सिस बैंक, सेंट्रल बैंक आफ इंडिया, यूनियन बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, एसबीआई के सभी एटीएम कैश आउट थे। यहां सिर्फ स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर और जयपुर और स्टेट बैंक ऑफ पटियाला के दो एटीएम से ही कैश मिल रहा था। यहां लोग लाइन लगाकर अपनी बारी के इंतजार में खड़े थे।
अंबेडकर रोड (8.40)
अंबेडकर रोड पर सभी एटीएम खाली थे। यहां पर एक्सिस बैंक, एसडीएफी बैंक, देना बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, लक्ष्मी विलास बैंक, पीएनबी के एटीएम के शटर डाउन थ्रे।
क्या कहते हैं लोग
- साहिबाबाद आकर यहां से एटीएम से कैश निकालने पड़ रहे हैं। बीते बृहस्पतिवार को भी आया था पर कैश नहीं मिला। राजेश मौर्या, साहिबाबाद ।
- अर्थला और मोहन नगर में कुल 10 एटीएम हैं। कुछ खराब है और कुछ से कैश नहीं मिल रहा है। पब्लिक परेशान होकर यहां-वहां भाग रही हैं। अजय पांडे, अर्थला
- लाइनपार क्षेत्र की लाखों की आबादी पर एक भी एटीएम काम नहीं कर रहा। लोगों को मजबूर होकर शहर आना पड़ता है। कपिल कुमार, विजय नगर
- ग्रामीण क्षेत्रों के सबसे ज्यादा हालात खराब हैं। यहां न तो एटीएम से पैसा मिल रहा है और न ही बैंकों से। परेशान पब्लिक कहां जाएं। महेश प्रताप, इंद्रगढ़ी